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पांच दिनों तक ठप रही मीडियम रेंज ब्रांड की बिक्री, हथबंध शराब दुकान की व्यवस्था पर उठे सवाल स्कैनिंग सिस्टम की तकनीकी खामी या प्रबंधन की लापरवाही? उपभोक्ताओं ने मांगी निष्पक्ष जांच

क्राइम 23 June 2026 (88)

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प्रभात न्यूज़ 24: 

पांच दिनों तक ठप रही मीडियम रेंज ब्रांड की बिक्री, हथबंध शराब दुकान की व्यवस्था पर उठे सवाल

स्कैनिंग सिस्टम की तकनीकी खामी या प्रबंधन की लापरवाही? उपभोक्ताओं ने मांगी निष्पक्ष जांच



हथबंध। 

ग्राम हथबंध स्थित देशी-विदेशी मदिरा दुकान में पिछले पांच दिनों से उत्पन्न हुई स्कैनिंग समस्या ने शराब उपभोक्ताओं के बीच भारी असंतोष पैदा कर दिया है। दुकान में उपलब्ध लोकप्रिय मीडियम रेंज ब्रांडों की शराब का स्कैनिंग सिस्टम काम नहीं करने से उनकी बिक्री लगभग पूरी तरह प्रभावित रही, जबकि अन्य महंगे ब्रांडों की बिक्री सामान्य रूप से जारी रही।


 इस पूरे घटनाक्रम ने न केवल दुकान की कार्यप्रणाली बल्कि आबकारी विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

जानकारी के अनुसार दुकान में उपलब्ध मीडियम रेंज के लोकप्रिय ब्रांड आरएस, आरसी एवं मैकडॉवेल की बोतलों का बारकोड अथवा स्कैनिंग सिस्टम पिछले पांच दिनों से काम नहीं कर रहा था। परिणामस्वरूप इन ब्रांडों की बिक्री नहीं हो सकी। हैरानी की बात यह रही कि दुकान में इन ब्रांडों का पर्याप्त स्टॉक मौजूद होने के बावजूद उपभोक्ताओं को उनकी पसंद का उत्पाद उपलब्ध नहीं कराया गया।



पसंदीदा ब्रांड नहीं मिलने से नाराज हुए ग्राहक

स्थानीय उपभोक्ताओं का आरोप है कि जब वे अपनी पसंद के मीडियम रेंज ब्रांड खरीदने पहुंचे तो उन्हें यह कहकर मना कर दिया गया कि संबंधित शराब की बोतलें स्कैन नहीं हो रही हैं। इसके बदले ग्राहकों को अन्य कम लोकप्रिय अथवा कम मांग वाले ब्रांड खरीदने की सलाह दी गई। कई लोगों ने मजबूरी में दूसरे ब्रांड खरीदे, जबकि कुछ ग्राहक बिना खरीदारी किए वापस लौट गए।



ग्राहकों का कहना है कि सरकारी शराब दुकानों का उद्देश्य उपभोक्ताओं को निर्धारित मूल्य पर उपलब्ध ब्रांड उपलब्ध कराना है, लेकिन यहां स्थिति इसके विपरीत दिखाई दी। लोगों का सवाल है कि जब स्टॉक मौजूद था तो पांच दिनों तक तकनीकी समस्या का समाधान क्यों नहीं किया गया।



प्रीमियम ब्रांडों की बिक्री जारी रहने से बढ़ी शंका

मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह रहा कि जहां मीडियम रेंज के लोकप्रिय ब्रांडों की बिक्री बाधित रही, वहीं प्रीमियम श्रेणी की शराब जैसे हंड्रेड पाइपर्स और ब्लैक एंड व्हाइट का स्कैनिंग सिस्टम सामान्य रूप से कार्य करता रहा। इन ब्रांडों की बिक्री में किसी प्रकार की बाधा नहीं आई।

इसी तथ्य को लेकर स्थानीय लोगों और उपभोक्ताओं के बीच कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। कुछ उपभोक्ताओं ने आशंका जताई कि कहीं यह केवल तकनीकी समस्या नहीं बल्कि स्टॉक प्रबंधन से जुड़ा मामला तो नहीं है। 

उनका कहना है कि यदि स्कैनिंग सिस्टम में व्यापक तकनीकी खराबी होती तो सभी ब्रांड प्रभावित होते, लेकिन केवल कुछ चुनिंदा लोकप्रिय ब्रांडों का प्रभावित होना संदेह पैदा करता है।

हालांकि इस संबंध में किसी भी प्रकार का प्रत्यक्ष प्रमाण सामने नहीं आया है और न ही दुकान प्रबंधन द्वारा कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी किया गया है।



पांच दिनों तक क्यों नहीं हुआ समाधान?

