प्रभात न्यूज़ 24:
कोयलारी और लटवा के चेक डैम निर्माण पर उठे सवाल, ग्रामीणों ने गुणवत्ता और पारदर्शिता पर जताई चिंता
कुछ ही दिनों में तैयार हुआ निर्माण, सूचना पटल तक नहीं; ग्रामीणों ने जांच की मांग उठाई
बलौदाबाजार।
जल संरक्षण और भू-जल संवर्धन के उद्देश्य से ग्राम पंचायत कोयलारी एवं ग्राम पंचायत लटवा के नायक टार क्षेत्र में निर्मित चेक डैम अब सवालों के घेरे में आ गए हैं। क्षेत्र के कुछ ग्रामीणों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता, तकनीकी मानकों के पालन तथा कार्य में पारदर्शिता को लेकर गंभीर चिंताएं व्यक्त की हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य अत्यंत कम समय में पूरा कर लिया गया, जिससे इसकी मजबूती और गुणवत्ता पर प्रश्नचिह्न लग रहे हैं।
ग्रामीणों के अनुसार चेक डैम निर्माण में न तो पर्याप्त सीमेंट-कंक्रीट का उपयोग दिखाई देता है और न ही पत्थरों की चिनाई तकनीकी मानकों के अनुरूप प्रतीत होती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई स्थानों पर पत्थरों को उचित ढंग से जमाए बिना ही निर्माण कार्य पूरा कर दिया गया है। साथ ही निर्माण के ऊपर आवश्यक कंक्रीटीकरण भी नहीं किया गया, जिससे बरसात के दौरान संरचना के क्षतिग्रस्त होने की आशंका व्यक्त की जा रही है।
सूचना पटल नहीं, खर्च और एजेंसी पर भी सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण स्थल पर किसी प्रकार का सूचना पटल नहीं लगाया गया है। सामान्यतः शासकीय निर्माण कार्यों में योजना का नाम, स्वीकृत राशि, निर्माण एजेंसी, तकनीकी स्वीकृति और कार्य अवधि जैसी जानकारी सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित की जाती है, ताकि आम नागरिक कार्य की निगरानी कर सकें। लेकिन यहां ऐसी कोई जानकारी उपलब्ध नहीं होने से पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि सूचना पटल के अभाव में यह जानना मुश्किल हो रहा है कि निर्माण किस विभाग अथवा एजेंसी द्वारा कराया गया, कितनी राशि स्वीकृत हुई और कार्य की तकनीकी जिम्मेदारी किस अधिकारी के पास थी।
बरसात में होगी असली परीक्षा
क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि चेक डैम जैसी संरचनाएं जल प्रवाह के दबाव को सहन करने के लिए बनाई जाती हैं। यदि निर्माण में गुणवत्ता और तकनीकी मानकों का पालन नहीं किया गया है तो पहली ही बारिश में संरचना को नुकसान पहुंच सकता है। ऐसे में शासन की राशि और जल संरक्षण के उद्देश्य दोनों प्रभावित हो सकते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि निर्माण कार्य वास्तव में निर्धारित मानकों के अनुसार हुआ है तो संबंधित विभाग को निर्माण की तकनीकी जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए, जिससे लोगों की शंकाएं दूर हो सकें।
निष्पक्ष जांच की मांग
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और संबंधित विभाग से मांग की है कि निर्माण कार्य का स्वतंत्र तकनीकी निरीक्षण कराया जाए। साथ ही निर्माण में उपयोग की गई सामग्री, स्वीकृत प्राक्कलन, माप पुस्तिका (एमबी) तथा गुणवत्ता परीक्षण की जांच कराई जाए, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया का इंतजार
इस संबंध में संबंधित विभागीय अधिकारियों का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा। यदि जांच में निर्माण कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप पाया जाता है तो इससे लोगों के बीच फैली शंकाओं का समाधान होगा, वहीं अनियमितता पाए जाने पर जिम्मेदारों के विरुद्ध कार्रवाई की अपेक्षा की जा रही है।











