प्रभात न्यूज़ 24:
नकटा तालाब बना वादाखिलाफी का प्रतीक? पांच साल से सफाई की मांग, तालाब सुखाकर छोड़ा अधूरा काम; अब आर-पार की लड़ाई के मूड में ग्रामीण
"तालाब हमारा, परेशानी हमारी और वादे सिर्फ कागजों में?" — ग्रामीणों का फूटा गुस्सा, 25 जून को चक्का जाम की चेतावनी
बलौदाबाजार।
ग्राम रसेड़ा का प्रमुख जल स्रोत और हजारों लोगों की निस्तारी व्यवस्था का आधार माने जाने वाला नकटा तालाब इन दिनों एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। वर्षों से तालाब की सफाई, गहरीकरण और विकास कार्यों की मांग कर रहे ग्रामीण अब खुलकर कंपनी प्रबंधन के खिलाफ मोर्चा खोलने की तैयारी में हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि एक ओर कंपनी क्षेत्र से करोड़ों रुपये का कारोबार कर रही है, वहीं दूसरी ओर गांव के सबसे महत्वपूर्ण जल स्रोत की सुध लेने में लगातार लापरवाही बरती जा रही है।
ग्राम पंचायत रसेड़ा एवं ग्रामीणों द्वारा कंपनी प्रबंधन को सौंपे गए ज्ञापन में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि 10 दिनों के भीतर नकटा तालाब की पूर्ण सफाई और लंबित सीएसआर कार्य शुरू नहीं किए गए तो 25 जून 2026 को कंपनी के बैरियर गेट से खैदा-लटुवा मार्ग के मध्य नकटा तालाब के सामने चक्का जाम और धरना प्रदर्शन किया जाएगा।
सबसे बड़ा सवाल—जब तालाब सुखा दिया था तो सफाई पूरी क्यों नहीं हुई?
ग्रामीणों के अनुसार कंपनी प्रबंधन ने तालाब की सफाई और गहरीकरण कराने का आश्वासन दिया था। इसी के तहत तालाब का पानी पंप लगाकर पूरी तरह निकाल दिया गया। लोगों को उम्मीद थी कि वर्षों से जमा कीचड़ हटाई जाएगी, गहरीकरण होगा और तालाब की जलधारण क्षमता बढ़ेगी। लेकिन कुछ समय तक सीमित काम करने के बाद मशीनें और जिम्मेदार लोग वापस लौट गए।
अब गांव में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब तालाब को पूरी तरह सुखाने का निर्णय लिया गया था तो सफाई और गहरीकरण का कार्य बीच में क्यों छोड़ दिया गया? क्या यह केवल औपचारिकता निभाने के लिए किया गया था? यदि नहीं, तो अधूरा काम छोड़ने के पीछे वास्तविक कारण क्या हैं?
ग्रामीणों का कहना है कि तालाब को सुखाने के बाद भी बड़ी मात्रा में कीचड़ जस की तस पड़ी हुई है। इससे न केवल जल संग्रहण क्षमता प्रभावित हो रही है बल्कि आने वाले समय में जल संकट और गहरा सकता है।
100 प्रतिशत रसेड़ा और 50 प्रतिशत रसेड़ी की निर्भरता, फिर भी उपेक्षा क्यों?
ग्रामीणों के मुताबिक नकटा तालाब ग्राम रसेड़ा की लगभग पूरी आबादी तथा समीपस्थ ग्राम रसेड़ी की लगभग आधी आबादी की निस्तारी जरूरतों का प्रमुख आधार है। ऐसे महत्वपूर्ण जल स्रोत की लगातार अनदेखी होना ग्रामीणों को समझ से परे लग रहा है।
लोग सवाल उठा रहे हैं कि यदि यह तालाब इतना महत्वपूर्ण नहीं है तो फिर दो गांवों की हजारों आबादी इससे क्यों जुड़ी हुई है? और यदि महत्वपूर्ण है तो इसकी सफाई और संरक्षण को प्राथमिकता क्यों नहीं दी जा रही?
