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20 लाख का चेक डैम या भ्रष्टाचार का स्मारक? खबर छपते ही पहुंचा ठेकेदार, शुरू हुई लीपापोती; बरसात में बहने की आशंका से ग्रामीण चिंतित

क्राइम 10 June 2026 (227)

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प्रभात न्यूज़ 24: 

20 लाख का चेक डैम या भ्रष्टाचार का स्मारक? खबर छपते ही पहुंचा ठेकेदार, शुरू हुई लीपापोती; बरसात में बहने की आशंका से ग्रामीण चिंतित



बलौदाबाजार/लटुआ। 

ग्राम पंचायत लटुआ के नायकटार में निर्मित चेक डैम को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। कुछ दिन पहले निर्माण कार्य में कथित अनियमितताओं और गुणवत्ता संबंधी गंभीर सवालों को लेकर समाचार प्रकाशित होने के बाद अब ग्रामीणों ने नए आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि खबर सामने आने के बाद ठेकेदार मौके पर पहुंचा और निर्माण की खामियों को सुधारने के बजाय केवल "लीपापोती" कर वापस चला गया।



ग्रामीणों के अनुसार, पहले जहां कई स्थानों पर पत्थरों के जोड़ खुले दिखाई दे रहे थे और पर्याप्त सीमेंट प्लास्टर नहीं किया गया था, वहीं समाचार प्रकाशित होने के बाद आनन-फानन में सीमेंट की छपाई कर दी गई। कई स्थानों पर ऊपर-ऊपर से मरम्मत और पैचवर्क किया गया, लेकिन मूल निर्माण की गुणवत्ता पर उठ रहे सवाल अब भी जस के तस बने हुए हैं।



खबर के बाद शुरू हुआ सुधार या सबूत मिटाने की कोशिश?

स्थानीय लोगों का आरोप है कि यदि निर्माण कार्य शुरू से ही मानकों के अनुरूप किया गया होता तो खबर प्रकाशित होने के बाद अलग से मरम्मत और सीमेंट छपाई की जरूरत ही नहीं पड़ती। ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं कि आखिर निर्माण पूरा होने के बाद अचानक इतनी बड़ी मात्रा में मेंटेनेंस और पैचवर्क की आवश्यकता क्यों पड़ गई?

ग्रामीणों का कहना है कि जिस प्रकार जल्दबाजी में सीमेंट का लेप चढ़ाया गया है, वह स्थायी समाधान नहीं बल्कि खामियों को छिपाने का प्रयास प्रतीत होता है।



20 लाख की लागत पर उठ रहे गंभीर सवाल

ग्रामीणों के अनुसार चेक डैम की अनुमानित लागत करीब 20 लाख रुपये बताई जा रही है। ऐसे में लोगों का कहना है कि यदि इतनी बड़ी राशि खर्च की गई है तो निर्माण कार्य भी उसी स्तर का दिखाई देना चाहिए। लेकिन जमीनी स्थिति देखकर लोगों के मन में निर्माण की गुणवत्ता और खर्च की पारदर्शिता को लेकर संदेह पैदा हो रहा है।



ग्रामीणों का आरोप है कि कई हिस्सों में पत्थरों की उचित जमावट नहीं की गई, सीमेंट का उपयोग मानक के अनुरूप नहीं हुआ और निर्माण कार्य में तकनीकी गुणवत्ता का अभाव दिखाई देता है।



पहली बरसात में होगी असली परीक्षा

क्षेत्र के ग्रामीणों का कहना है कि चेक डैम की वास्तविक मजबूती का पता आगामी मानसून में चल जाएगा। उनका दावा है कि यदि तेज बारिश और पानी का दबाव बढ़ा तो वर्तमान स्थिति में संरचना को नुकसान पहुंच सकता है।



ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि यदि निर्माण में वास्तव में लापरवाही हुई है तो करोड़ों नहीं तो लाखों रुपये की सरकारी राशि पानी में बह सकती है और जिस उद्देश्य से चेक डैम का निर्माण किया गया है, वह भी अधूरा रह जाएगा।



जांच की मांग तेज

मामले को लेकर ग्रामीणों ने प्रशासन से स्वतंत्र तकनीकी जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच किसी सक्षम इंजीनियरिंग टीम से कराई जाए तथा उपयोग की गई सामग्री, कार्यप्रणाली और भुगतान संबंधी दस्तावेजों की भी समीक्षा की जाए।



ग्रामीणों का कहना है कि यदि सब कुछ नियमानुसार हुआ है तो जांच से सच्चाई सामने आ जाएगी, लेकिन यदि कहीं गड़बड़ी हुई है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।



बड़ा सवाल

यदि निर्माण कार्य पूरी गुणवत्ता और मानकों के अनुरूप हुआ था, तो समाचार प्रकाशित होने के बाद अचानक मरम्मत और सीमेंट छपाई की जरूरत क्यों पड़ी?

अब निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं। देखना होगा कि संबंधित विभाग इस मामले को गंभीरता से लेकर तकनीकी जांच कराता है या फिर यह मामला भी कागजों में दबकर रह जाएगा। आने वाला मानसून इस चेक डैम की मजबूती ही नहीं, बल्कि निर्माण कार्य की वास्तविक गुणवत्ता की भी परीक्षा लेने वाला है।

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