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रक्षा बंधन पर बच्चों ने दिखाई देशभक्ति की मिसाल: शाश्वत स्कूल के नन्हे हाथों से सैनिकों के नाम राखी

देश भक्ति 28 July 2025 (640)

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प्रभात न्यूज़ 24: 

रक्षा बंधन पर बच्चों ने दिखाई देशभक्ति की मिसाल: शाश्वत स्कूल के नन्हे हाथों से सैनिकों के नाम राखी


संवाददाता- विजय शंकर तिवारी 


बलौदाबाजार, 

रक्षा बंधन का पावन पर्व इस बार शाश्वत स्कूल के नन्हें विद्यार्थियों के लिए कुछ खास रहा। जब आम बच्चे अपने भाइयों के लिए राखियां तैयार कर रहे थे, तब शाश्वत स्कूल के छात्रों ने उन गुमनाम वीरों को याद किया जो सीमाओं पर डटे रहकर देश की रक्षा कर रहे हैं। देश की रक्षा में समर्पित इन वीर सैनिकों के प्रति सम्मान और स्नेह प्रकट करते हुए बच्चों ने अपने नन्हें हाथों से सैकड़ों राखियां बनाई और उन्हें जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) एवं ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (BEO) को सौंपा, ताकि ये राखियां देश की सीमाओं पर तैनात जवानों तक पहुंचाई जा सकें।


इस अवसर पर विद्यालय प्रांगण में एक सादगीपूर्ण परंतु भावनात्मक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता DEO महोदय ने की, जबकि विशेष अतिथि के रूप में BEO महोदय भी उपस्थित रहे। स्कूल के शिक्षकों, अभिभावकों और बच्चों की उपस्थिति ने माहौल को देशभक्ति के रंगों से सराबोर कर दिया।


राखियों में छलका देशप्रेम


बच्चों द्वारा बनाई गई राखियों में पारंपरिकता और नवाचार का सुंदर संगम देखने को मिला। कुछ राखियां तिरंगे के रंगों से सजी थीं, तो कुछ पर “जय जवान”, “भारत माता की जय”, “वंदे मातरम्” जैसे देशभक्ति से ओतप्रोत संदेश लिखे गए थे। हर राखी में बच्चों की भावनाएं, उनका स्नेह और उन वीर सैनिकों के प्रति सम्मान झलक रहा था।


“हमारे सैनिक हमारे रक्षक हैं” — बच्चों की आवाज़


राखी बनाते समय बच्चों ने सैनिकों के लिए संदेश भी लिखे, जिनमें उन्होंने कहा — “आप हमारे असली हीरो हैं, जो अपनी खुशियों को छोड़कर हमारी रक्षा करते हैं। यह राखी हमारे दिल से निकले प्यार और सम्मान का प्रतीक है।” कक्षा 5वीं की छात्रा ने कहा कि उसे गर्व है कि वह उन भाईयों के लिए राखी बना रही है जो सरहद पर उसकी रक्षा कर रहे हैं।


अधिकारियों ने की सराहना


DEO श्रीमान ने बच्चों के इस प्रयास की दिल खोलकर प्रशंसा की। उन्होंने कहा — “यह केवल एक राखी नहीं, बल्कि एक भावनात्मक पुल है जो हमारे आने वाली पीढ़ी को सैनिकों से जोड़ता है। यह पहल बच्चों के भीतर देशभक्ति की भावना को और मजबूत करेगी।”

BEO महोदय ने भी अपने उद्बोधन में कहा कि बच्चों की यह सृजनात्मकता और भावनात्मक जुड़ाव प्रेरणास्पद है। उन्होंने विद्यालय प्रबंधन और शिक्षकों को इस राष्ट्रवादी पहल के लिए बधाई दी।


विद्यालय की सराहनीय पहल


शाश्वत स्कूल समय-समय पर बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए ऐसे रचनात्मक एवं भावनात्मक कार्यक्रमों का आयोजन करता रहा है। स्कूल की प्राचार्या ने बताया कि यह पहल सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि बच्चों में संवेदना, देशप्रेम और उत्तरदायित्व के बीज बोने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि हर वर्ष स्कूल द्वारा सामाजिक सरोकार से जुड़े कार्यक्रम किए जाते हैं और यह भी उसी श्रृंखला की एक कड़ी है।


भावनाओं से भरी ‘रक्षासूत’


इन राखियों के साथ भेजे गए पत्रों में बच्चों ने भावनात्मक संदेश भी जोड़े —

“प्रिय सैनिक भैया, जब आप सीमा पर डटे रहते हैं, तब हम निश्चिंत होकर स्कूल जा पाते हैं। यह राखी हमारे स्नेह और गर्व का प्रतीक है। आप जहां भी रहें, सुरक्षित रहें।”


निष्कर्ष

आज जब सामाजिक मूल्यों और संवेदनाओं में कमी देखी जा रही है, शाश्वत स्कूल के बच्चों ने जो उदाहरण प्रस्तुत किया है, वह न सिर्फ सराहनीय है बल्कि अनुकरणीय भी। बच्चों द्वारा बनाई गई ये राखियां केवल धागे नहीं हैं, बल्कि उन मजबूत रिश्तों की डोर हैं जो देशवासियों को अपने सैनिकों से जोड़ती हैं। यह पहल देश के भविष्य यानी बच्चों में राष्ट्रप्रेम और कर्तव्यबोध की भावना को और भी सुदृढ़ करने का कार्य करेगी।

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