प्रभात न्यूज़ 24:
सर्व आदिवासी समाज बलौदाबाजार के प्रतिनिधिमंडल ने कैबिनेट मंत्री से की सौजन्य भेंट, सामाजिक मुद्दों पर हुई सार्थक चर्चा
बलौदाबाजार।
सर्व आदिवासी समाज जिला इकाई बलौदाबाजार एवं ग्राम पंचायत टेमरी के प्रतिनिधिमंडल ने नवा रायपुर पहुंचकर छत्तीसगढ़ शासन के कृषि एवं आदिम जाति कल्याण मंत्री रामविचार नेताम से सौजन्य भेंट कर विभिन्न सामाजिक, विकासात्मक एवं जनहित से जुड़े मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की।
इस महत्वपूर्ण मुलाकात के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने आदिवासी समाज के सामाजिक उत्थान, शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार, रोजगार के अवसरों की उपलब्धता तथा ग्रामीण क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण जैसे विषयों को प्रमुखता से उठाया। मंत्री नेताम ने सभी बिंदुओं को गंभीरता से सुना और आश्वस्त किया कि राज्य सरकार आदिवासी समाज के सर्वांगीण विकास के लिए प्रतिबद्ध है तथा प्राप्त सुझावों पर सकारात्मक पहल की जाएगी।
प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने बताया कि समाज के विभिन्न वर्गों को अभी भी कई बुनियादी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, जिनके निराकरण हेतु शासन-प्रशासन का सहयोग अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने विशेष रूप से शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण सुविधाएं, युवाओं के लिए रोजगारोन्मुखी योजनाएं तथा ग्रामीण अधोसंरचना के विकास पर ध्यान देने की मांग रखी।
मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार आदिवासी समाज के हितों की रक्षा एवं उनके विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि समाज के प्रतिनिधियों से सीधे संवाद कर जमीनी समस्याओं को समझना और उनका समाधान निकालना सरकार की प्राथमिकता है।
इस अवसर पर सर्व आदिवासी समाज छत्तीसगढ़ के युवा प्रभाग के प्रदेश अध्यक्ष सुभाष परते, प्रदेश उपाध्यक्ष कमलेश ध्रुव, जिला उपाध्यक्ष भानु ध्रुव, समाजसेवी दया राम ध्रुव एवं कृष्णा ध्रुव, ग्राम पंचायत टेमरी के सरपंच तानसेन चतुर्वेदी, उपसरपंच नेहरू ध्रुव, राजेश नवरंगे, सचिव तोष राम साहू, नीलकमल साहू तथा शैलेंद्र घृतलहरे सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
प्रतिनिधिमंडल ने मंत्री नेताम का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार की मुलाकातें समाज और शासन के बीच संवाद को मजबूत बनाती हैं तथा समस्याओं के त्वरित समाधान में सहायक होती हैं।
निष्कर्ष:
यह सौजन्य भेंट न केवल औपचारिक मुलाकात रही, बल्कि समाज के हितों से जुड़े मुद्दों को सीधे शासन तक पहुंचाने का एक प्रभावी माध्यम भी साबित हुई। उम्मीद की जा रही है कि इस संवाद के सकारात्मक परिणाम निकट भविष्य में देखने को मिलेंगे और आदिवासी समाज के विकास को नई गति मिलेगी।













