प्रभात न्यूज़ 24:
बलौदाबाजार में चर्चित हत्या प्रकरण का फैसला: मुख्य आरोपी को 10 वर्ष कठोर कारावास, सहयोगी को 3 वर्ष की सजा
बलौदाबाजार।
जिले के बहुचर्चित हत्या प्रकरण में न्यायालय ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए मुख्य आरोपी को 10 वर्ष के कठोर कारावास से दंडित किया है, जबकि मामले में सहयोगी आरोपी को 3 वर्ष की सजा सुनाई गई है। यह फैसला तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश बलौदाबाजार की अदालत द्वारा सुनाया गया, जिसे कानून व्यवस्था और न्यायिक प्रक्रिया के दृष्टिकोण से एक अहम निर्णय माना जा रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह घटना 03 मार्च 2025 की रात्रि लगभग 1:00 बजे की है। मामला बलौदाबाजार शहर से लगे ग्राम मिशन परसा भदेर का है, जहां आरोपी साहिल गेंड्रे ने पुरानी रंजिश या अन्य कारणों के चलते ज्ञानेश मिश्रा पर जानलेवा हमला कर दिया। आरोप है कि आरोपी ने चाकू से लगातार तीन वार कर उसे गंभीर रूप से घायल कर दिया, जिससे अत्यधिक रक्तस्राव हुआ।
घटना के बाद गंभीर हालत में घायल ज्ञानेश मिश्रा को उपचार हेतु अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मृत्यु हो गई। इस घटना ने पूरे क्षेत्र में सनसनी फैला दी थी और स्थानीय लोगों में आक्रोश का माहौल बन गया था।
बताया जाता है कि वारदात के बाद आरोपी साहिल गेंड्रे मौके से फरार हो गया। जाने से पहले उसने अपने साथी आरोपी अमोल मॉरिस पीटर को फोन कर घटनास्थल पर बुलाया और उसे वहीं रुकने के लिए कहा। आरोप है कि अमोल मॉरिस पीटर ने पुलिस और मृतक के परिजनों को भ्रामक जानकारी देकर जांच को प्रभावित करने का प्रयास किया।
इस संबंध में मृतक के भाई हर्षित मिश्रा द्वारा थाना सिटी कोतवाली बलौदाबाजार में रिपोर्ट दर्ज कराई गई। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए दोनों आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 103(1) और 3(5) के तहत मामला दर्ज किया और जांच प्रारंभ की। बाद में आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में चालान प्रस्तुत किया गया।
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 14 गवाहों के बयान दर्ज कराए गए। सरकारी वकील लोक अभियोजक थानेश्वर वर्मा ने अदालत में ठोस साक्ष्य और गवाहों के आधार पर आरोपियों को दोषी सिद्ध करने की जोरदार पैरवी की। उन्होंने न्यायालय के समक्ष यह स्थापित किया कि घटना योजनाबद्ध तरीके से की गई थी और आरोपीगण ने अपराध के बाद साक्ष्यों को प्रभावित करने का भी प्रयास किया।
वहीं, बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं ने आरोपियों को निर्दोष साबित करने का प्रयास किया, लेकिन अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहों के बयान और परिस्थितिजन्य तथ्यों को ध्यान में रखते हुए अभियोजन पक्ष की दलीलों को अधिक मजबूत पाया।
तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश श्री विवेक गर्ग ने अपने फैसले में कहा कि प्रस्तुत साक्ष्य आरोपियों के खिलाफ अपराध को स्पष्ट रूप से सिद्ध करते हैं। न्यायालय ने मुख्य आरोपी साहिल गेंड्रे को भारतीय न्याय संहिता की धारा 105 के तहत 10 वर्ष के कठोर कारावास एवं 1000 रुपए के अर्थदंड से दंडित किया। वहीं सह आरोपी अमोल मॉरिस पीटर को धारा 238 के तहत 3 वर्ष के कठोर कारावास एवं 1000 रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई गई।
इस निर्णय को कानून के प्रति विश्वास को मजबूत करने वाला माना जा रहा है। स्थानीय लोगों ने भी इस फैसले को न्याय की जीत बताते हुए संतोष व्यक्त किया है।
न्यायिक प्रक्रिया का संदेश
यह मामला इस बात का स्पष्ट उदाहरण है कि गंभीर अपराधों में न्यायालय साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर निष्पक्ष निर्णय देता है। साथ ही यह भी संदेश देता है कि अपराध करने के बाद सच्चाई छिपाने या जांच को गुमराह करने का प्रयास भी दंडनीय है।
निष्कर्ष
बलौदाबाजार का यह फैसला न केवल एक चर्चित मामले का अंत है, बल्कि समाज में कानून के प्रति भरोसा बढ़ाने वाला भी है। न्यायालय द्वारा सुनाई गई सजा यह दर्शाती है कि अपराध चाहे कितना भी गंभीर क्यों न हो, न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से दोषियों को सजा अवश्य मिलती है।












