प्रभात न्यूज़ 24:
संवाददाता - निशांत श्रीवास्तव
बलौदा बाजार
बलौदा बाजार जिले में आगामी त्रिस्तरीय ग्राम पंचायत चुनाव को लेकर प्रशासन के समक्ष गंभीर चुनौती उत्पन्न हो गई है। ग्राम पंचायत कुकुरदी के ग्रामीणों ने मतदान बहिष्कार का निर्णय लिया है और इस निर्णय से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। प्रशासन द्वारा लगातार ग्रामीणों को मनाने के प्रयास किए जा रहे हैं, किंतु अब तक कोई सफलता नहीं मिली है।
प्रशासन और ग्रामीणों के बीच टकराव
दिनांक 21 फरवरी 2025 को ग्राम पंचायत कुकुरदी में तहसीलदार और बलौदा बाजार सिटी कोतवाली के थाना प्रभारी अजय झा ने ग्रामीणों के साथ सामूहिक बैठक कर मतदान बहिष्कार के मुद्दे पर चर्चा की। ग्रामीणों का आरोप है कि बैठक के नाम पर उन्हें धमकाया जा रहा है और प्रशासन उन पर जबरदस्ती मतदान कराने का दबाव बना रहा है।
ग्राम के एक वरिष्ठ नागरिक डोमार साहू ने बताया कि बैठक में आए हुए अधिकारियों ने कुछ प्रमुख ग्रामीणों के नाम नोट कर लिए थे। उनका आरोप है कि उनके पिताजी, जो बैठक में उपस्थित भी नहीं थे, उनका नाम भी इस सूची में लिख दिया गया, जिससे मानसिक तनाव में आने के कारण उनका ब्लड प्रेशर बढ़ गया और ब्रेन हेमरेज होने से उनकी मृत्यु हो गई।
ग्रामीणों ने प्रशासन पर आरोप लगाते हुए कहा कि वे किसी भी परिस्थिति में मतदान नहीं करेंगे, चाहे प्रशासन कितना भी दबाव बनाए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रशासन लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन कर रहा है और उन्हें उनके मौलिक अधिकारों से वंचित करने का प्रयास किया जा रहा है।
रात्रि बैठक में भी दबाव का आरोप
कुकुरदी ग्राम पंचायत की बैठक में प्रशासन असफल रहने के बाद, थाना प्रभारी ने 10 से 12 ग्रामीणों को रात्रि में चर्चा के लिए बुलाया। ग्रामीणों का आरोप है कि बैठक में मीडिया को सम्मिलित नहीं होने दिया गया और प्रशासन ने उन्हें डराने-धमकाने का प्रयास किया।
बातचीत के दौरान ग्रामीणों ने बताया कि थाना प्रभारी और तहसीलदार उन्हें डरा-धमकाकर मतदान करने के लिए मजबूर करने की कोशिश कर रहे हैं। प्रशासन की यह कोशिश भी विफल रही, जिसके बाद यातायात कार्यालय में उच्च अधिकारियों के साथ बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में अपर कलेक्टर दीपिका गौते, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अभिषेक सिंह और एसडीएम अमित गुप्ता भी उपस्थित थे। हालांकि, यह बैठक भी असफल रही और ग्रामीण अपने निर्णय पर कायम रहे।
सांवरा डेरा विवाद और मतदान बहिष्कार का मुख्य कारण
ग्राम पंचायत कुकुरदी के मतदान बहिष्कार का मुख्य कारण सांवरा डेरा को उनके ग्राम पंचायत का वार्ड घोषित किया जाना है। दिलचस्प बात यह है कि सांवरा डेरा की एक महिला इस वार्ड से निर्विरोध पंच चुनी जा चुकी हैं। इससे स्थिति और जटिल हो गई है क्योंकि अब जिला पंचायत सदस्य और जनपद सदस्य के चुनाव को लेकर विवाद गहराता जा रहा है।
इस ग्राम पंचायत से अन्य किसी भी उम्मीदवार ने नामांकन दाखिल नहीं किया है, जिससे स्थिति और पेचीदा हो गई है। ग्रामीणों का मानना है कि प्रशासन ने जबरदस्ती उनके ग्राम पंचायत में दूसरे वार्ड को जोड़ा है, जिससे वे असहमत हैं और यही कारण है कि वे चुनाव का बहिष्कार कर रहे हैं।
संविधानिक अधिकारों का हनन और ग्रामीणों की मांग
ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि तहसीलदार और थाना प्रभारी द्वारा उन्हें धमकाना उनके मौलिक अधिकारों का हनन है। भारतीय संविधान प्रत्येक नागरिक को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार देता है, लेकिन प्रशासन इस अधिकार का उल्लंघन कर रहा है।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि वे किसी भी स्थिति में मतदान नहीं करेंगे और यदि प्रशासन ने जबरन मतदान कराने की कोशिश की तो वे विरोध प्रदर्शन करेंगे। उन्होंने यह भी मांग की है कि प्रशासन उनकी बात सुने और उनकी शिकायतों का समाधान करे, न कि दबाव बनाए।
स्थिति पर प्रशासन की प्रतिक्रिया
प्रशासन का कहना है कि वे ग्रामीणों से लगातार संवाद कर रहे हैं और उन्हें मतदान के लिए तैयार करने की कोशिश कर रहे हैं। अधिकारियों का दावा है कि मतदान एक लोकतांत्रिक प्रक्रिया है और इसमें सभी नागरिकों की भागीदारी आवश्यक है। हालांकि, प्रशासन ने ग्रामीणों पर किसी भी तरह के दबाव या धमकी देने के आरोपों को खारिज किया है।
आगे की स्थिति पर नजर
यह मामला प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है क्योंकि यदि कुकुरदी के ग्रामीण मतदान का बहिष्कार करते हैं, तो यह चुनाव प्रक्रिया पर भी असर डाल सकता है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि प्रशासन इस संकट का समाधान कैसे करता है और ग्रामीणों को मतदान के लिए कैसे मनाने में सफल होता है।
हम इस पूरे मामले पर नजर बनाए हुए हैं और आगे होने वाली घटनाओं की जानकारी आपको देते रहेंगे।















