प्रभात न्यूज़ 24:
हथबंद की जामा मस्जिद में पहली बार फहराया तिरंगा, आज़ादी पर्व बना ऐतिहासिक
संवाददाता- विजय शंकर तिवारी
हथबंद ।
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर इस वर्ष हथबंद का ऐतिहासिक जामा मस्जिद परिसर एक अनोखी गवाही का हिस्सा बना। राज्य निर्माण के 25 वर्ष बाद, वक्फ बोर्ड के निर्देश पर प्रदेश की तमाम मस्जिदों और मदरसों में आज़ादी का पर्व पूरे उल्लास और सम्मान के साथ मनाया गया। इसी कड़ी में हथबंद स्थित जामा मस्जिद में पहली बार तिरंगा झंडा फहराया गया।
मस्जिद के मौलाना आफताब आलम ने ध्वजारोहण कर स्वतंत्रता दिवस समारोह की शुरुआत की। ध्वजारोहण के साथ ही वातावरण में राष्ट्रगान और सामूहिक स्वर में गूंजते "सारे जहाँ से अच्छा, हिंदुस्तान हमारा" गीत ने पूरे माहौल को देशभक्ति से भर दिया। समाज प्रमुख मुबारक हुसैन ने ध्वज वंदन कार्यक्रम का नेतृत्व करते हुए राष्ट्रगान और राजगीत का सामूहिक गान कराया।
इस अवसर पर सद्भावना मंच सिमगा-भाटापारा परिक्षेत्र की महिला अध्यक्ष फिरोज निकहात ने संबोधित करते हुए कहा – “अपने वतन से मुहब्बत करना भी अल्लाह की इबादत का हिस्सा है। इस्लाम के पैगम्बर हजरत मुहम्मद साहब ने भी इंसानियत, प्रेम और सद्भाव का संदेश दिया है। आजादी का पर्व हमें इन्हीं मूल्यों को याद दिलाता है।”
कार्यक्रम में शामिल जनवादी लेखक संघ के जिला अध्यक्ष चोवा राम वर्मा ‘बादल’ ने इस आयोजन को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि मुस्लिम समाज की यह पहल समाज में आपसी भाईचारा, प्रेम और राष्ट्रीय एकता की मिसाल है। उन्होंने कहा कि जब तिरंगा हर घर, हर गली और अब मस्जिदों-मदरसों में भी लहराता है, तो यह आजादी के सच्चे मायनों को सामने लाता है।
इस मौके पर मुस्लिम समाज के वरिष्ठजन व महिला-पुरुष बड़ी संख्या में उपस्थित थे। कार्यक्रम में इनायत खान, बब्बू खान, रसीद खान, ताज खान, शमीम खान, मुकीम अहमद, हकीम खान, फैजल खान, अनवर खान, डॉ. इकबाल हुसैन, यासीन कुरैशी, पीर अली, वहीदा बेगम, गुलनाज परवीन, शहनाज बेगम, आयशा खातून, सायमा नाज सहित बड़ी संख्या में मुस्लिम समाज के लोग मौजूद रहे।
साथ ही अन्य समाज के गणमान्य नागरिक जैसे चोवाराम वर्मा, मोहित साहू, रामेश्वरी वर्मा और अमर सेन ने भी कार्यक्रम में हिस्सा लिया। सभी ने इसे एक ऐतिहासिक अवसर बताते हुए कहा कि हथबंद की धरती से उठी यह पहल पूरे क्षे सौहार्द्र का संदेश देती है।
पूरे आयोजन में बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक की उपस्थिति ने इसे और भी खास बना दिया। मस्जिद प्रांगण में लहराता तिरंगा और देशभक्ति गीतों की गूंज ने यह साबित कर दिया कि आजादी का पर्व केवल किसी एक समाज का नहीं, बल्कि पूरे हिंदुस्तान का साझा उत्सव है।
यह पहला अवसर था जब हथबंद की जामा मस्जिद ने तिरंगे को सलामी देकर आजादी के इस पर्व को मनाया, और यह दृश्य हमेशा के लिए इतिहास के पन्न में दर्ज हो गया।















