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खैदा में अवैध शराब का जाल: एक महीना बीता, माफिया बेखौफ—प्रशासन अब भी मौन

क्राइम 24 April 2026 (142)

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प्रभात न्यूज़ 24: 

खैदा में अवैध शराब का जाल: एक महीना बीता, माफिया बेखौफ—प्रशासन अब भी मौन



बलौदाबाजार।

जिला मुख्यालय से सटे ग्राम खैदा (ड) में अवैध शराब का कारोबार अब एक संगठित सिंडिकेट के रूप में खुलकर सामने आ चुका है। हैरानी की बात यह है कि लगातार शिकायतों, मीडिया खुलासों और ग्रामीणों के विरोध के बावजूद एक महीने से अधिक समय बीत जाने पर भी प्रशासन की ओर से कोई ठोस और निर्णायक कार्रवाई देखने को नहीं मिली है। इससे साफ संकेत मिल रहा है कि अवैध कारोबारियों के हौसले किस कदर बुलंद हैं।

सप्लाई नेटवर्क हुआ मजबूत, गांव-गांव पहुंच रहा जहर

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, खैदा में एक व्यक्ति सब्जी व्यापार की आड़ में लंबे समय से अवैध शराब बेच रहा है। अब यह कारोबार एक संगठित नेटवर्क में तब्दील हो चुका है—

छोटे विक्रेताओं तक नियमित सप्लाई

गांवों में घूम-घूमकर बिक्री करने वाले एजेंट

घर-घर डिलीवरी तक का सिस्टम

ग्राम डमरू तक इस नेटवर्क के सक्रिय होने की बात सामने आ रही है, जहां एक एजेंट नीले रंग की स्कूटी से गांव-गांव शराब पहुंचा रहा है। सड़क किनारे झोपड़ीनुमा ठिकानों से खुलेआम बिक्री जारी है।



कार्रवाई के नाम पर सिर्फ दिखावा?

ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन की कार्रवाई महज औपचारिकता बनकर रह गई है—

न बड़ी जब्ती

न कोई प्रभावी गिरफ्तारी

केवल चेतावनी देकर छोड़ देना

कुछ दिनों की शांति के बाद फिर वही अवैध कारोबार शुरू हो जाता है। यह सिलसिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।



युवाओं को बनाया जा रहा मोहरा

इस पूरे सिंडिकेट का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि बेरोजगार युवाओं को इस अवैध धंधे में झोंका जा रहा है—

आसान कमाई का लालच

एजेंट बनाकर नेटवर्क फैलाना

धीरे-धीरे पूरे क्षेत्र को जकड़ना

यह सिर्फ कानून का उल्लंघन नहीं, बल्कि समाज और आने वाली पीढ़ी के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।



महिलाओं का विरोध भी बेअसर

गांव की महिलाओं ने कई बार समूह बनाकर विरोध किया, लेकिन ठोस कार्रवाई के अभाव में उनकी आवाज दबकर रह गई। जनप्रतिनिधियों ने भी मुद्दा उठाया, पर जमीन पर असर नदारद है।



प्रशासन पर उठते सवाल

लगातार मिल रही शिकायतों और खुलासों के बावजूद कार्रवाई न होना कई सवाल खड़े करता है—

क्या इस नेटवर्क को कहीं से संरक्षण मिल रहा है?

आखिर क्यों नहीं हो रही बड़ी कार्रवाई?

क्या जिम्मेदार विभाग सिर्फ कागजी खानापूर्ति कर रहा है?

जिला आबकारी विभाग के अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिल सका।



जनता में आक्रोश, जागरूकता की जरूरत

 अब लोगों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। यदि समय रहते इस पर सख्ती नहीं हुई, तो यह नेटवर्क और मजबूत होकर समाज को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है।



???? जनता से अपील:

अवैध शराब की सूचना तुरंत प्रशासन को दें

युवाओं को इस जाल से बचाने के लिए परिवार और समाज मिलकर पहल करें

सामूहिक रूप से विरोध दर्ज कराएं ताकि दबाव बने



निष्कर्ष: अब नहीं तो कभी नहीं

खैदा और आसपास के क्षेत्रों में अवैध शराब का यह सिंडिकेट अब सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि सामाजिक संकट बन चुका है। अब जरूरत है ठोस, निष्पक्ष और कड़ी कार्रवाई की—वरना यह जहर आने वाली पीढ़ियों को निगलता रहेगा।



(नोट: रिपोर्ट में शामिल जानकारी विश्वसनीय स्थानीय स्रोतों एवं ग्रामीणों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। किसी भी व्यक्ति विशेष पर आरोप की पुष्टि संबंधित एजेंसियों की जांच के बाद ही मानी जाएगी।)

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