प्रभात न्यूज़ 24:
ओवररेट शराब, मारपीट और धमकियों का खेल — आखिर कब थमेगा ‘राम भरोसे’ चलता यह कारोबार?
बलौदाबाजार।
क्षेत्र में अवैध शराब कारोबार, ओवररेटिंग और उससे जुड़े अपराधों की परतें एक बार फिर खुलती नजर आ रही हैं। ताजा मामला ग्राम खपराडीह निवासी एक मजदूर से जुड़ा है, जिसने शराब दुकान में तय दर से अधिक पैसे वसूलने का आरोप लगाया है। शिकायत के मुताबिक, 10 अप्रैल की रात करीब 9 बजे हिरमी स्थित शराब भट्ठी से अंग्रेजी शराब खरीदने पहुंचे व्यक्ति से प्रति पौवा 130 रुपये वसूले गए, जबकि निर्धारित कीमत 120 रुपये बताई जा रही है।
पीड़ित का आरोप है कि विरोध करने पर दुकान कर्मचारी ने अभद्र व्यवहार करते हुए “लेना है तो लो, नहीं तो जाओ” कहकर टाल दिया। इसके बाद वह सुहेला पहुंचा, जहां रात लगभग 11 बजे मनीष पान ठेला के पास शराब दुकान से जुड़े कर्मचारी गोपाल यदु और उसके साथी ने उसे रोककर गाली-गलौच की और मारपीट कर दी। आरोप है कि हमलावरों ने जान से मारने की धमकी देते हुए कड़े से वार किया, जिससे उसके बाएं भौंह से खून बहने लगा और कंधे व सीने में अंदरूनी चोट आई।
घटना के प्रत्यक्षदर्शी के रूप में करण भारती और हरीश मिरी के नाम सामने आए हैं। पीड़ित ने इलाज के बाद थाने में रिपोर्ट दर्ज कर कार्रवाई की मांग की है।
ओवररेटिंग से लेकर अवैध सप्लाई तक—बड़े नेटवर्क की आशंका
यह मामला केवल एक घटना तक सीमित नहीं है। क्षेत्र में लगातार यह शिकायतें सामने आ रही हैं कि कई शराब दुकानों में तय दर से अधिक कीमत वसूली जा रही है। वहीं, हाल ही में एक वीडियो भी वायरल हुआ था जिसमें बोरी में भरकर शराब ले जाते हुए कथित “कोचियों” को देखा गया।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब क्षेत्र में अवैध शराब निर्माण के ठोस अड्डों की पुष्टि नहीं होती, तो इतनी बड़ी मात्रा में शराब आखिर इन अवैध विक्रेताओं तक पहुंच कैसे रही है? क्या यह सप्लाई चैन किसी बड़े संरक्षण में चल रही है?
‘प्राइवेट संरक्षण’ और मिलीभगत का संदेह
स्थानीय सूत्रों और प्रभावित लोगों से बातचीत में यह बात सामने आ रही है कि क्षेत्र में एक संगठित नेटवर्क सक्रिय है, जो कथित तौर पर अवैध शराब कारोबार को प्राइवेट संरक्षण प्रदान करता है।
बताया जा रहा है कि यह नेटवर्क न केवल अवैध बिक्री को बढ़ावा देता है, बल्कि जरूरत पड़ने पर दबाव बनाकर या दिखावटी कार्रवाई करवा कर अपने हितों को सुरक्षित रखने का प्रयास भी करता है।
ग्रामीणों का कहना है कि कुछ मामलों में कार्रवाई का स्वरूप संदिग्ध होता है, जिससे यह आशंका और गहरी होती है कि कहीं न कहीं आपसी मिलीभगत के कारण यह कारोबार निर्बाध रूप से जारी है।
हाल ही में ग्राम रसेड़ा से सामने आए एक वीडियो में खुलेआम दुकाननुमा सेटअप में शराब बिक्री का दावा किया गया, जिसने इस पूरे तंत्र पर और सवाल खड़े कर दिए हैं।
शराबबंदी की कोशिश पर हमला—डर का माहौल
करीब 6-7 महीने पहले ग्राम गैतरा में सरपंच द्वारा शराबबंदी की पहल की गई थी, लेकिन इसके विरोध में एक कथित शराब विक्रेता ने सरपंच पर ही जानलेवा हमला कर दिया। इससे साफ है कि इस अवैध कारोबार के खिलाफ आवाज उठाना कितना जोखिम भरा हो चुका है।
पत्रकारों तक को धमकी—सच दिखाना बना खतरा
स्थिति यहां तक पहुंच गई है कि अगर कोई पत्रकार इस नेटवर्क को उजागर करने की कोशिश करता है, तो उसे धमकियां मिलने लगती हैं। कई मामलों में फोन कॉल नहीं उठाए जाते या नंबर ब्लॉक कर दिए जाते हैं। यह लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के लिए भी गंभीर चुनौती बनता जा रहा है।
समाज पर गहरा असर—युवाओं और परिवारों का भविष्य संकट में
गांव-गांव और मोहल्लों में आसानी से उपलब्ध शराब का सीधा असर युवाओं और बच्चों पर पड़ रहा है। महिलाएं अपने परिवार को बेहतर भविष्य देना चाहती हैं, लेकिन सस्ती और सुलभ शराब की वजह से पुरुष नशे की लत में फंसते जा रहे हैं। घरेलू हिंसा, झगड़े और आपराधिक घटनाओं में भी वृद्धि देखी जा रही है।
प्रशासन के दावे बनाम जमीनी हकीकत
हालांकि प्रशासन द्वारा समय-समय पर कार्रवाई के दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्थिति इसके विपरीत नजर आती है। अवैध कारोबार लगातार फैलता जा रहा है और आम जनता में यह धारणा बनती जा रही है कि अब सब कुछ “राम भरोसे” ही चल रहा है।












