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भवानीपुर/पलारी में अक्षय तृतीया (अकती) पर परंपरागत उल्लास, बच्चों का प्रतीकात्मक विवाह संपन्न

भक्ति 21 April 2026 (42)

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प्रभात न्यूज़ 24: 

भवानीपुर/पलारी में अक्षय तृतीया (अकती) पर परंपरागत उल्लास, बच्चों का प्रतीकात्मक विवाह संपन्न



बलौदाबाजार।

वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर मनाया जाने वाला पावन पर्व अक्षय तृतीया (अकती) इस वर्ष भी भवानीपुर एवं आसपास के ग्रामीण अंचलों में पारंपरिक उत्साह और धार्मिक आस्था के साथ मनाया गया। इस अवसर पर ग्राम में विशेष रूप से बच्चों द्वारा प्रतीकात्मक रूप से “पुत्र-पुत्री विवाह” की प्राचीन लोकपरंपरा का आयोजन किया गया, जिसमें ग्रामीणों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।



अक्षय तृतीया को हिंदू धर्म में अत्यंत शुभ और फलदायी दिन माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन किए गए शुभ कार्यों का पुण्य कभी क्षीण नहीं होता, बल्कि निरंतर बढ़ता रहता है। 



यही कारण है कि इस तिथि पर विवाह, गृह प्रवेश, दान-पुण्य और अन्य मांगलिक कार्य बिना मुहूर्त देखे भी संपन्न किए जाते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में इसे “अकती” के नाम से भी जाना जाता है और विशेष रूप से आदिवासी एवं ग्रामीण समाज में इसका सांस्कृतिक महत्व अत्यधिक है।



भवानीपुर में इस अवसर पर नन्हे-मुन्ने बच्चों द्वारा पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ विवाह कार्यक्रम का आयोजन किया गया।



 इस आयोजन में “चुलमाती” जैसी पारंपरिक विधियों का पालन करते हुए बच्चों का प्रतीकात्मक विवाह कराया गया, जो लोकसंस्कृति की जीवंत झलक प्रस्तुत करता है। 



विवाह समारोह के दौरान पारंपरिक गीत-संगीत, हंसी-खुशी और उल्लास का माहौल बना रहा। महिलाओं और बालिकाओं ने पारंपरिक परिधानों में सजकर कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।



कार्यक्रम में वर्षा, गरिमा, गीतिका, चंचल, गीतू, गीतेश्वरी, मंजू, चित्रलेखा, रितु, लक्ष्मी, गोपिका, निकिता, राजकुमारी, लखेश्वरी सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाएं और युवतियां उपस्थित रहीं। सभी ने मिलकर आयोजन को सफल बनाने में सक्रिय सहयोग दिया। इस दौरान ग्रामीणों ने एकजुटता और सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण का संदेश भी दिया।



ग्रामीणों का कहना है कि इस प्रकार के आयोजन न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत करते हैं, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं और संस्कारों से जोड़ने का कार्य भी करते हैं। बच्चों के माध्यम से किए जाने वाले ये प्रतीकात्मक विवाह समाज में सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक निरंतरता और सामूहिकता की भावना को प्रबल बनाते हैं।



अंत में सभी उपस्थित लोगों ने अक्षय तृतीया के इस पावन अवसर पर सुख-समृद्धि, शांति और समृद्ध भविष्य की कामना की। भवानीपुर में मनाया गया यह आयोजन क्षेत्र की समृद्ध लोकसंस्कृति और परंपराओं का एक सुंदर उदाहरण बनकर सामने आया।

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