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निर्वाचन अधिकारी पर सत्ता पक्ष के उम्मीदवारों को लाभ पहुंचाने का आरोप

छत्तीसगढ़ 30 January 2025 (467)

सत्ता पक्ष के उम्मीदवारों को फायदा पहुंचाने का आरोप

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प्रभात न्यूज़ 24: 

संवाददाता निशांत श्रीवास्तव 

बलौदाबाजार।


नगरीय निकाय चुनाव को लेकर जिले में नामांकन प्रक्रिया लगातार जारी है, लेकिन स्क्रूटनी (जांच) के दौरान निर्वाचन प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि निर्वाचन अधिकारी ने सत्ता पक्ष के उम्मीदवारों को लाभ पहुंचाने के लिए नियमों की अनदेखी की, जबकि निर्दलीय और विपक्षी उम्मीदवारों के नामांकन फार्म को त्रुटिपूर्ण बताकर निरस्त कर दिया गया।


नामांकन स्क्रूटनी के दौरान मचा बवाल


29 जनवरी 2025 को नामांकन पत्रों की जांच का दिन था। इस दौरान वार्ड क्रमांक 10 के उम्मीदवार घनश्याम भारती पिता स्वर्गीय चंद्रशेखर भारती और वार्ड क्रमांक 12 के उम्मीदवार पवन कुमार नायक पिता हरीश नायक अपने-अपने नामांकन की स्क्रूटनी के लिए पहुंचे। उन्होंने नियमानुसार अपने फॉर्म भरे और आवश्यक दस्तावेज जमा किए। लेकिन जब स्क्रूटनी के बाद आदेश जारी हुआ, तो उनके फॉर्म को त्रुटिपूर्ण बताते हुए अस्वीकृत कर दिया गया।


चुनाव अधिकारियों के मुताबिक, उनके नामांकन पत्र में प्रस्तावक के हस्ताक्षर अधूरे थे, जिसके चलते उन्हें खारिज कर दिया गया। लेकिन उम्मीदवारों ने इस फैसले का कड़ा विरोध किया। उन्होंने कहा कि जब वे अपना नामांकन पत्र जमा कर रहे थे, तब अधिकारियों ने उन्हें गलती सुधारने का कोई अवसर नहीं दिया।


"यदि त्रुटि थी, तो हमें पहले ही क्यों नहीं बताया गया? यदि सुधार का मौका दिया जाता, तो हम अपनी गलती सुधार सकते थे।" – घनश्याम भारती, उम्मीदवार वार्ड 10


सत्ता पक्ष के उम्मीदवारों को फायदा पहुंचाने का आरोप


आवेदकों ने निर्वाचन अधिकारी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि दोपहर 3:00 बजे के बाद भी सत्ता पक्ष के दो उम्मीदवारों के फॉर्म में त्रुटि थी, लेकिन उन्हें सुधारने का अवसर दिया गया। इसी आधार पर वे आज प्रत्याशी के रूप में नामांकित हो चुके हैं।


यह आरोप चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़ा कर रहा है। अगर नियमों के तहत एक उम्मीदवार का फॉर्म त्रुटिपूर्ण होने पर अस्वीकार किया गया, तो सत्ता पक्ष के उम्मीदवारों को विशेष सुविधा क्यों दी गई?


सीसीटीवी फुटेज की मांग, न्यायालय जाने की तैयारी


आवेदकों ने निर्वाचन अधिकारी को एक लिखित आवेदन सौंपा है, जिसमें 29 जनवरी 2025 को सुबह 10:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक की पूरी निर्वाचन प्रक्रिया की सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक करने की मांग की गई है। उनका कहना है कि इससे यह स्पष्ट हो जाएगा कि क्या वाकई सत्ता पक्ष के उम्मीदवारों को विशेष सुविधा दी गई थी या नहीं।


इसके अलावा, उम्मीदवारों ने इस मामले को लेकर न्यायालय जाने की भी तैयारी कर ली है। उन्होंने कहा कि यदि उन्हें न्याय नहीं मिला, तो वे चुनाव आयोग और उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे।


निर्वाचन अधिकारी का बयान


रिटर्निंग ऑफिसर दीप्ति गौते ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा,


"नामांकन फार्म जमा करने के बाद स्क्रूटनी के दिन अभ्यर्थी के नामांकन फॉर्म में प्रस्तावक के हस्ताक्षर अधूरे थे, इसलिए उनका नामांकन अस्वीकार किया गया। हमने किसी भी उम्मीदवार के साथ कोई भेदभाव नहीं किया।"


लेकिन सवाल यह उठता है कि यदि त्रुटियों के आधार पर किसी का फॉर्म निरस्त किया गया, तो फिर सत्ता पक्ष के उम्मीदवारों को सुधार का अवसर क्यों दिया गया?


क्या निष्पक्ष रहेगा चुनाव?


इस पूरे घटनाक्रम के बाद विपक्षी दलों और निर्दलीय उम्मीदवारों ने चुनाव प्रक्रिया पर संदेह जताया है। उनका कहना है कि प्रशासन सत्ता पक्ष को लाभ पहुंचाने के लिए कार्य कर रहा है। यदि निष्पक्षता नहीं बरती गई, तो चुनाव आयोग को इस मामले में हस्तक्षेप करना चाहिए।


अब यह देखना होगा कि इस मामले में उच्च निर्वाचन अधिकारी क्या रुख अपनाते हैं? क्या निष्पक्ष जांच होगी? क्या सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक किए जाएंगे? या फिर इस मामले को दबा दिया जाएगा?


खबर अभी जारी है, आगे की अपडेट के लिए जुड़े रहें।

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