प्रभात न्यूज़ 24:
सुशासन तिहार के नाम पर जनता से छलावा, किसानों को नहीं मिल रही खाद-बीज और बिजली : सुशील शर्मा
बलौदाबाजार/हथबंद।
प्रदेश कांग्रेस प्रतिनिधि एवं पूर्व मंडी अध्यक्ष सुशील शर्मा ने राज्य सरकार द्वारा आयोजित किए जा रहे सुशासन तिहार को लेकर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि सुशासन तिहार आम जनता और किसानों की समस्याओं के समाधान का मंच बनने के बजाय केवल सरकारी उपलब्धियों के प्रचार-प्रसार का माध्यम बनकर रह गया है। शर्मा ने कहा कि प्रदेश के किसान आज भी खाद, बीज, बिजली और सिंचाई जैसी मूलभूत आवश्यकताओं के लिए परेशान हैं, जबकि सरकार विकास और सुशासन के बड़े-बड़े दावे कर रही है।
हथबंद प्रवास के दौरान पत्रकारों से चर्चा करते हुए सुशील शर्मा ने कहा कि सुशासन तिहार का उद्देश्य यदि वास्तव में जनता की समस्याओं का निराकरण होता, तो ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को राहत महसूस होती। लेकिन वास्तविकता इसके विपरीत दिखाई दे रही है। उनके अनुसार गांवों में आयोजित शिविरों में बड़ी संख्या में शिकायतें और आवेदन तो लिए जा रहे हैं, लेकिन उनके निराकरण की स्थिति स्पष्ट नहीं है। इससे आम नागरिकों और किसानों में निराशा बढ़ रही है।
किसानों की समस्याओं पर सरकार का ध्यान नहीं
पूर्व मंडी अध्यक्ष ने कहा कि खरीफ सीजन की तैयारी शुरू हो चुकी है, लेकिन किसानों को अभी तक पर्याप्त मात्रा में रासायनिक खाद और उन्नत किस्म के बीज उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश का किसान पहले से ही मौसम की अनिश्चितता, बिजली कटौती और सिंचाई की समस्याओं से जूझ रहा है। ऐसे में यदि समय पर खाद और बीज उपलब्ध नहीं होंगे तो कृषि उत्पादन प्रभावित होना तय है।
उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि जब खेती का समय नजदीक है, तब किसानों को आवश्यक कृषि सामग्री उपलब्ध कराने के लिए सरकार की ओर से प्रभावी कदम क्यों नहीं उठाए जा रहे हैं। किसानों को लगातार बिजली कटौती का सामना करना पड़ रहा है, जबकि दूसरी ओर बिजली बिलों का बोझ भी बढ़ता जा रहा है। ऐसे हालात में किसान अपनी खेती को कैसे संभालेगा, यह एक बड़ा प्रश्न है।
"सिर्फ आवेदन लिए जा रहे, समाधान नहीं"
सुशील शर्मा ने आरोप लगाया कि सुशासन तिहार के दौरान आयोजित शिविरों में लोगों की समस्याओं से जुड़े आवेदन तो लिए जा रहे हैं, लेकिन उनके निराकरण की दिशा में ठोस कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही है। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में ग्रामीण और किसान अपनी शिकायतें लेकर शिविरों में पहुंचते हैं, लेकिन समाधान के अभाव में मायूस होकर लौटने को मजबूर हैं।
उनका कहना था कि यदि सरकार वास्तव में जनहित को लेकर गंभीर होती तो शिकायतों के त्वरित निराकरण की व्यवस्था सुनिश्चित की जाती। उन्होंने दावा किया कि वर्तमान व्यवस्था में जनता को राहत कम और प्रचार ज्यादा दिखाई दे रहा है।
विपक्ष की अनदेखी का आरोप
कांग्रेस नेता ने यह भी आरोप लगाया कि सुशासन तिहार के आयोजनों में विपक्षी जनप्रतिनिधियों और नेताओं को पर्याप्त महत्व नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता की समस्याओं पर सभी पक्षों की सहभागिता आवश्यक होती है, लेकिन वर्तमान में कार्यक्रमों को एकतरफा तरीके से संचालित किया जा रहा है।
शर्मा का कहना था कि यदि सरकार अपने कार्यों और योजनाओं को लेकर पूरी तरह आश्वस्त है, तो उसे विपक्ष की उपस्थिति और सवालों से डरने की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए। लोकतंत्र में संवाद और जवाबदेही दोनों आवश्यक हैं।
भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के आरोप
सुशील शर्मा ने सुशासन तिहार के आयोजन को लेकर भी कई सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि योजनाओं और शिविरों के संचालन में पारदर्शिता की कमी दिखाई दे रही है। हालांकि उन्होंने अपने आरोपों के समर्थन में कोई दस्तावेजी प्रमाण सार्वजनिक नहीं किए, लेकिन उन्होंने कहा कि विभिन्न क्षेत्रों से अनियमितताओं की शिकायतें सामने आ रही हैं, जिनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि यदि सरकार वास्तव में सुशासन का दावा करती है तो उसे इन शिकायतों की स्वतंत्र जांच करवाकर जनता के सामने वास्तविक स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
किसानों और आम जनता को संघर्ष के लिए तैयार रहने का आह्वान
अपने बयान में सुशील शर्मा ने कहा कि यदि किसानों को समय पर पर्याप्त मात्रा में खाद, उन्नत बीज, सिंचाई के लिए पानी और निर्बाध बिजली उपलब्ध नहीं कराई गई, तो किसानों और आम जनता को अपने अधिकारों के लिए संघर्ष का रास्ता अपनाना पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि कृषि आधारित प्रदेश में किसानों की समस्याओं की अनदेखी लंबे समय तक नहीं की जा सकती।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार किसानों की मांगों को गंभीरता से नहीं लेती है, तो भविष्य में व्यापक जनआंदोलन की स्थिति बन सकती है। शर्मा के अनुसार किसानों और ग्रामीणों की मूलभूत समस्याओं का समाधान सरकार की प्राथमिकता होना चाहिए, न कि केवल योजनाओं और कार्यक्रमों का प्रचार।
जनता को परिणाम चाहिए, केवल घोषणाएं नहीं
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोपों के बीच एक बात स्पष्ट रूप से उभरकर सामने आती है कि ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि, बिजली, पानी और जनसमस्याओं के त्वरित समाधान को लेकर अपेक्षाएं लगातार बढ़ रही हैं। किसान और आम नागरिक चाहते हैं कि सरकारी योजनाओं का लाभ उन्हें समय पर और प्रभावी रूप से मिले। ऐसे में सुशासन तिहार जैसे कार्यक्रमों की सफलता का वास्तविक पैमाना यही होगा कि जनता की समस्याओं का कितनी तेजी और पारदर्शिता से समाधान हो पाता है।














