प्रभात न्यूज़ 24:
देवसुंद्रा में संदिग्ध खाद बिक्री का बड़ा खेल उजागर, किसानों की सतर्कता और प्रशासन की तत्परता से टली ठगी
पिकअप वाहन से 13 बोरी दानेदार सॉइल कंडीशनर और 12 बोतल ह्यूमिक एसिड जब्त, कार्रवाई से पहले आरोपी हुआ फरार
पलारी।
क्षेत्र के ग्राम देवसुंद्रा में किसानों को कथित रूप से फर्जी अथवा संदिग्ध खाद बेचने के प्रयास का मामला सामने आया है। किसानों की सजगता और प्रशासन की त्वरित कार्रवाई के चलते एक बड़ा खाद कारोबार पकड़ा गया, जिससे दर्जनों किसानों को आर्थिक नुकसान और संभावित ठगी से बचाया जा सका। मामले की सूचना मिलते ही राजस्व एवं कृषि विभाग की संयुक्त टीम मौके पर पहुंची और एक पिकअप वाहन से बड़ी मात्रा में खाद सामग्री जब्त कर जांच शुरू कर दी है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार कुछ लोग रायपुर से खाद लेकर देवसुंद्रा गांव पहुंचे थे और किसानों को उर्वरक के नाम पर खाद बेचने का प्रयास कर रहे थे। ग्रामीणों और किसानों को जब खाद की गुणवत्ता और उसकी पैकिंग पर संदेह हुआ तो उन्होंने तत्काल इसकी सूचना प्रशासन को दी। सूचना मिलते ही प्रशासन हरकत में आया और वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर मौके पर दबिश दी गई।
बताया जाता है कि अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) दीपक निकुंज के निर्देश पर तहसीलदार ईश्वर केंवट तथा संबंधित विभागीय अधिकारियों की टीम ग्राम देवसुंद्रा पहुंची। निरीक्षक सुचिन वर्मा सहित अन्य कर्मचारियों ने संदिग्ध वाहन और उसमें रखी सामग्री की जांच की। जांच के दौरान पिकअप वाहन से 13 बोरी दानेदार सॉइल कंडीशनर तथा 12 बोतल ह्यूमिक एसिड बरामद किया गया।
कार्रवाई की भनक लगते ही मौके से भाग निकला विक्रेता
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार प्रशासनिक टीम के पहुंचने से पहले ही खाद बेचने वाला व्यक्ति मौके से फरार हो गया। इससे यह संदेह और गहरा गया कि संबंधित व्यक्ति बिना वैध अनुमति या भ्रामक तरीके से खाद बेचने का प्रयास कर रहा था। फिलहाल प्रशासन वाहन और जब्त सामग्री के आधार पर संबंधित व्यक्तियों की पहचान करने तथा पूरे नेटवर्क की जांच में जुट गया है।
डीएपी जैसी पैकिंग ने बढ़ाया संदेह
अधिकारियों के अनुसार जब्त की गई खाद सामग्री की पैकिंग और उसका स्वरूप सामान्य डीएपी खाद से काफी मिलता-जुलता प्रतीत हुआ। खाद के दाने भी ऐसे तैयार किए गए थे कि पहली नजर में किसान इसे डीएपी उर्वरक समझ सकते थे। यही कारण है कि ग्रामीणों को इसकी बिक्री प्रक्रिया और गुणवत्ता पर संदेह हुआ।
जानकारी के मुताबिक उक्त सामग्री को लगभग 1400 रुपये प्रति बोरी की दर से किसानों को बेचे जाने की तैयारी थी। यदि समय रहते कार्रवाई नहीं होती तो कई किसान इसे वास्तविक उर्वरक समझकर खरीद सकते थे और आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ सकता था।
उर्वरक नियंत्रण आदेश और आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत जांच
प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि जब्त सामग्री की वैधता, गुणवत्ता और बिक्री संबंधी दस्तावेजों की जांच की जा रही है। प्रारंभिक स्तर पर मामले में उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 तथा आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा 3 के प्रावधानों के तहत कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की गई है। जांच के बाद दोषियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कदम उठाए जा सकते हैं।
खेती-किसानी के मौसम में बढ़ जाती है नकली खाद की आशंका
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि खरीफ और रबी सीजन के दौरान उर्वरकों की मांग बढ़ने के साथ ही नकली, घटिया अथवा भ्रामक तरीके से बेचे जाने वाले कृषि उत्पादों का खतरा भी बढ़ जाता है। कई बार किसान जल्दबाजी में बिना बिल और बिना प्रमाणित विक्रेता से खाद खरीद लेते हैं, जिससे उन्हें फसल उत्पादन में भारी नुकसान उठाना पड़ता है।
विशेषज्ञों ने किसानों से अपील की है कि वे केवल अधिकृत विक्रेताओं से ही खाद एवं कृषि आदान सामग्री खरीदें तथा खरीदारी के समय पक्का बिल अवश्य लें। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तत्काल कृषि विभाग अथवा प्रशासन को दें।
किसानों की जागरूकता बनी मिसाल
देवसुंद्रा में सामने आया यह मामला इस बात का उदाहरण है कि यदि किसान जागरूक रहें और समय पर सूचना दें तो अवैध कारोबारियों की योजनाओं को विफल किया जा सकता है। ग्रामीणों की सतर्कता और प्रशासन की त्वरित कार्रवाई के कारण एक संभावित ठगी का मामला उजागर हुआ और कई किसानों को नुकसान से बचाया जा सका।
क्षेत्र में चर्चा का विषय बना मामला
घटना के बाद पूरे क्षेत्र में खाद की गुणवत्ता और उसकी बिक्री को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। किसान संगठन भी इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्रशासन नियमित रूप से ऐसे वाहनों और संदिग्ध विक्रेताओं की जांच करे तो नकली एवं भ्रामक कृषि उत्पादों के कारोबार पर प्रभावी रोक लगाई जा सकती है।
फिलहाल जब्त सामग्री की जांच जारी है और प्रशासन पूरे मामले की तह तक पहुंचने का प्रयास कर रहा है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि जब्त की गई सामग्री मानकों के अनुरूप थी या किसानों को भ्रमित कर बेचने का प्रयास किया जा रहा था।














