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सनसनीखेज खुलासा: शराब दुकान से जुड़ा कथित नकली शराब नेटवर्क बेनकाब! ग्रामीणों की सतर्कता से खुली बड़ी पोल, अब पूरे गिरोह पर कार्रवाई की मांग

क्राइम 10 June 2026 (331)

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प्रभात न्यूज़ 24: 

सनसनीखेज खुलासा: शराब दुकान से जुड़ा कथित नकली शराब नेटवर्क बेनकाब! ग्रामीणों की सतर्कता से खुली बड़ी पोल, अब पूरे गिरोह पर कार्रवाई की मांग



बलौदाबाजार। 

जिले में संचालित सरकारी शराब दुकानों की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। ग्राम संडी में ग्रामीणों की जागरूकता और तत्परता से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने न केवल आबकारी विभाग बल्कि पूरे शराब वितरण तंत्र पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। 



ग्रामीणों द्वारा पकड़े गए संदिग्ध युवकों और उनके खुलासे के बाद जिस प्रकार की सामग्री बरामद हुई है, उसने क्षेत्र में नकली अथवा मिलावटी शराब के संभावित कारोबार को लेकर नई बहस छेड़ दी है।



कैसे हुआ खुलासा?

जानकारी के अनुसार मंगलवार देर रात ग्राम संडी के कुछ जागरूक ग्रामीणों ने शराब दुकान के आसपास दो युवकों को संदिग्ध परिस्थितियों में झोले में शराब ले जाते हुए देखा। ग्रामीणों को उनकी गतिविधियां संदिग्ध लगीं तो उन्होंने दोनों को रोककर पूछताछ की।



पूछताछ में युवकों ने कथित रूप से बताया कि वे शराब दुकान से जुड़े एक कर्मचारी के घर से शराब लेकर आ रहे हैं और इसे दुकान तक पहुंचाया जाना था। यह जानकारी मिलते ही ग्रामीण सीधे संबंधित कर्मचारी के घर पहुंच गए।



घर के आसपास मिला पूरा 'सेटअप'

ग्रामीणों के अनुसार घर के आसपास बड़ी संख्या में खाली शराब की बोतलें, विभिन्न ब्रांडों के स्टीकर, ढक्कन, पैकिंग सामग्री तथा शराब तैयार करने अथवा भरने में उपयोग होने वाले संदिग्ध सामान बिखरे पड़े मिले। यह दृश्य देखकर ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया और गांव में चर्चा शुरू हो गई कि कहीं लंबे समय से नकली या मिलावटी शराब तैयार कर उपभोक्ताओं तक तो नहीं पहुंचाई जा रही थी।



ग्रामीणों ने बिना देर किए आबकारी विभाग को सूचना दी। सूचना मिलते ही विभागीय टीम मौके पर पहुंची और जांच शुरू की।



आबकारी विभाग की कार्रवाई

आबकारी विभाग द्वारा जारी जानकारी के अनुसार वृत्त पलारी अंतर्गत आबकारी अधिनियम की धारा 34(2), 59(क) एवं 36 के तहत एक प्रकरण दर्ज किया गया।



कार्रवाई के दौरान दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया—

मुरली टंडन, पिता चंद्रहास

नेतराम डहरिया, पिता तोरण

दोनों निवासी इंदौरी, थाना पिपरिया, जिला कबीरधाम बताए गए हैं।



जब्त सामग्री

आबकारी विभाग द्वारा निम्न सामग्री जब्त किए जाने की जानकारी दी गई है—

360 पाव देशी मदिरा मसाला (कुल 64.8 बल्क लीटर)

52 खाली शीशियां

52 ढक्कन

एक प्लास्टिक जरीकेन में लगभग 15 लीटर रंगीन तरल पदार्थ

कार्रवाई में सहायक जिला आबकारी अधिकारी जलेस सिंह सहित विभागीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों की टीम शामिल रही।



सबसे बड़ा सवाल: क्या सिर्फ दो आरोपी ही जिम्मेदार?

हालांकि विभागीय कार्रवाई के बाद दो आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है, लेकिन कई महत्वपूर्ण प्रश्न अभी भी अनुत्तरित हैं।



क्या यह पूरा मामला केवल दो व्यक्तियों तक सीमित है?

खाली बोतलें, स्टीकर और अन्य सामग्री कहां से लाई जा रही थी?

क्या शराब दुकानों तक अवैध रूप से शराब पहुंचाने का कोई संगठित नेटवर्क सक्रिय है?

क्या अन्य कर्मचारी भी इस कथित गतिविधि से जुड़े हो सकते हैं?

यदि ग्रामीण सतर्कता नहीं दिखाते तो यह गतिविधि कब तक चलती रहती?

इन सवालों के जवाब मिलना अभी बाकी है।



ग्रामीणों की जागरूकता बनी मिसाल

इस पूरे मामले का सबसे सकारात्मक पक्ष ग्रामीणों की सजगता रही। यदि ग्रामीण संदिग्ध गतिविधियों को नजरअंदाज कर देते तो संभवतः यह मामला सामने ही नहीं आता।



आज आवश्यकता है कि प्रत्येक गांव, कस्बे और शहर में नागरिक इसी प्रकार जागरूक रहें। अवैध गतिविधियों के खिलाफ जनता की भागीदारी ही प्रशासन की सबसे बड़ी ताकत होती है।



जब समाज जागता है तो अपराधियों के लिए जगह कम पड़ जाती है।



जिले की अन्य शराब दुकानों को लेकर भी उठ रहे सवाल

जिले के विभिन्न क्षेत्रों से समय-समय पर शराब दुकानों से अवैध रूप से शराब निकाले जाने, निर्धारित प्रक्रिया से बाहर बिक्री तथा संदिग्ध गतिविधियों की शिकायतें सामने आती रही हैं। हालांकि इन शिकायतों की सत्यता जांच का विषय है, लेकिन लगातार मिल रही सूचनाएं यह संकेत अवश्य देती हैं कि व्यापक स्तर पर निगरानी की आवश्यकता है।



विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी शराब दुकानों की नियमित जांच, स्टॉक ऑडिट और सीसीटीवी निगरानी को और अधिक प्रभावी बनाया जाना चाहिए ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता पर तत्काल रोक लगाई जा सके।



पुलिस वेरिफिकेशन हो अनिवार्य

जनहित में यह मांग भी जोर पकड़ रही है कि सरकारी शराब दुकानों में कार्यरत प्रत्येक कर्मचारी, सुपरवाइजर, सेल्समैन एवं संबंधित स्टाफ का अनिवार्य पुलिस सत्यापन कराया जाए।



यदि किसी कर्मचारी का आपराधिक इतिहास हो या वह किसी संगठित अपराध से जुड़ा पाया जाए तो उसे तत्काल सेवा से पृथक किया जाना चाहिए। सरकारी व्यवस्था से जुड़े प्रतिष्ठानों में ऐसे व्यक्तियों की नियुक्ति न केवल व्यवस्था की विश्वसनीयता को प्रभावित करती है बल्कि आम जनता की सुरक्षा संबंधी चिंताओं को भी बढ़ाती है।



प्रशासन से जनता की मांग

क्षेत्र के नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि—

पूरे मामले की निष्पक्ष और गहन जांच कराई जाए।

यदि कोई बड़ा नेटवर्क सक्रिय है तो उसका पर्दाफाश किया जाए।

जिले की सभी शराब दुकानों का विशेष ऑडिट कराया जाए।

कर्मचारियों का अनिवार्य पुलिस सत्यापन कराया जाए।

दोषी पाए जाने वालों पर कठोर कानूनी कार्रवाई हो।

भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए स्थायी निगरानी तंत्र विकसित किया जाए।



जनहित में संदेश

यह घटना केवल एक कार्रवाई नहीं बल्कि समाज के लिए एक संदेश है कि जागरूक नागरिक किसी भी प्रशासनिक व्यवस्था की सबसे बड़ी शक्ति होते हैं। यदि आम लोग संदिग्ध गतिविधियों की सूचना समय पर दें तो अवैध कारोबार, मिलावटखोरी और संगठित अपराध पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकता है।



जिम्मेदारी तय होगी या नहीं? आबकारी अमले पर भी उठ रहे सवाल

इस पूरे मामले के सामने आने के बाद अब चर्चा केवल गिरफ्तार आरोपियों तक सीमित नहीं रह गई है। क्षेत्र में यह सवाल भी तेजी से उठ रहा है कि यदि सरकारी शराब दुकानों से जुड़े कर्मचारी अथवा सुपरवाइजर स्तर के लोग ही इस प्रकार की कथित गतिविधियों में संलिप्त पाए जाते हैं, तो संबंधित क्षेत्र की निगरानी व्यवस्था कितनी प्रभावी है?

ग्रामीणों एवं आम नागरिकों के बीच यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि जिले में समय-समय पर सरकारी शराब दुकानों से अवैध रूप से शराब निकाले जाने, संदिग्ध परिवहन तथा अनियमित बिक्री की शिकायतें सामने आती रही हैं। ऐसे में संबंधित सर्कल प्रभारियों की कार्यप्रणाली पर भी स्वाभाविक रूप से सवाल उठ रहे हैं। जनता के बीच यह जिज्ञासा है कि यदि इस प्रकार की गतिविधियां लंबे समय से संचालित हो रही थीं तो क्या स्थानीय स्तर पर इसकी जानकारी किसी जिम्मेदार अधिकारी तक नहीं पहुंची थी, अथवा निगरानी तंत्र कहीं न कहीं कमजोर साबित हुआ?

इसी क्रम में जिला आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर भी लोगों के मन में अनेक प्रश्न उठ रहे हैं। हालांकि पूरे मामले की वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट होगी, लेकिन जिस प्रकार की सामग्री बरामद होने और गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई है, उसके बाद विभागीय जवाबदेही को लेकर जनचर्चा तेज हो गई है।

अब क्षेत्र के नागरिकों की निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हुई हैं। जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों तथा आम नागरिकों का मानना है कि जिला कलेक्टर को इस पूरे मामले का संज्ञान लेते हुए व्यापक स्तर पर समीक्षा करनी चाहिए। साथ ही जिले की समस्त शराब दुकानों, उनके स्टॉक, परिवहन व्यवस्था एवं कर्मचारियों की भूमिका की विशेष जांच कराए जाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।



जनता की मांग है कि आबकारी विभाग की पूरी कार्यप्रणाली की समीक्षा कर संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों को स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए जाएं तथा जहां भी लापरवाही या मिलीभगत सामने आए, वहां कठोरतम कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। लोगों का कहना है कि जिले में अवैध शराब निर्माण, अवैध परिवहन तथा शराब माफियाओं की बढ़ती गतिविधियों को लेकर लंबे समय से चिंता बनी हुई है और अब निर्णायक कार्रवाई का समय आ गया है।



यदि प्रशासन इस मामले की तह तक जाकर निष्पक्ष जांच करता है और दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करता है, तो इससे न केवल जनता का विश्वास मजबूत होगा बल्कि भविष्य में ऐसे अवैध नेटवर्क पर भी प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा।

 


बलौदाबाजार जिले की जनता ने इस मामले में जो सतर्कता दिखाई है, वह पूरे प्रदेश के लिए एक उदाहरण है। अब सभी की निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं कि वह इस मामले की तह तक जाकर पूरे सच को सामने लाता है या नहीं।

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