प्रभात न्यूज़ 24:
मानवता का महामंत्र: इंसान बाद में, हम सबसे पहले ‘जीव’ हैं — पट्टाचार्य विशुद्ध सागर जी
पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव में उमड़ा आस्था का सैलाब, तप और केवल ज्ञान के मंचन ने भाव-विभोर किया श्रद्धालुओं को
बलौदा बाजार।
रिसदा रोड स्थित नवनिर्मित भव्य जैन मंदिर में आयोजित जैन समाज का पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव इन दिनों पूरे क्षेत्र में आस्था, भक्ति, संयम और संस्कार का अनुपम केंद्र बन गया है। इस ऐतिहासिक धार्मिक आयोजन में न केवल जैन समाज बल्कि सर्व समाज की भागीदारी देखने को मिल रही है। प्रतिदिन हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर धर्मलाभ अर्जित कर रहे हैं, जिससे पूरा परिसर जन-समुद्र का रूप धारण किए हुए है।
गर्भ, जन्म के बाद अब तप कल्याणक का भव्य आयोजन
जैन समाज के प्रचार-प्रसार मंत्री अनीश जैन ने जानकारी देते हुए बताया कि पंचकल्याणक महोत्सव के अंतर्गत प्रारंभिक दिनों में गर्भ कल्याणक एवं जन्म कल्याणक विधिपूर्वक संपन्न किया गया। वर्तमान में तप कल्याणक का आयोजन पूरे उल्लास और धार्मिक गरिमा के साथ किया जा रहा है। आगामी दिनों में केवल ज्ञान एवं निर्वाण कल्याणक भी विधिविधान से संपन्न होंगे।
आदिनाथ भगवान की तपस्या और केवल ज्ञान का सजीव मंचन
महोत्सव के दौरान भगवान आदिनाथ की कठोर तपस्या, दीर्घ संयम साधना और अंततः केवल ज्ञान प्राप्ति के दिव्य क्षणों का अत्यंत भावपूर्ण और सजीव मंचन किया गया। इन अलौकिक दृश्यों को देखकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। मंचन के दौरान संपूर्ण वातावरण “अहिंसा परमो धर्मः” और “जीव दया ही धर्म है” के उद्घोष से गूंज उठा।
विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों की पुण्य बोली
धार्मिक अनुष्ठानों में समाजजनों ने बढ़-चढ़कर सहभागिता की।
संयम काल की महा आरती का सौभाग्य स्व. श्री नेमीचंद जी छाबड़ा के परिवार ( दिनेश जैन) को प्राप्त हुआ।
शांति धारा की पुण्य बोली का सौभाग्य श्री तुषार पाटनी एवं कन्हैयालाल सेठी को मिला।
भगवान के बाल सखाओं की मनोहारी झांकी (बाल सभा) की बोली श्री नरेंद्र शोभा जैन ने ली।
पद प्रक्षालन का पुण्य लाभ अखिलेश–मधु पाटनी परिवार को प्राप्त हुआ।
पट्टाचार्य विशुद्ध सागर जी का मानवतावादी संदेश
इस अवसर पर पट्टाचार्य श्री 108 विशुद्ध सागर जी महाराज ने अपने ओजस्वी और प्रेरणादायी प्रवचन में मानवता का गूढ़ संदेश देते हुए कहा—
“हमें धर्म, जाति, संप्रदाय, ऊँच-नीच और अमीर-गरीब के भेद से ऊपर उठकर सोचना चाहिए। यह सदैव स्मरण रखें कि इंसान बाद में हैं, हम सबसे पहले एक जीव हैं। जीव मात्र के प्रति करुणा, दया और अहिंसा ही सच्चा धर्म है।”
उन्होंने कहा कि आज के समय में जब समाज स्वार्थ और हिंसा की ओर बढ़ रहा है, तब जैन धर्म का अहिंसा और संयम का मार्ग संपूर्ण मानवता के लिए प्रकाशस्तंभ है।
राजनीतिक और सामाजिक दिग्गजों की गरिमामयी उपस्थिति
महामहोत्सव में सांसद बृजमोहन अग्रवाल, संगठन महामंत्री अजय जामवाल, उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती आकांक्षा जायसवाल सहित अनेक जनप्रतिनिधियों एवं वरिष्ठ अधिकारियों ने सहभागिता कर मत्था टेका और धर्मलाभ लिया।
नगरपालिका अध्यक्ष अशोक जैन ने जैन समाज की सामाजिक सेवा, अनुशासन और संस्कारों की परंपरा की प्रशंसा करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन समाज में सकारात्मक ऊर्जा, नैतिक मूल्यों और भाईचारे को सुदृढ़ करते हैं।
विधि-विधान और व्यवस्थाओं की सराहनीय भूमिका
पूरे पंचकल्याणक महोत्सव का संचालन पंडित धर्मचंद जी शास्त्री द्वारा शास्त्रोक्त विधि-विधान से किया जा रहा है। जैन समाज अध्यक्ष संजय जैन एवं सचिव अमित जैन द्वारा अतिथियों का स्वागत-सम्मान किया गया।
महिला मंडल अध्यक्ष श्रीमती सुमन सुधीर छाबड़ा की सक्रिय सहभागिता उल्लेखनीय रही। वहीं समाज के संरक्षकों— इंद्र कुमार जैन, महावीर प्रसाद जैन, पंडित धन प्रसाद जैन, श्री पदमचंद जैन, प्रकाशचंद जैन, रमेश जैन एवं अशोक जैन के मार्गदर्शन में पूरा आयोजन अनुशासित और भव्य रूप से संपन्न हो रहा है।
धर्म, संस्कृति और सामाजिक समरसता का संगम
पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव न केवल एक धार्मिक आयोजन है, बल्कि यह मानवता, करुणा, अहिंसा और सामाजिक समरसता का जीवंत उदाहरण बनकर उभरा है। यह महोत्सव आने वाली पीढ़ियों को संस्कार, संयम और सेवा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता रहेगा।
















