प्रभात न्यूज़ 24:
**सरपंच के इंतजार में ध्वजारोहण में देरी, राष्ट्रीय ध्वज संहिता की अवहेलना
शिक्षकों की लापरवाही बनी गांव में चर्चा का विषय**
बलौदाबाजार।
लवन तहसील से लगभग 7 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम पंचायत तिल्दा में 26 जनवरी गणतंत्र दिवस के अवसर पर एक गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। जहां पूरे देश में राष्ट्रीय पर्व को लेकर उत्साह और अनुशासन का वातावरण रहा, वहीं मीडिल स्कूल तिल्दा में राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराने में अनावश्यक देरी किए जाने से ग्रामीणों में नाराजगी देखी गई।
प्राप्त जानकारी के अनुसार 26 जनवरी 2026 को स्कूल में गणतंत्र दिवस समारोह की सभी तैयारियां पूरी थीं, लेकिन प्रधान पाठक एवं स्कूल स्टाफ द्वारा सरपंच एवं पंचायत प्रतिनिधियों के इंतजार में ध्वजारोहण को जानबूझकर टाल दिया गया। जबकि इस संबंध में छत्तीसगढ़ शासन, स्कूल शिक्षा विभाग या जिला प्रशासन द्वारा कोई ऐसा आदेश जारी नहीं किया गया है, जिसमें यह अनिवार्य हो कि विद्यालयों में ध्वजारोहण सरपंच या उपसरपंच के हाथों ही किया जाए।
कानूनी प्रावधान क्या कहते हैं?
राष्ट्रीय ध्वज संहिता एवं शासकीय परंपरा के अनुसार—
शासकीय विद्यालयों में ध्वजारोहण का दायित्व संस्था प्रमुख (प्रधान पाठक/प्राचार्य) का होता है।
ध्वजारोहण सामान्यतः सुबह 7:30 से 8:00 बजे के बीच किया जाना चाहिए।
किसी विशेष जनप्रतिनिधि की उपस्थिति अनिवार्य नहीं है।
इसके बावजूद तिल्दा स्कूल में सरपंच द्वारा पहले ग्राम पंचायत कार्यालय एवं शांति सरोवर में ध्वजारोहण कर आगे बढ़ जाने के बाद भी स्कूल स्टाफ द्वारा मौन रहकर प्रतीक्षा करना, राष्ट्रीय ध्वज की गरिमा एवं समयबद्धता के प्रति लापरवाही को दर्शाता है।
ग्रामीणों में असंतोष
इस पूरे घटनाक्रम को लेकर गांव में यह चर्चा जोरों पर है कि
“राष्ट्रीय ध्वज पहले है या कोई खास व्यक्ति?”
ग्रामीणों का मानना है कि ध्वजारोहण में की गई यह देरी देश के गौरव और संविधान के सम्मान के विपरीत है।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया
इस मामले में जब प्रधान पाठक से चर्चा की गई तो उन्होंने स्वीकार किया कि
“सरपंच एवं पंचायत प्रतिनिधियों के इंतजार में देर हुई।”
वहीं बीईओ राजेंद्र टंडन ने स्पष्ट रूप से कहा—
“लगभग सभी जगहों पर ध्वजारोहण सुबह 7:30 बजे तक हो जाता है। 10-5 मिनट की देरी हो सकती है, लेकिन अधिक समय की देरी लापरवाही का प्रतीक है। सरपंच या उपसरपंच के हाथों ध्वजारोहण का कोई आदेश जारी नहीं हुआ है। विद्यालय में संस्था प्रमुख द्वारा ही ध्वजारोहण किया जाना चाहिए।”
कार्रवाई की मांग
इस पूरे प्रकरण ने प्रशासनिक और शैक्षणिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारों का कहना है कि विभागीय अधिकारियों को इस मामले का संज्ञान लेना चाहिए, ताकि भविष्य में कोई भी अधिकारी या कर्मचारी राष्ट्रीय ध्वज की गरिमा से ऊपर किसी व्यक्ति विशेष को प्राथमिकता न दे।
राष्ट्रीय ध्वज सम्मान का विषय है, प्रतीक्षा का नहीं।
तिरंगा पहले — व्यक्ति बाद में।























