प्रभात न्यूज़ 24:
रायपुर से गिरोधपुरी धाम तक निकली जनकल्याणकारी पदयात्रा, धर्मगुरु सुखवंत साहब के नेतृत्व में उमड़ा आस्था का सैलाब
बलौदाबाजार।
समाज में समरसता, समानता, प्रेम और मानवता का संदेश फैलाने के उद्देश्य से धर्मगुरु सुखवंत साहब के नेतृत्व में रायपुर से पवित्र तीर्थ स्थल गिरोधपुरी धाम तक निकाली गई विशाल जनकल्याणकारी पदयात्रा लगातार आगे बढ़ रही है। इस भव्य यात्रा में हजारों की संख्या में श्रद्धालु और अनुयायी सहभागी बनकर समाज में एकता का संदेश दे रहे हैं।
पदयात्रा के तृतीय दिवस जैसे ही यह काफिला बलौदाबाजार जिले की सीमा में प्रवेश किया, श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। जगह-जगह पुष्प वर्षा, जयघोष और स्वागत के साथ यात्रियों का अभिनंदन किया गया। “अब हिंदुस्तान मनखे-मनखे एक समान” के उद्घोष से पूरा वातावरण गूंज उठा और क्षेत्र भक्तिमय माहौल में डूब गया।
संत समाज का मिला विशेष सानिध्य
इस पवित्र यात्रा में राजगुरु धर्मगुरु बालक दास साहब, गुरु माता प्रवीण माताजी, सोमेश बाबा सहित अनेक संतों का विशेष सानिध्य प्राप्त हो रहा है। संतों की उपस्थिति ने यात्रा को आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान की है। श्रद्धालु न केवल पदयात्रा में सहभागी बन रहे हैं, बल्कि सेवा, सहयोग और व्यवस्था में भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
धर्मगुरु सुखवंत साहब का प्रेरणादायी संबोधन
यात्रा के दौरान जहां-जहां काफिला रुका, वहां हजारों की संख्या में लोगों ने धर्मगुरु सुखवंत साहब के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। अपने संबोधन में धर्मगुरु ने कहा कि यह पदयात्रा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि समाज के कण-कण के कल्याण का संकल्प है।
उन्होंने संत परंपरा के महान प्रवर्तक गुरु घासीदास बाबा के संदेश को स्मरण करते हुए कहा कि “मनखे-मनखे एक समान” का सिद्धांत ही सच्चे धर्म का आधार है। उन्होंने कहा कि यदि हम सब समानता, भाईचारे और मानवता के मार्ग पर चलें, तो समाज में व्याप्त भेदभाव और असमानता स्वतः समाप्त हो जाएगी।
धर्मगुरु सुखवंत साहब ने आगे कहा कि इस पदयात्रा की सबसे बड़ी पूंजी अनुयायियों का प्रेम, विश्वास और समर्थन है। जो भी व्यक्ति निस्वार्थ भाव से इस जनकल्याणकारी अभियान से जुड़ रहा है, उस पर ईश्वर और संतों की कृपा सदैव बनी रहेगी।
उन्होंने विशेष रूप से युवाओं से आह्वान करते हुए कहा कि वे समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति की सेवा को अपना धर्म समझें। सच्चा धर्म मंदिर-मस्जिद तक सीमित नहीं, बल्कि मानवता की सेवा में निहित है।
सामाजिक समरसता का बना संदेशवाहक
यह पदयात्रा केवल आध्यात्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना का भी प्रतीक बन गई है। मार्ग में विभिन्न स्थानों पर भंडारा, जलपान और विश्राम की व्यवस्था स्थानीय नागरिकों द्वारा की जा रही है।
महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों की बड़ी भागीदारी इस बात का प्रमाण है कि समाज में एकता और समानता का संदेश व्यापक रूप से स्वीकार किया जा रहा है।
यात्रा के दौरान अनुशासन और शांतिपूर्ण व्यवस्था का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। स्वयंसेवक दल सुरक्षा, स्वास्थ्य और स्वच्छता की व्यवस्था संभाल रहे हैं।
गिरोधपुरी धाम की ओर बढ़ते कदम
पदयात्रा का अंतिम पड़ाव पवित्र गिरोधपुरी धाम है, जो संत परंपरा और सामाजिक समरसता का प्रमुख केंद्र माना जाता है। यहां पहुंचकर श्रद्धालु सामूहिक प्रार्थना और सत्संग में भाग लेंगे तथा समाज कल्याण के लिए नए संकल्प लेंगे।
इस ऐतिहासिक पदयात्रा ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया है कि जब समाज एकजुट होकर मानवता और समानता के मार्ग पर चलता है, तो सकारात्मक परिवर्तन अवश्य संभव होता है। धर्मगुरु सुखवंत साहब के नेतृत्व में निकली यह यात्रा न केवल आध्यात्मिक जागरण का प्रतीक है, बल्कि सामाजिक एकता और जनकल्याण की दिशा में एक सशक्त कदम भी है।
