प्रदूषण और भारी वाहनों पर भी उठे सवाल
ग्रामीणों का आरोप है कि प्लांट के भारी वाहनों के लगातार आवागमन और औद्योगिक गतिविधियों के कारण तालाब प्रभावित हुआ है। वर्षों से जमा गाद और प्रदूषण के चलते तालाब की स्थिति लगातार खराब होती गई।
ग्रामीणों का कहना है कि जब क्षेत्र में उद्योग संचालित हो रहा है और स्थानीय संसाधनों पर उसका प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष प्रभाव पड़ रहा है, तो कंपनी की यह जिम्मेदारी बनती है कि वह जल स्रोतों के संरक्षण और सुधार में भी गंभीरता दिखाए।
सीएसआर के वादे भी सवालों के घेरे में
नकटा तालाब का मुद्दा केवल सफाई तक सीमित नहीं है।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि वर्ष 2021 में कंपनी प्रबंधन ने सीएसआर मद से तालाब गहरीकरण, फेंसिंग, आंतरिक सड़क कंक्रीटीकरण, स्ट्रीट लाइट और अन्य विकास कार्य कराने का आश्वासन दिया था।
पांच साल बीतने के बाद भी अधिकांश कार्य अधूरे या प्रारंभ नहीं हो पाए हैं। ऐसे में ग्रामीण पूछ रहे हैं कि क्या सीएसआर केवल बैठकों और कागजी घोषणाओं तक सीमित है? यदि वादे किए गए थे तो उन्हें पूरा करने की समय-सीमा क्या थी और अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
जल गुणवत्ता पर भी चिंता
ग्रामीणों का कहना है कि तालाब में वर्षों से जमा कीचड़ और प्रदूषण के कारण जल की गुणवत्ता प्रभावित हुई है। उनका दावा है कि जल परीक्षण के दौरान भी गुणवत्ता को लेकर सवाल सामने आए थे। इसके बावजूद स्थायी समाधान की दिशा में अपेक्षित कदम नहीं उठाए गए।
अब आंदोलन के मूड में गांव
लगातार मांगों की अनदेखी, अधूरी सफाई, लंबित सीएसआर कार्य और जवाबदेही के अभाव ने ग्रामीणों के धैर्य की परीक्षा ले ली है। गांव के लोगों का कहना है कि वे वर्षों से ज्ञापन, आवेदन और अनुरोध के माध्यम से समस्या उठा रहे हैं, लेकिन परिणाम जमीन पर दिखाई नहीं दे रहे।
ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि धरातल पर काम चाहिए। यदि निर्धारित समय के भीतर कार्रवाई नहीं हुई तो 25 जून का आंदोलन कंपनी प्रबंधन के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।
ग्रामीणों के प्रमुख सवाल
पांच वर्षों से लंबित तालाब सफाई का कार्य आखिर पूरा क्यों नहीं हुआ?
तालाब को पूरी तरह सुखाने के बाद भी गहरीकरण और कीचड़ हटाने का काम अधूरा क्यों छोड़ दिया गया?
वर्ष 2021 में किए गए सीएसआर वादों का क्या हुआ?
दो गांवों की बड़ी आबादी के प्रमुख जल स्रोत की उपेक्षा क्यों की जा रही है?
ग्रामीणों की लगातार मांगों के बावजूद अब तक ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
फिलहाल नकटा तालाब केवल एक जल स्रोत का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह ग्रामीणों के विश्वास, कंपनी की सामाजिक जवाबदेही और विकास के दावों की वास्तविकता का बड़ा सवाल बन चुका है।
अब सबकी नजर कंपनी प्रबंधन पर है कि वह ग्रामीणों के सवालों का जवाब काम से देता है या फिर एक बार फिर आश्वासनों का सहारा लिया जाएगा।













