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यज्ञ स्थल बलौदाबाजार में श्रीलंका से आए बाल कलाकारों की अद्भुत प्रस्तुति, भक्ति और संस्कृति का अनुपम संगम

भक्ति 22 January 2026 (60)

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प्रभात न्यूज़ 24: 

यज्ञ स्थल बलौदाबाजार में श्रीलंका से आए बाल कलाकारों की अद्भुत प्रस्तुति, भक्ति और संस्कृति का अनुपम संगम


बलौदाबाजार।

जिला मुख्यालय स्थित यज्ञ स्थल में आयोजित ग्यारह दिवसीय श्री हनुमत महायज्ञ इन दिनों आस्था, भक्ति और सांस्कृतिक चेतना का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। महायज्ञ के अंतर्गत प्रतिदिन संध्याकाल आयोजित हो रहे सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला में तृतीय दिवस का आयोजन विशेष रूप से यादगार रहा, जब श्रीलंका से आए प्रतिभाशाली बाल कलाकारों ने अपनी मनमोहक संगीतमय प्रस्तुतियों से दर्शकों का मन जीत लिया।


बाल कलाकारों द्वारा प्रस्तुत राम-सीता विवाह, सीताहरण एवं रावण रचित श्री शिव तांडव स्तोत्र की भावपूर्ण प्रस्तुति ने यज्ञ स्थल को भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर कर दिया। सैकड़ों की संख्या में उपस्थित श्रद्धालु और दर्शक कलाकारों की कला, भाव-भंगिमा और संगीतात्मक संयोजन से मंत्रमुग्ध नजर आए। प्रस्तुति के दौरान पूरा परिसर तालियों और जयकारों से गूंज उठा।


महायज्ञ के दौरान प्रतिदिन भजन, सुंदरकांड पाठ एवं विविध सांस्कृतिक कार्यक्रमों की संगीतमय भक्ति-धारा अनवरत प्रवाहित हो रही है। कार्यक्रमों में स्थानीय कलाकारों के साथ-साथ बाहर से आए कलाकार भी अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से सनातन संस्कृति और धार्मिक परंपराओं को जीवंत कर रहे हैं।

आयोजन समिति के अनुसार आगामी दिनों में भी अनेक वृहद एवं मनभावन कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इनमें प्रमुख रूप से —

डॉ. ललित ठाकुर द्वारा वनवासी राम पर आधारित मंचीय कार्यक्रम,

प्रसिद्ध भजन गायक दीपक केशरी की भक्ति संध्या,

धरोहर राजनांदगांव द्वारा छत्तीसगढ़ी सांस्कृतिक कार्यक्रम,

सरगम म्यूजिकल्स, रायपुर की संगीतमय प्रस्तुति,

पंचमुखी हनुमान सुंदरकांड पाठ समिति द्वारा सुंदरकांड पाठ,

तथा पं. प्रमोद शास्त्री ‘मानस केशरी’ जी का दो दिवसीय प्रवचन कार्यक्रम शामिल हैं।

आयोजक मंडल ने जिले एवं आसपास के क्षेत्रों के धर्मप्रेमी नागरिकों से अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर श्री हनुमत महायज्ञ का पुण्य लाभ लेने एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आनंद उठाने की अपील की है। महायज्ञ न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बना हुआ है, बल्कि यह आयोजन सांस्कृतिक एकता, आध्यात्मिक चेतना और पारंपरिक मूल्यों के संरक्षण का भी सशक्त माध्यम बनकर उभर रहा है।

गौरतलब है कि इस प्रकार के आयोजनों से युवा पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, रामायण की कथाओं और भक्ति परंपरा से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य भी संपन्न हो रहा है। बलौदाबाजार में आयोजित यह महायज्ञ आने वाले दिनों में और भी भव्य स्वरूप लेने की संभावना जताई जा रही है।





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