प्रभात न्यूज़ 24:
तिल्दा–सुनसुनिया में रेत माफिया बेखौफ: महानदी का सीना छलनी, प्रशासन पर उठे सवाल
बलौदाबाजार।
तिल्दा/सुनसुनिया- महानदी किनारे बसे तिल्दा और सुनसुनिया क्षेत्र में अवैध रेत खनन का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि वर्षों से ट्रैक्टरों और डंपरों के जरिए खुलेआम रेत निकासी की जा रही है, जिससे नदी का प्राकृतिक स्वरूप बिगड़ रहा है और पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंच रहा है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, रोजाना सैकड़ों ट्रैक्टर महानदी से रेत भरकर ग्रामीण मार्गों से होते हुए जिला मुख्यालय तक पहुंचते हैं। इससे न केवल सड़कों की हालत खराब हो रही है, बल्कि धूल, शोर और दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ गया है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार शिकायतों के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं होती, केवल औपचारिक कार्रवाई के बाद कुछ दिनों के लिए खनन रुकता है और फिर पहले से अधिक तेजी से शुरू हो जाता है।
कानूनी प्रावधानों की अनदेखी
खनिज विभाग के नियमों के अनुसार बिना वैध पट्टा, परिवहन चालान और निर्धारित सीमा के बाहर रेत निकासी पूरी तरह अवैध है।
खनिज अधिनियम 1957 के तहत अवैध खनन दंडनीय अपराध है।
दोषियों पर जुर्माना, वाहन जब्ती और जेल की सजा का प्रावधान है।
पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के तहत नदी, तट और भूजल को नुकसान पहुंचाने पर भी कार्रवाई संभव है।
इसके बावजूद क्षेत्र में अवैध खनन का नेटवर्क लगातार सक्रिय बताया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासनिक स्तर पर समय-समय पर दिखावटी कार्रवाई तो होती है, लेकिन स्थायी समाधान नहीं निकल पा रहा है।
पर्यावरण और खेती पर खतरा
विशेषज्ञों के मुताबिक, अनियंत्रित रेत खनन से नदी का बहाव बदलता है, तट कटाव बढ़ता है और भूजल स्तर प्रभावित होता है। इससे आसपास के खेतों की उर्वरता और सिंचाई व्यवस्था पर भी असर पड़ सकता है।
प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती
क्षेत्र में रेत माफिया का प्रभाव इतना बढ़ गया है कि आम लोग खुलकर विरोध करने से कतराते हैं। अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या प्रशासन इस अवैध कारोबार पर स्थायी और कड़ी कार्रवाई करेगा, या महानदी का दोहन यूं ही जारी रहेगा।
ग्रामीणों ने मांग की है कि संयुक्त टीम बनाकर लगातार निगरानी, सख्त कानूनी कार्रवाई और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए, ताकि अवैध खनन पर पूर्ण विराम लगाया जा सके।
सरपंच प्रतिनिधि का वर्जन
सरपंच प्रतिनिधि लकेश्वर मांझी ने बताया कि सुनसुनिया क्षेत्र में चल रहे अवैध रेत खनन की जानकारी तहसील लवन को मौखिक रूप से दी जा चुकी है। उन्होंने कहा कि प्रशासन से कार्रवाई की मांग की गई है, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है, इसका जवाब संबंधित तहसीलदार ही दे सकते हैं।
संक्षिप्त टिप्पणी
लगातार शिकायतों के बावजूद यदि अवैध खनन पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होती, तो इससे प्रशासनिक तंत्र की सक्रियता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। ऐसे मामलों में त्वरित निरीक्षण, संयुक्त अभियान और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई ही प्रशासन की जवाबदेही और गंभीरता को दर्शा सकती है।
(यह समाचार ग्रामीणों के द्वारा दी गई जानकारी और स्थानीय सूचनाओं पर आधारित है। प्रशासनिक पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)





















