प्रभात न्यूज़ 24:
नवजात शिशुओं के जीवन रक्षक कौशल पर दो दिवसीय विशेष प्रशिक्षण
डॉक्टर रोशन देवांगन व डॉक्टर भूपेंद्र साहू ने दी नवजात शिशु सुरक्षा कार्यक्रम अंतर्गत महत्वपूर्ण जानकारी
बलौदाबाजार।
नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य एवं जीवन सुरक्षा को सुदृढ़ करने की दिशा में जिला बलौदाबाजार में एक महत्वपूर्ण पहल की गई। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय, बलौदाबाजार में नवजात शिशु सुरक्षा कार्यक्रम (Newborn Care Program) के अंतर्गत जिले के स्वास्थ्य कर्मियों हेतु दो दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का
आयोजन किया गया। इस प्रशिक्षण में शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. रोशन देवांगन एवं डॉ. भूपेंद्र साहू ने नवजात शिशुओं में होने वाली विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं, आपात स्थितियों तथा रीसक्सीटेशन (Resuscitation) की बारीकियों पर विस्तार से प्रशिक्षण प्रदान किया।
प्रशिक्षण के दौरान डॉ. रोशन देवांगन ने बताया कि नवजात शिशु के जन्म के तुरंत बाद का समय अत्यंत संवेदनशील होता है। इस दौरान अस्पताल स्टाफ द्वारा निर्धारित स्टैंडर्ड ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन किया जाना चाहिए। सही समय पर की गई प्राथमिक चिकित्सा, तापमान नियंत्रण, श्वसन की निगरानी एवं आवश्यक हस्तक्षेप से नवजात शिशु के जीवन को सुरक्षित किया जा सकता है तथा उसके भविष्य को बेहतर बनाया जा सकता है।
वहीं शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. भूपेंद्र साहू ने रीसक्सीटेशन की तकनीकों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कई बार जन्म के बाद नवजात शिशु का रोना शुरू नहीं होता या ऑक्सीजन की कमी के कारण उसकी स्थिति गंभीर हो जाती है। ऐसी स्थिति में रीसक्सीटेशन तकनीक के माध्यम से शिशु को नवजीवन प्रदान किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों में इसके लिए आवश्यक उपकरण जैसे ऑक्सीजन सिलेंडर, अंबू बैग, सक्शन मशीन एवं वार्मर उपलब्ध हैं, जिनकी समय-समय पर जांच और मॉक ड्रिल के माध्यम से कार्यक्षमता सुनिश्चित किया जाना बेहद जरूरी है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राजेश अवस्थी ने कहा कि नवजात शिशु सुरक्षा से जुड़े सभी प्रोटोकॉल का पालन हर हाल में किया जाना चाहिए। उन्होंने निर्देशित किया कि अस्पतालों में उपलब्ध वार्मर, ऑक्सीजन सपोर्ट सिस्टम, अंबू बैग एवं अन्य जीवन रक्षक उपकरणों की नियमित जांच की जाए, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल और प्रभावी उपचार संभव हो सके।
उक्त दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में जिले के समस्त प्रभारी आरएमए चिकित्सक, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ) एवं स्टाफ नर्सों ने अलग-अलग पालियों में सहभागिता की। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को सैद्धांतिक जानकारी के साथ-साथ व्यावहारिक अभ्यास भी कराया गया, जिससे वे वास्तविक परिस्थितियों में बेहतर निर्णय लेकर नवजात शिशुओं की जान बचा सकें।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा आयोजित यह प्रशिक्षण कार्यक्रम जिले में नवजात मृत्यु दर को कम करने और मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में एक सराहनीय प्रयास माना जा रहा है। कार्यक्रम में उपस्थित स्वास्थ्य कर्मियों ने इसे अत्यंत उपयोगी बताते हुए भविष्य में भी ऐसे प्रशिक्षण आयोजित किए जाने की आवश्यकता जताई।























