प्रभात न्यूज़ 24:
नुक्कड़ नाटक के ज़रिए छात्रों ने दिया सशक्त संदेश:
“मोबाइल को न बनाएं औज़ार, न बनने दें अपनी जान का दुश्मन”
बलौदाबाजार।
डिजिटल युग में मोबाइल फोन जहां एक ओर ज्ञान और संचार का सशक्त माध्यम बन चुका है, वहीं दूसरी ओर इसके दुरुपयोग ने समाज में कई नई चुनौतियाँ भी खड़ी कर दी हैं। इन्हीं चुनौतियों के प्रति जन-जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से आज बलौदाबाजार में एक्स्ट्राआर्डिनरी स्कूल के विद्यार्थियों ने स्थानीय क्षेत्रों में एक प्रभावशाली नुक्कड़ नाटक का मंचन किया। इस नाटक ने उपस्थित लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया कि तकनीक का सही उपयोग ही उसे वरदान बना सकता है, अन्यथा वही अभिशाप भी बन सकती है।
नाटक का मूल संदेश: डिजिटल अनुशासन ही समाधान
नाटक का शीर्षक था – “मोबाइल को बनाएं औज़ार, न बनने दें अपनी जान का दुश्मन”।
छात्रों ने अपने जीवंत अभिनय, प्रभावशाली संवाद और भावनात्मक प्रस्तुति के माध्यम से मोबाइल फोन के दुष्प्रभावों को बेहद सरल और प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया।
नाटक की शुरुआत एक सामान्य परिवार के दृश्य से हुई, जिसमें घर के सभी सदस्य एक ही कमरे में मौजूद होते हुए भी मोबाइल में व्यस्त दिखाए गए। इस दृश्य ने दर्शाया कि कैसे मोबाइल ने पारिवारिक संवाद और आत्मीयता को प्रभावित किया है।
नाटक में उठाए गए प्रमुख मुद्दे
डिजिटल दूरी
छात्रों ने दिखाया कि कैसे एक ही घर में रहते हुए भी लोग मोबाइल में इतने व्यस्त हो जाते हैं कि आपसी बातचीत और संबंध कमजोर पड़ जाते हैं।
संवाद में एक पात्र कहता है –
"हम एक ही छत के नीचे रहते हैं, लेकिन दिलों के बीच की दूरी बढ़ती जा रही है।"
शिक्षा पर प्रभाव
नाटक में यह भी दर्शाया गया कि कैसे मोबाइल गेम्स और सोशल मीडिया की लत विद्यार्थियों की पढ़ाई और एकाग्रता को प्रभावित कर रही है।
एक छात्र के किरदार ने परीक्षा में असफल होने के बाद आत्ममंथन करते हुए कहा –
"किताबें खुली रहीं, पर नजरें मोबाइल की स्क्रीन से नहीं हट पाईं।"
स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं
छात्रों ने आँखों की रोशनी में कमी, नींद की समस्या, मानसिक तनाव और सामाजिक अलगाव जैसे गंभीर विषयों को भी प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया।
एक दृश्य में डॉक्टर की भूमिका निभा रहे छात्र ने बताया कि अत्यधिक स्क्रीन टाइम बच्चों और युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर डाल रहा है।
दर्शकों की उमड़ी भीड़, मिली भरपूर सराहना
नुक्कड़ नाटक को देखने के लिए स्थानीय नागरिकों, अभिभावकों और युवाओं की भारी भीड़ एकत्रित हुई। प्रस्तुति के दौरान कई बार तालियों की गड़गड़ाहट से माहौल गूंज उठा।
एक अभिभावक ने कहा –
"आज के समय में जब छोटे बच्चे भी मोबाइल के बिना खाना नहीं खाते, ऐसे में इन छात्रों द्वारा दिया गया यह संदेश समाज के लिए आंखें खोलने वाला है।"
दर्शकों ने छात्रों की अभिनय क्षमता और सामाजिक समझ की मुक्तकंठ से प्रशंसा की।
विद्यालय प्रशासन का उद्देश्य
विद्यालय की प्राचार्या डॉ. एकता शुक्ला ने छात्रों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा –
"हमारा उद्देश्य केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित शिक्षा देना नहीं है, बल्कि बच्चों को जागरूक, जिम्मेदार और संवेदनशील नागरिक बनाना है। तकनीक का उपयोग ज्ञान और नवाचार के लिए होना चाहिए, न कि समय की बर्बादी के लिए।"
विद्यालय के डायरेक्टर अभिषेक तिवारी एवं टूकेश्वर वर्मा ने भी कार्यक्रम को सफल बनाने में सक्रिय सहयोग दिया। उन्होंने कहा कि बच्चों में बढ़ते डिजिटल दुष्प्रभावों को कम करने के लिए इस तरह की रचनात्मक पहल आवश्यक है।
शिक्षकों की भूमिका रही सराहनीय
कार्यक्रम की सफलता में विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
आकांक्षा मैम, सपना मैम, काजल मैम, लता मैम, सुशील सर, वैष्णो सर, हरीश सर एवं अन्य शिक्षकों ने विद्यार्थियों का मार्गदर्शन कर नाटक को प्रभावशाली बनाया।
एक शिक्षक ने कहा –
"हमारा कार्य केवल बच्चों को किताबी ज्ञान देना नहीं, बल्कि उन्हें वैचारिक और सामाजिक जिम्मेदारियों से भी अवगत कराना है। जब छात्र स्वयं समाज को संदेश देने के लिए आगे आते हैं, तो शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य पूर्ण होता है।"
अंत में ली गई शपथ
नाटक के समापन पर सभी छात्रों और उपस्थित नागरिकों ने सामूहिक रूप से ‘डिजिटल अनुशासन’ बनाए रखने और मोबाइल का सीमित एवं सकारात्मक उपयोग करने की शपथ ली।
शपथ के दौरान यह संकल्प लिया गया कि मोबाइल का उपयोग केवल आवश्यक कार्यों और ज्ञानवर्धन के लिए किया जाएगा।
सामाजिक जागरूकता की मिसाल
यह नुक्कड़ नाटक केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि सामाजिक चेतना का सशक्त माध्यम बनकर सामने आया।
आज के दौर में जब डिजिटल लत एक गंभीर समस्या बनती जा रही है, ऐसे में छात्रों द्वारा दिया गया यह संदेश समाज के लिए प्रेरणादायक है।
बलौदाबाजार में आयोजित यह कार्यक्रम इस बात का प्रमाण है कि यदि युवाओं को सही दिशा और मार्गदर्शन मिले, तो वे समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने की क्षमता रखते हैं।













