प्रभात न्यूज़ 24:
जेसीबी से तालाबों का गहरीकरण या अवैध खनन? लवन में मिट्टी कारोबार पर उठे सवाल, जिम्मेदारों की भूमिका संदेह के घेरे में
लवन, बलौदाबाजार।
जिला मुख्यालय बलौदाबाजार के अंतर्गत आने वाले नगर पंचायत लवन में इन दिनों शासकीय तालाबों के गहरीकरण के नाम पर बड़े पैमाने पर अनियमितताओं और अवैध गतिविधियों का मामला सामने आ रहा है। नगर के प्रमुख जोरवा तालाब में जेसीबी मशीनों के माध्यम से लगातार खुदाई की जा रही है, जिससे न केवल पर्यावरणीय संतुलन प्रभावित हो रहा है बल्कि शासन को राजस्व हानि होने की भी आशंका जताई जा रही है।
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि तालाब गहरीकरण के नाम पर निकाली जा रही मिट्टी को जरूरतमंदों को ऊंचे दामों पर बेचा जा रहा है। इस पूरे कार्य में जेसीबी और हाइवा वाहन मालिकों को लाभ पहुंचाने का सुनियोजित खेल चल रहा है। खास बात यह है कि इस कार्य के लिए किसी भी प्रकार की वैधानिक स्वीकृति या प्रशासनिक आदेश उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आ रही है।
बिना अनुमति चल रहा कार्य
सूत्रों के अनुसार, संबंधित तालाब के गहरीकरण के लिए न तो खनिज विभाग से अनुमति ली गई है और न ही नगर पंचायत के पास कोई वैध आदेश मौजूद है। इसके बावजूद पिछले कई महीनों से लगातार मिट्टी की खुदाई और परिवहन जारी है। यह सीधे तौर पर खनिज नियमों और राजस्व कानूनों का उल्लंघन माना जा रहा है।
जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों पर आरोप
इस पूरे मामले में नगर पंचायत के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, पार्षदों तथा मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि उनकी मौन सहमति या संरक्षण के बिना इतनी बड़ी गतिविधि संभव नहीं है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कार्य कुछ प्रभावशाली लोगों के माध्यम से संचालित हो रहा है, जिनके पास जेसीबी और हाइवा वाहन हैं। इनके द्वारा तालाब की मिट्टी को व्यवस्थित रूप से निकालकर बाजार में बेचा जा रहा है, जिससे निजी लाभ अर्जित किया जा रहा है।
शिकायत करने से डर रहे लोग
नगर के जागरूक नागरिकों में इस मुद्दे को लेकर नाराजगी तो है, लेकिन खुलकर विरोध करने से लोग कतरा रहे हैं। कई लोगों का कहना है कि इस कारोबार से जुड़े लोगों का प्रभाव इतना अधिक है कि शिकायत करने पर उन्हें नुकसान पहुंचाया जा सकता है।
यह भय केवल आम नागरिकों तक सीमित नहीं है, बल्कि स्थानीय पत्रकार भी इस मामले में खुलकर सामने आने से हिचकिचा रहे हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि मामला कितना संवेदनशील और प्रभावशाली लोगों से जुड़ा हुआ है।
खनिज विभाग की निष्क्रियता पर सवाल
इस पूरे मामले में खनिज विभाग की कार्यप्रणाली भी संदेह के घेरे में है। आरोप है कि विभाग को बार-बार सूचना देने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
स्थानीय स्तर पर पदस्थ खनिज निरीक्षक की कार्यशैली को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। नागरिकों का कहना है कि जब भी अवैध खनन की सूचना देने के लिए संपर्क किया जाता है, तो फोन तक नहीं उठाया जाता। इससे विभाग और अवैध कारोबारियों के बीच संभावित सांठगांठ की आशंका जताई जा रही है।
शासन को राजस्व हानि
तालाब से अवैध रूप से निकाली जा रही मिट्टी का न तो कोई रिकॉर्ड है और न ही उसका राजस्व शासन को प्राप्त हो रहा है। इससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान होने की संभावना है।
पर्यावरण पर भी खतरा
विशेषज्ञों का मानना है कि बिना वैज्ञानिक योजना और अनुमति के तालाबों का गहरीकरण करना जल संरचना और पर्यावरण के लिए घातक साबित हो सकता है। इससे भूजल स्तर, जैव विविधता और आसपास के पारिस्थितिकी तंत्र पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
प्रशासन से कार्रवाई की मांग
नगरवासियों का कहना है जिला प्रशासन से इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करें। साथ ही अवैध खनन और परिवहन पर तत्काल रोक लगाने की भी अपील कर रहे है।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और क्या वास्तव में दोषियों पर कार्रवाई होती है या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह ठंडे बस्ते में चला जाता है।












