प्रभात न्यूज़ 24:
जिला मुख्यालय से 5 किलोमीटर दूर अवैध रेत-मुरूम का खेल! आखिर किसके संरक्षण में फल-फूल रहा कारोबार?
बलौदाबाजार।
जिला मुख्यालय से महज 5 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम पंचायत लटुवा में वर्षों से अवैध रेत और मुरूम के कारोबार का खेल खुलेआम चलने की चर्चा है। हैरानी की बात यह है कि यह कथित अवैध कारोबार किसी जंगल या सुनसान इलाके में नहीं, बल्कि मुख्य मार्ग के किनारे संचालित होने की बात ग्रामीणों द्वारा कही जा रही है। इसके बावजूद जिम्मेदार विभागों की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है।
ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र में लंबे समय से रेत और मुरूम का भंडारण तथा बिक्री का कार्य किया जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि संचालक मुख्य सड़क के किनारे ही दुकान संचालित करता है और वहीं से रेत-मुरूम की सप्लाई का नेटवर्क भी संचालित होने की चर्चा है।
बताया जाता है कि निर्माण कार्यों के लिए जरूरतमंद लोगों को बाजार दर से अधिक कीमत पर सामग्री उपलब्ध कराई जाती है।
कार्रवाई क्यों नहीं?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब कथित कारोबार मुख्य सड़क पर खुलेआम संचालित हो रहा है तो खनिज विभाग, राजस्व विभाग और स्थानीय प्रशासन की नजर इस पर क्यों नहीं पड़ रही? ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से यह गतिविधियां जारी हैं, लेकिन प्रभावी कार्रवाई देखने को नहीं मिली।
क्षेत्र के लोगों का आरोप है कि यदि समय-समय पर जांच की जाए तो अवैध भंडारण, परिवहन और बिक्री से जुड़े कई तथ्य सामने आ सकते हैं। ग्रामीणों ने यह भी मांग की है कि रेत और मुरूम के स्रोत की जांच की जाए तथा यह पता लगाया जाए कि सामग्री वैध अनुमति के तहत लाई जा रही है या नहीं।
राजस्व को नुकसान की आशंका
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बिना वैध अनुमति के रेत और मुरूम का उत्खनन अथवा बिक्री की जा रही है तो इससे शासन को राजस्व की हानि हो सकती है। साथ ही वैध व्यवसाय करने वाले लोगों पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। अवैध कारोबार के कारण बाजार में असमान प्रतिस्पर्धा की स्थिति बनती है।
ग्रामीणों में नाराजगी
स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन छोटे मामलों में तत्काल कार्रवाई करता है, लेकिन वर्षों से चल रही ऐसी गतिविधियों पर सख्त कदम नहीं उठाया जाना समझ से परे है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।
उठ रहे बड़े सवाल
क्या संबंधित कारोबार के लिए वैध अनुमति प्राप्त है?
रेत और मुरूम का भंडारण किस आधार पर किया जा रहा है?
सामग्री कहां से लाई जा रही है?
खनिज विभाग ने अब तक कितनी बार जांच की?
यदि कारोबार अवैध है तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन, खनिज विभाग और राजस्व अमला इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं या फिर लटुवा में वर्षों से जारी कथित अवैध रेत-मुरूम का कारोबार इसी तरह चलता रहेगा।
नोट: समाचार स्थानीय लोगों द्वारा लगाए गए आरोपों और क्षेत्र में चल रही चर्चाओं पर आधारित है। प्रशासनिक जांच के बाद ही तथ्यों की आधिकारिक पुष्टि हो सकेगी।











