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ग्राम तुरमा में श्रद्धा और एकता के साथ मनाई गई श्री गुहराज निषाद जयंती शोभायात्रा, अखंड रामायण और सांस्कृतिक कार्यक्रमों से गूंजा गांव

भक्ति 31 January 2026 (118)

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प्रभात न्यूज़ 24: 

ग्राम तुरमा में श्रद्धा और एकता के साथ मनाई गई श्री गुहराज निषाद जयंती

शोभायात्रा, अखंड रामायण और सांस्कृतिक कार्यक्रमों से गूंजा गांव



भाटापारा/तुरमा।

श्रीराम के परम सखा, श्रृंगेवरपुर के महाराजा एवं निषाद समाज के आराध्य निषाद राज गुह की स्मृति में ग्राम तुरमा में गुहा निषाद जयंती (श्री गुहराज निषाद जयंती) का भव्य आयोजन किया गया। यह आयोजन समाज की ऐतिहासिक विरासत, सामाजिक समरसता और आपसी भाईचारे का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आया। कार्यक्रम श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ सम्पन्न हुआ, जिसमें ग्रामीणों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।

निषाद राज गुह वही महान व्यक्तित्व हैं जिन्होंने वनवास काल में श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण को गंगा नदी पार कराई थी। प्रभु श्रीराम और गुह निषाद की मित्रता भारतीय संस्कृति में निःस्वार्थ मित्रता, सेवा और समर्पण का अनुपम आदर्श मानी जाती है। इसी गौरवशाली परंपरा को स्मरण करते हुए ग्राम तुरमा में यह आयोजन किया गया।



परंपरा और तिथि

गुहा निषाद जयंती देश के विभिन्न अंचलों में परंपरा के अनुसार चैत्र शुक्ल पंचमी (अप्रैल) अथवा जनवरी माह में मनाई जाती है। ग्राम तुरमा में इसे श्रद्धा, शोभायात्रा, पूजा-अर्चना और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ हर्षोल्लास से आयोजित किया गया।

कलश यात्रा से हुआ शुभारंभ

कार्यक्रम का शुभारंभ कलश यात्रा के साथ हुआ। पारंपरिक वेशभूषा में महिलाओं, युवाओं और वरिष्ठजनों की सहभागिता ने पूरे गांव को भक्तिमय वातावरण से सराबोर कर दिया। इसके पश्चात 24 घंटे का अखंड रामायण पाठ आयोजित किया गया, जिसमें ग्रामीणों ने निरंतर सहभागिता निभाई। रामायण पाठ के माध्यम से प्रभु श्रीराम के आदर्शों—सत्य, मर्यादा, मित्रता और सेवा—को आत्मसात करने का संदेश दिया गया।



शोभायात्रा और सांस्कृतिक कार्यक्रम

जयंती अवसर पर शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें निषाद समाज सहित समस्त ग्रामवासियों की सहभागिता रही। सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से रामायण प्रसंगों, लोकगीतों और सामाजिक संदेशों की प्रस्तुति हुई। कार्यक्रमों ने नई पीढ़ी को अपने गौरवशाली इतिहास से जोड़ने का कार्य किया।



सामाजिक समरसता और एकता का संदेश

इस आयोजन का प्रमुख उद्देश्य केवल एक समाज तक सीमित न रहकर संपूर्ण समाज को एकता, शिक्षा और सेवा के मार्ग पर प्रेरित करना रहा। वक्ताओं ने कहा कि आज के समय में पारिवारिक और सामाजिक स्तर पर बढ़ते वाद-विवाद समाज को कमजोर करते हैं। ऐसे में निषाद राज गुह और प्रभु श्रीराम की मित्रता हमें आपसी सम्मान और सहयोग का मार्ग दिखाती है।

ग्राम स्तर पर ऐतिहासिक आयोजन

आयोजकों के अनुसार इस प्रकार का आयोजन ग्राम तुरमा (रामपुर क्षेत्र) में पहली बार हुआ, जो गांव की एकजुटता और भाईचारे का प्रतीक है। समस्त ग्रामवासियों ने एकजुट होकर आयोजन को सफल बनाया और भविष्य में इसे हर वर्ष आयोजित करने का संकल्प लिया।



युवाओं की सक्रिय भूमिका

युवा प्रमुख गोपाल निषाद ने कहा कि यह आयोजन प्रत्येक समाज को दिशा देने वाला है। त्रेता युग में प्रभु श्रीराम ने मित्रता की जो परिभाषा स्थापित की, आज के समय में वही मूल्य समाज को जोड़ सकते हैं। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया के दौर में युवाओं को अपने इतिहास और पौराणिक ग्रंथों के अध्ययन की आवश्यकता है, ताकि भ्रम से बचकर सही मार्ग अपनाया जा सके।

उन्होंने यह भी कहा कि आज की युवा पीढ़ी जिन सांस्कृतिक मूल्यों से दूर होती जा रही है, उन्हें पुनः युवाओं के बीच लाने की जिम्मेदारी समाज की है।



इनकी रही प्रमुख उपस्थिति

कार्यक्रम में निषाद समाज के प्रमुख मदन निषाद, रामरतन निषाद, मालिकराम निषाद, ग्राम पंचायत तुरमा की सरपंच लीलाबाई परस मनहरे, उपसरपंच जीवराखन यदु, समस्त पंचगण, महिला कमांडो के सदस्य, विशेष रूप से चिंताराम पाल, पंचूराम पाल, मिट्ठूलाल पाल, बंशीलाल ध्रुव, नाथूराम यदु, रमेश निषाद, सदाराम, महेश, भगत निषाद, सोनू निषाद, कुमार निषाद, सूरजमल निषाद, इतवारी निषाद, गिरधारी निषाद, सुखरू निषाद, होमकुमार निषाद, ननकू निषाद, देवसिंह निषाद, नरोत्तम निषाद, बहुर निषाद, दौवा निषाद, राजू निषाद, रामु निषाद, दिनेश निषाद, रामचरण निषाद सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।

युवाओं में गोपाल निषाद, शंभू निषाद, योगेश निषाद, लीलाधर निषाद, महेंद्र निषाद, गीतेश निषाद, पुरुषोत्तम निषाद, हेमसिंह, खेम सिंह, गणेश निषाद, नरेश निषाद, दिनेश्वर, सुरेंद्र निषाद, गंगू निषाद, किशन निषाद, देवेंद्र निषाद, खीरचंद निषाद, किरण निषाद, विजय निषाद सहित समस्त युवा साथियों का विशेष योगदान रहा।


भविष्य का संकल्प

आयोजकों ने बताया कि गुहा निषाद जयंती का यह आयोजन प्रतिवर्ष आयोजित किया जाएगा और इसे और अधिक व्यापक स्वरूप दिया जाएगा, ताकि समाज में सांस्कृतिक चेतना, सामाजिक एकता और नैतिक मूल्यों को मजबूती मिल सके।

समग्र रूप से, ग्राम तुरमा में आयोजित श्री गुहराज निषाद जयंती न केवल निषाद समाज बल्कि समस्त ग्रामवासियों के लिए एक प्रेरणादायी, ऐतिहासिक और स्मरणीय आयोजन साबित हुई, जिसने प्रभु श्रीराम के आदर्शों को आत्मसात करने और समाज को जोड़ने का संदेश दिया।

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