प्रभात न्यूज़ 24:
गैस संकट से कराह रहा बलौदाबाजार: रसोई ठंडी, जनता बेहाल, आखिर कब जागेगा प्रशासन?
घरेलू गैस की किल्लत ने मचाया हाहाकार, ब्लैक मार्केटिंग के आरोपों से गरमाया शहर
बलौदाबाजार।
एक ओर सरकार आम नागरिकों को राहत पहुंचाने और जीवन को सुगम बनाने के दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर बलौदाबाजार शहर में घरेलू गैस सिलेंडरों की भारी किल्लत ने हजारों परिवारों की रसोई की आग ठंडी कर दी है। हालात इतने गंभीर बताए जा रहे हैं कि सुबह से ही महिलाएं और बुजुर्ग गैस एजेंसियों के बाहर लाइन लगाकर अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन पर्ची कटने के बाद भी कई दिनों से लेकर हफ्तों तक सिलेंडर नहीं मिलने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
शहर के विभिन्न वार्डों से मिल रही जानकारी के अनुसार अनेक परिवार गैस की कमी के कारण भोजन बनाने में परेशानी झेल रहे हैं। कई घरों में दो वक्त की रोटी का संकट खड़ा हो गया है। सबसे ज्यादा परेशानी महिलाओं को हो रही है, जिन्हें रोजाना एजेंसी और वितरण केंद्रों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
सवालों के घेरे में व्यवस्था, आखिर गैस जा कहां रही है?
जनता के बीच सबसे बड़ा सवाल यह गूंज रहा है कि यदि घरेलू उपभोक्ताओं को गैस सिलेंडर नहीं मिल रहे हैं तो फिर सिलेंडर आखिर जा कहां रहे हैं? शहर में यह चर्चा भी तेज है कि कुछ लोग घरेलू गैस सिलेंडरों की कालाबाजारी कर रहे हैं और जरूरतमंद लोगों को ऊंचे दामों पर सिलेंडर बेच रहे हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि घरेलू उपयोग के लिए मिलने वाले सिलेंडर कथित रूप से 3 हजार से 3,500 रुपये तक में बेचे जाने की सूचनाएं मिल रही हैं। यदि इन आरोपों में सच्चाई है तो यह न केवल उपभोक्ताओं के साथ अन्याय है बल्कि आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति व्यवस्था पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
पार्षदों ने भी उठाई आवाज, फिर भी नहीं दिख रहा समाधान
जानकारी के अनुसार नगर पालिका के कुछ पार्षदों ने भी इस गंभीर समस्या को लेकर जिला प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया है और कलेक्टर से मुलाकात कर स्थिति से अवगत कराया है। इसके बावजूद आम जनता को अभी तक कोई ठोस राहत मिलती दिखाई नहीं दे रही है।
लोगों का कहना है कि शिकायतों और जनप्रतिनिधियों के हस्तक्षेप के बाद भी यदि स्थिति जस की तस बनी हुई है, तो जिम्मेदार विभागों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
कलेक्टर से जनता की सीधी गुहार
शहरवासियों की मांग है कि जिला कलेक्टर स्वयं इस मामले का संज्ञान लें और जमीनी स्तर पर जांच कराएं। जनता चाहती है कि यह पता लगाया जाए कि—
घरेलू गैस सिलेंडरों की वास्तविक उपलब्धता कितनी है?
उपभोक्ताओं को समय पर सिलेंडर क्यों नहीं मिल रहे?
क्या वास्तव में कहीं कालाबाजारी हो रही है?
यदि हो रही है तो इसके पीछे कौन लोग हैं?
वितरण व्यवस्था में कहीं कोई गड़बड़ी तो नहीं?
प्रशासन की जवाबदेही तय होना जरूरी
गैस सिलेंडर कोई विलासिता की वस्तु नहीं, बल्कि आम परिवार की मूलभूत आवश्यकता है। जब हजारों परिवार रसोई गैस के लिए परेशान हों और दूसरी तरफ कालाबाजारी की चर्चाएं आम हों, तब प्रशासन की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है।
जरूरत इस बात की है कि जिला प्रशासन, खाद्य विभाग और संबंधित गैस एजेंसियों की संयुक्त जांच कराई जाए, स्टॉक और वितरण का सार्वजनिक सत्यापन किया जाए तथा यदि कहीं भी अवैध भंडारण या ब्लैक मार्केटिंग पाई जाए तो दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए।
जनता का सवाल—कब तक रहेगा यह संकट?
बलौदाबाजार की गलियों, मोहल्लों और चौक-चौराहों पर इन दिनों एक ही सवाल सुनाई दे रहा है—
"आखिर आम आदमी गैस के लिए कब तक भटकेगा?"
"दो वक्त की रोटी बनाने के लिए जनता किसके दरवाजे पर जाए?"
"क्या प्रशासन को इस संकट की गंभीरता का अहसास है?"
अब निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं। जनता उम्मीद कर रही है कि जिम्मेदार अधिकारी केवल फाइलों तक सीमित न रहें, बल्कि जमीन पर उतरकर सच्चाई की जांच करें, कालाबाजारी पर लगाम लगाएं और यह सुनिश्चित करें कि घरेलू गैस सिलेंडर हर जरूरतमंद परिवार तक समय पर पहुंचे।
विशेष टिप्पणी
यदि वास्तव में शहर में गैस की कृत्रिम कमी पैदा कर कालाबाजारी की जा रही है, तो यह केवल आर्थिक अपराध नहीं बल्कि आम जनता के अधिकारों पर सीधा प्रहार है। ऐसे में प्रशासन की त्वरित और पारदर्शी कार्रवाई ही जनता का भरोसा कायम रख सकती है।











