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धनगांव में महुआ शराब माफिया का ‘काला साम्राज्य’! 10 साल से 30 गांवों तक फैलाया जाल, युवाओं की जिंदगी बर्बाद, संरक्षण के दम पर बेखौफ कारोबार

क्राइम 11 May 2026 (96)

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प्रभात न्यूज़ 24: 

धनगांव में महुआ शराब माफिया का ‘काला साम्राज्य’!

10 साल से 30 गांवों तक फैलाया जाल, युवाओं की जिंदगी बर्बाद, संरक्षण के दम पर बेखौफ कारोबार




बलौदाबाजार/धनगांव।

ग्राम पंचायत धनगांव और आसपास का क्षेत्र इन दिनों अवैध महुआ शराब कारोबार के बड़े नेटवर्क को लेकर सुर्खियों में है। क्षेत्र के ग्रामीणों का आरोप है कि गांव का एक कथित शराब माफिया पिछले 8 से 10 वर्षों से पूरे इलाके में संगठित तरीके से महुआ शराब का अवैध कारोबार चला रहा है। यह नेटवर्क इतना बड़ा हो चुका है कि आसपास के लगभग 30 गांवों तक रोजाना शराब की खेप पहुंचाई जाती है। सुबह से शुरू होने वाला यह कारोबार देर रात तक चलता है और गांव-गांव में खुलेआम शराब की सप्लाई की जाती है।



15 से 20 युवकों की ‘टीम’, गांव-गांव फैला नेटवर्क

ग्रामीणों के अनुसार शराब माफिया ने इस अवैध कारोबार के लिए 15 से 20 युवकों की पूरी टीम तैयार कर रखी है। कोई शराब बनाने का काम करता है, कोई सप्लाई पहुंचाता है तो कोई गांवों में बिक्री का जिम्मा संभालता है। कई जगहों पर महिलाओं और गरीब परिवारों को भी इस धंधे में आगे कर दिया गया है ताकि कार्रवाई होने पर असली सरगना बच सके।

बताया जाता है कि मुख्य कारोबारी खुद सामने नहीं आता बल्कि अपने लोगों को आगे कर पूरा नेटवर्क संचालित करता है। कई मामलों में कार्रवाई भी हुई, लेकिन हर बार छोटे लोगों पर केस दर्ज हो गया और असली मास्टरमाइंड बच निकलता रहा।



लाखों की संपत्ति, आलीशान जीवनशैली ने खड़े किए सवाल

ग्रामीणों का दावा है कि पिछले कुछ वर्षों में इस अवैध कारोबार से कथित माफिया ने लाखों की संपत्ति खड़ी कर ली है। जमीन, वाहन और आलीशान मकानों को लेकर गांव में चर्चाएं आम हैं। लोगों का कहना है कि सामान्य आय से इतनी संपत्ति बनना संभव नहीं है, फिर भी किसी एजेंसी ने अब तक उसकी आर्थिक जांच नहीं की।



राजनीतिक संरक्षण और विभागीय सांठगांठ की चर्चा

क्षेत्र में यह चर्चा भी जोरों पर है कि शराब कारोबारी की राजनीतिक पकड़ काफी मजबूत है। कई प्रभावशाली लोगों और स्थानीय तंत्र से उसकी नजदीकी बताई जाती है। ग्रामीणों का आरोप है कि यही वजह है कि बार-बार शिकायतों के बावजूद उसके खिलाफ कोई बड़ी और निर्णायक कार्रवाई नहीं हो पा रही।

लोगों का कहना है कि जब भी विभागीय दबाव बढ़ता है, कुछ दिनों के लिए कारोबार धीमा कर दिया जाता है और फिर पहले की तरह सप्लाई शुरू हो जाती है। कई बार कार्रवाई की सूचना पहले ही लीक हो जाने की भी चर्चाएं सामने आती रही हैं।



युवाओं का भविष्य अंधेरे में

ग्रामीणों के अनुसार सबसे ज्यादा नुकसान क्षेत्र के युवाओं को हुआ है। कई युवा शराब की लत में पड़कर अपना भविष्य खराब कर चुके हैं। 

कुछ परिवार आर्थिक और सामाजिक रूप से टूट चुके हैं। गांवों में आए दिन घरेलू विवाद, मारपीट और सामाजिक तनाव की घटनाओं में भी वृद्धि देखने को मिल रही है।

महिलाओं का कहना है कि शराब के कारण कई घर बर्बाद हो रहे हैं, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर ठोस कार्रवाई नहीं होने से लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।



रात के अंधेरे में निकलती है शराब की खेप

ग्रामीण बताते हैं कि सुबह और शाम दो समय शराब की बड़ी खेप अलग-अलग रास्तों से गांवों तक पहुंचाई जाती है। बाइक, साइकिल और निजी वाहनों के माध्यम से सप्लाई की जाती है ताकि पुलिस की नजर से बचा जा सके। कई जगह खेतों और जंगल के रास्तों का उपयोग किए जाने की भी चर्चा है।



कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति?

स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई वर्षों में आबकारी और पुलिस विभाग द्वारा कुछ कार्रवाई जरूर की गई, लेकिन वह केवल औपचारिकता बनकर रह गई। छोटे विक्रेताओं पर केस दर्ज हुए, जबकि मुख्य सरगना आज भी बेखौफ होकर अपना नेटवर्क चला रहा है।



ग्रामीणों ने मांग की है कि पूरे नेटवर्क की उच्चस्तरीय जांच हो, अवैध संपत्ति की पड़ताल की जाए और संरक्षण देने वाले लोगों की भी पहचान कर कार्रवाई की जाए। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले समय में यह नेटवर्क और अधिक खतरनाक रूप ले सकता है।


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