स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्तमान समय में अधिकांश सरकारी शराब दुकानों का संचालन पूरी तरह डिजिटल व्यवस्था पर आधारित है।

 ऐसे में यदि किसी ब्रांड का स्कैनिंग सिस्टम कार्य नहीं कर रहा था तो इसकी जानकारी तत्काल उच्च अधिकारियों को देकर समस्या का समाधान कराया जाना चाहिए था।

ग्रामीणों का कहना है कि पांच दिनों तक समस्या का बने रहना व्यवस्था की कार्यकुशलता पर प्रश्नचिन्ह लगाता है। यदि तकनीकी खराबी थी तो संबंधित एजेंसी अथवा विभाग को तत्काल हस्तक्षेप कर उसे ठीक करना चाहिए था ताकि उपभोक्ताओं को असुविधा न होती।



आबकारी विभाग से जांच की मांग

मामले को लेकर मदिरा उपभोक्ताओं और क्षेत्र के नागरिकों ने आबकारी विभाग से निष्पक्ष जांच की मांग की है। 

लोगों का कहना है कि विभाग को यह स्पष्ट करना चाहिए कि आखिर किन कारणों से लोकप्रिय ब्रांडों की बिक्री बाधित हुई और पांच दिनों तक समाधान क्यों नहीं हो सका।

उपभोक्ताओं का यह भी कहना है कि यदि वास्तव में तकनीकी खराबी थी तो उसकी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए ताकि किसी प्रकार की भ्रांति या संदेह की स्थिति समाप्त हो सके। साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए।



आबकारी उपनिरीक्षक ने माना तकनीकी समस्या

उक्त मामले की जानकारी मोबाइल फोन के माध्यम से सिमगा आबकारी उपनिरीक्षक उज्ज्वल सूत्रधार को दी गई। इस संबंध में उन्होंने बताया कि संबंधित ब्रांडों के स्कैनिंग सिस्टम में तकनीकी समस्या उत्पन्न हुई थी। 

उन्होंने कहा कि विभाग द्वारा समस्या के समाधान के लिए आवश्यक कार्रवाई की जा रही है और जल्द ही स्थिति सामान्य हो जाएगी।

हालांकि विभागीय अधिकारी के इस बयान के बाद भी उपभोक्ताओं के मन में कई सवाल बने हुए हैं। लोगों का कहना है कि तकनीकी समस्या स्वीकार किए जाने के बाद अब यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि समस्या उत्पन्न कैसे हुई और उसे दूर करने में पांच दिन का समय क्यों लगा।



उपभोक्ता हितों की अनदेखी पर उठे सवाल

स्थानीय नागरिकों का मानना है कि सरकारी शराब दुकानों में पारदर्शिता और उपभोक्ता हित सर्वोपरि होना चाहिए। यदि किसी ब्रांड का स्टॉक उपलब्ध है तो उपभोक्ता को उसकी पसंद का उत्पाद प्राप्त होना चाहिए। लंबे समय तक किसी लोकप्रिय ब्रांड की बिक्री बाधित रहना न केवल उपभोक्ताओं की स्वतंत्र पसंद को प्रभावित करता है बल्कि व्यवस्था की विश्वसनीयता पर भी असर डालता है।



अब क्षेत्रवासियों की निगाहें आबकारी विभाग की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। यदि विभाग मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति सार्वजनिक करता है तो उपभोक्ताओं के बीच उत्पन्न अविश्वास की स्थिति समाप्त हो सकती है। वहीं यदि मामले को केवल तकनीकी खामी बताकर छोड़ दिया जाता है तो यह विवाद आने वाले दिनों में और गहरा सकता है।

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