प्रभात न्यूज़ 24:
ईश्वर के प्रति निष्कपट प्रेम, अनन्य श्रद्धा और पूर्ण आत्मसमर्पण ही नवधा भक्ति का सार : गोविंद देव गिरी महाराज
प्रेस क्लब बलौदाबाजार ने किया नवधा भक्ति रामकथा का भाव-विभोर रसपान
बलौदाबाजार।
राजधानी स्थित बेबीलाॅन इंटरनेशनल होटल में श्री सीमेंट संयंत्र के तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय भव्य रामकथा का समापन भक्तिमय वातावरण में संपन्न हुआ। 31 जनवरी एवं 1 फरवरी को आयोजित इस आध्यात्मिक आयोजन में कथा व्यास पीठ से प्रसिद्ध संत एवं विद्वान गोविंद देव गिरी महाराज ने नवधा भक्ति की संपूर्ण व्याख्या प्रस्तुत की। कथा के दौरान श्रोतागण भक्ति, श्रद्धा और आत्मिक आनंद में सराबोर नजर आए।
महाराज श्री ने अपने प्रवचन में कहा कि ईश्वर प्राप्ति का मार्ग दिखावटी आडंबर से नहीं, बल्कि निष्कपट प्रेम, अनन्य श्रद्धा और पूर्ण आत्मसमर्पण से प्रशस्त होता है। उन्होंने बताया कि भगवान श्रीराम ने माता शबरी को नवधा भक्ति का उपदेश देकर यह स्पष्ट किया कि भक्ति किसी वर्ग, जाति या परिस्थिति की मोहताज नहीं होती।
नवधा भक्ति : ईश्वर तक पहुँचने के नौ सरल मार्ग
कथा व्यास पीठ से महाराज जी ने रामायण के अरण्यकांड में वर्णित नवधा भक्ति का विस्तार से वर्णन करते हुए बताया कि ये नौ भक्ति मार्ग प्रत्येक मानव के लिए सहज और सुलभ हैं। उन्होंने कहा कि यदि इनमें से कोई एक भक्ति भी मनुष्य के जीवन में उतर जाए, तो उसका जीवन सार्थक हो जाता है।
उन्होंने नवधा भक्ति के नौ स्वरूपों को इस प्रकार समझाया—
सत्संग – संतों और सज्जनों की संगति से जीवन पवित्र होता है।
रामकथा प्रेम – भगवान की कथाओं को श्रद्धा और प्रेम से सुनना।
गुरु सेवा – अहंकार का त्याग कर गुरु चरणों की सेवा करना।
गुणगान – निष्कपट भाव से प्रभु के गुणों का स्मरण और गायन।
मंत्र जाप – पूर्ण विश्वास के साथ भगवान के नाम का जप।
शील और संयम – सदाचार, संयम और वैराग्यपूर्ण जीवन।
समदर्शिता – संपूर्ण सृष्टि में ईश्वर का दर्शन करना।
संतोष – जो प्राप्त हो उसमें संतोष और किसी के प्रति दोष भाव नहीं।
सरलता एवं आत्मनिवेदन – छल-कपट रहित जीवन और स्वयं को प्रभु को समर्पित कर देना।
महाराज जी ने कहा कि भगवान श्रीराम ने मतंग ऋषि के आश्रम में माता शबरी को यह उपदेश देकर समाज को यह संदेश दिया कि सच्ची भक्ति में बाहरी साधनों से अधिक भाव की पवित्रता का महत्व होता है।
धर्म और प्रेम की गंगा बहा रहा आयोजन
आयोजक श्री सीमेंट संयंत्र की ओर से बताया गया कि इस प्रकार के आध्यात्मिक आयोजनों का उद्देश्य समाज में नैतिक मूल्यों, प्रेम, सद्भाव और मानवता को सुदृढ़ करना है। कथा स्थल पर उपस्थित श्रद्धालुओं ने कहा कि इस आयोजन ने उनके जीवन को नई दिशा दी है और भक्ति को सरल रूप में समझने का अवसर मिला है।
प्रेस क्लब बलौदाबाजार की गरिमामयी उपस्थिति
रामकथा के दौरान प्रेस क्लब बलौदाबाजार के सदस्यों ने भी नवधा भक्ति कथा का रसपान किया। पत्रकारों ने इसे आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देने वाला आयोजन बताया। कथा के समापन पर वातावरण “जय श्रीराम” के उद्घोष से गुंजायमान हो उठा।
कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने सभी श्रद्धालुओं, अतिथियों एवं कथा प्रेमियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए भविष्य में भी ऐसे आयोजनों के निरंतर आयोजन की बात कही।
















