प्रभात न्यूज़ 24:
शासकीय धरसा रोड आम रास्ता निजी नाम पर दर्ज करने का गंभीर आरोप, ग्रामीणों ने मंत्री से की निष्पक्ष जांच की मांग
बलौदाबाजार।
छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले अंतर्गत ग्राम पंचायत लटुवा में शासकीय भूमि से जुड़े एक गंभीर मामले ने प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है। ग्रामवासियों ने आरोप लगाया है कि वर्षों से आम जनता के आवागमन हेतु उपयोग में आने वाला धरसा रोड (आम रास्ता) को राजस्व अधिकारियों से कथित साठगांठ कर व्यक्तिगत नाम पर दर्ज कर दिया गया, जो सीधे-सीधे शासन की भूमि और आम जनता के अधिकारों का हनन है।
इस पूरे मामले को लेकर ग्रामीणों ने माननीय टंकराम वर्मा जी, मंत्री – खेलकूद एवं युवा कल्याण, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन, छत्तीसगढ़ शासन, रायपुर को लिखित शिकायत भेजकर उचित एवं निष्पक्ष कार्यवाही की मांग की है।
रिकॉर्ड में शासकीय घास भूमि, वर्तमान में निजी नाम!
ग्रामीणों के अनुसार ग्राम पंचायत लटुवा में स्थित खसरा नंबर 2735 पूर्व में शासकीय घास भूमि के रूप में दर्ज था, जिसका उपयोग धरसा रोड (आम रास्ता) के रूप में किया जाता था। इस रास्ते से ग्रामीण निम्तार, बैलगाड़ी, कृषि कार्य एवं दैनिक आवागमन करते थे।
लेकिन हाल के राजस्व रिकॉर्ड में यही भूमि 2735/2 के रूप में बटांकन कर किसी निजी व्यक्ति के नाम दर्ज पाई गई, जिससे गांव का मुख्य रास्ता अवरुद्ध होने की स्थिति बन गई है।
1954-55 के रिकॉर्ड में छेड़छाड़ का आरोप
ग्रामीणों ने बताया कि सच्चाई जानने के लिए वे कलेक्टरेट बलौदाबाजार के रिकॉर्ड रूम पहुंचे थे। वहां आवेदन देने के बाद रिकॉर्ड रूम प्रभारी ने मौखिक रूप से बताया कि सन् 1954-55 के पटवारी रिकॉर्ड में उक्त भूमि ‘धरसा रोड आम रास्ता’ के रूप में दर्ज है, और उस समय यह भूमि पलटूराम कंवर के नाम से जुड़ी हुई नहीं थी।
हालांकि जब ग्रामीणों ने उस रिकॉर्ड की प्रमाणित प्रति मांगी, तो पहले दिन बिजली बंद होने का हवाला देकर टाल दिया गया। अगले दिन जब पुनः रिकॉर्ड मांगा गया, तो वही पेज रिकॉर्ड से गायब पाया गया, जिससे रिकॉर्ड में गंभीर छेड़छाड़ की आशंका और प्रबल हो गई।
लाल पेन से काटछांट, जांच के दायरे में राजस्व रिकॉर्ड
ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि 1954-55 के पटवारी रिकॉर्ड में लाल पेन से अत्यधिक काटछांट और संशोधन किया गया है, जो स्पष्ट रूप से नियमों के विरुद्ध है। राजस्व कानून के अनुसार शासकीय भूमि और आम रास्तों में इस प्रकार का संशोधन गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है।
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें
ग्रामीणों ने मंत्री को भेजे आवेदन में निम्न मांगें प्रमुख रूप से रखी हैं—
खसरा नंबर 2735 (शासकीय भूमि) का बटांकन कर 2735/2 निजी नाम पर दर्ज करने की वैधानिक जांच।
1954-55 से वर्तमान तक के सभी राजस्व रिकॉर्ड की उच्च स्तरीय जांच।
रिकॉर्ड से पेज गायब होने की घटना की जिम्मेदारी तय कर दोषियों पर कार्यवाही।
यदि अवैध रूप से नामांतरण पाया जाता है तो तत्काल निरस्तीकरण।
शासकीय धरसा रोड आम रास्ते से अवैध कब्जा हटाकर पुनः सार्वजनिक उपयोग में लाने की कार्रवाई।
आम जनता के अधिकारों से जुड़ा मामला
यह मामला केवल भूमि विवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आम जनता के आवागमन, शासन की संपत्ति की सुरक्षा और राजस्व पारदर्शिता से जुड़ा हुआ है। यदि इस प्रकार शासकीय आम रास्तों को निजी स्वार्थ में दर्ज किया जाएगा, तो ग्रामीण क्षेत्रों में आम नागरिकों का जीवन अत्यंत प्रभावित होगा।
प्रशासन की भूमिका पर टिकी निगाहें
अब सभी की निगाहें छत्तीसगढ़ शासन और राजस्व विभाग पर टिकी हैं कि क्या इस गंभीर आरोप की निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच कराई जाएगी या नहीं। ग्रामीणों को उम्मीद है कि मंत्री स्वयं इस प्रकरण को संज्ञान में लेकर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करेंगे और शासकीय भूमि को पुनः सुरक्षित किया जाएगा।

























