प्रभात न्यूज़ 24:
संवाददाता - निशांत श्रीवास्तव
बलौदा बाजार
मुख्य बिंदु:
जनसुनवाई में विरोध: खदान विस्तार परियोजना पर आयोजित जनसुनवाई में ग्रामीणों ने भारी विरोध दर्ज कराया।
झूठे वादों पर सवाल: ग्रामीणों ने रोजगार और विकास के वादों को छलावा बताया।
पर्यावरणीय समस्याएं: खदान से बढ़ती धूल, पानी की कमी और स्वास्थ्य समस्याओं ने ग्रामीणों का जीवन मुश्किल कर दिया है।
विस्तार से खबर:
अंबुजा सीमेंट कंपनी द्वारा चुना पत्थर खदान की क्षमता विस्तार के लिए आयोजित जनसुनवाई में ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। इस जनसुनवाई में सैकड़ों ग्रामीणों ने भाग लिया और परियोजना को लेकर अपनी कड़ी आपत्तियां दर्ज कीं। ग्रामीणों का आरोप है कि कंपनी ने पहले भी रोजगार, विकास और पर्यावरण संरक्षण के वादे किए थे, लेकिन उनका जमीन पर कोई असर नहीं दिखा।
स्थानीय लोगों की नाराजगी और समस्याएं
धूल और पानी की कमी से त्रस्त ग्रामीण:
ग्रामीणों का कहना है कि खदान से निकलने वाली धूल ने उनके जीवन को जहरीला बना दिया है। गांव में जल संकट गहराता जा रहा है, लेकिन कंपनी ने इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया। एक स्थानीय महिला ने कहा, “हमारे खेत सूख रहे हैं, पीने के पानी के लिए बहुत ही ज्यादा समस्या हो रही है । कंपनी के अधिकारी केवल मीठे वादे करते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है।”
रोजगार के नाम पर धोखा:
ग्रामीणों ने दावा किया कि कंपनी के रोजगार के वादे केवल कागजों तक सीमित हैं। स्थानीय युवाओं को अनदेखा कर बाहरी लोगों को नौकरियां दी जा रही हैं। एक युवा ग्रामीण ने कहा, “हमारे गांव के लड़के-लड़कियां बेरोजगार घूम रहे हैं, जबकि कंपनी के बड़े-बड़े वाहन और अधिकारी हमारे संसाधनों का शोषण कर रहे हैं।”
पर्यावरण और बुनियादी ढांचे पर पड़ रहे नकारात्मक प्रभाव
पर्यावरणीय नुकसान:
ग्रामीणों का आरोप है कि खदान संचालन ने इलाके में पर्यावरणीय संकट खड़ा कर दिया है। वायु प्रदूषण, जलस्रोतों का सूखना और वनस्पति की कमी से यहां का पारिस्थितिक संतुलन बिगड़ रहा है। "पिछले पांच सालों में हमने बारिश में भारी कमी देखी है। न तो पेड़ लगाए जा रहे हैं और न ही पर्यावरण को बचाने के उपाय किए जा रहे हैं," एक पर्यावरण कार्यकर्ता ने कहा।
खराब सड़कें और दुर्घटनाओं का खतरा:
ग्रामीणों ने यह भी बताया कि भारी ओवरलोड गाड़ियों के कारण सड़कों की स्थिति बदतर हो गई है। सड़कें टूटी हुई हैं, और लगातार दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है।
ग्रामीणों की मांगें और विरोध प्रदर्शन
ग्रामीणों ने जनसुनवाई में स्पष्ट कहा कि जब तक कंपनी उनकी मांगों को पूरा नहीं करती, वे इस परियोजना को सफल नहीं होने देंगे। उनकी मुख्य मांगें हैं:
1. स्थानीय युवाओं को रोजगार दिया जाए।
2. पर्यावरणीय क्षति को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
3. जल संकट और स्वास्थ्य समस्याओं का समाधान किया जाए।
4. ग्रामीण इलाकों में सड़कों की मरम्मत की जाए।
कंपनी का पक्ष
अंबुजा सीमेंट के अधिकारियों का कहना है कि परियोजना से स्थानीय क्षेत्र में रोजगार के अवसर पैदा होंगे और क्षेत्र का बुनियादी ढांचा मजबूत होगा। कंपनी ने यह भी कहा कि पर्यावरण संरक्षण के सभी मानकों का पालन किया जाएगा।
निष्कर्ष
अंबुजा सीमेंट खदान विस्तार को लेकर ग्रामीणों का विरोध लगातार बढ़ता जा रहा है। यह मामला न केवल ग्रामीणों के रोजगार और विकास से जुड़ा है, बल्कि पर्यावरण और स्वास्थ्य के प्रति कंपनी की जवाबदेही पर भी सवाल खड़े करता है। जब तक ग्रामीणों की मांगें पूरी नहीं होतीं, यह विरोध थमने की संभावना नहीं है।













