प्रभात न्यूज़ 24:
ग्राम हथबंध में अवैध कब्जों पर चयनात्मक कार्रवाई के आरोप, प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
बलौदाबाजार।
ग्राम पंचायत हथबंध में शासकीय भूमि पर अवैध कब्जों को लेकर विवाद एक बार फिर गहराता जा रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन पर चयनात्मक कार्रवाई करने का आरोप लगाते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। आरोप है कि वर्षों से लंबित शिकायतों और जांच के बावजूद अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हो पाई है, जिससे अवैध कब्जाधारियों के हौसले बुलंद हैं।
पुरानी शिकायतें, अधूरी जांच
जानकारी के अनुसार, पटवारी हल्का नंबर 22 द्वारा 11 सितंबर 2024 को प्राप्त शिकायत के आधार पर गांव में स्थल निरीक्षण किया गया था।
निरीक्षण के बाद अवैध कब्जाधारियों के विरुद्ध प्रतिवेदन तैयार कर तहसील कार्यालय में प्रस्तुत किया गया, लेकिन उस समय भी कथित रूप से राजनीतिक द्वेष के चलते केवल एक व्यक्ति को ही कारण बताओ नोटिस जारी किया गया।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि कार्रवाई की जाती तो सभी कब्जाधारियों पर समान रूप से होनी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
सड़क किनारे अवैध दुकानों का जाल
गांव के हथबंध तिराहा से बलौदाबाजार मार्ग तक सड़क के दोनों ओर कई लोगों द्वारा शासकीय भूमि पर अवैध दुकानें बनाकर कब्जा कर लिया गया है।
बताया जाता है कि 11 नवंबर 2025 को कुछ मामलों में बेदखली आदेश भी जारी किए गए थे, लेकिन उसके बावजूद निर्माण कार्य पूरा कर दुकानों को किराए पर दे दिया गया। यह सीधे तौर पर शासन के आदेशों की अवहेलना को दर्शाता है।
खसरा नंबरों में भी सामने आई गड़बड़ी
ग्रामीणों के अनुसार, बाजार चौक क्षेत्र में जनदर्शन में शिकायत के बाद 3 जनवरी 2017 को राजस्व टीम द्वारा खसरा नंबर 106/1, 122/33 एवं 122/1 का निरीक्षण किया गया था। निरीक्षण में अधिकांश दुकानें और मकान शासकीय भूमि पर पाए गए थे।
इसके बावजूद वर्षों बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है, जिससे प्रशासनिक कार्रवाई की गंभीरता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
जांच के आदेश, लेकिन कार्रवाई नहीं
राजेश पटेल द्वारा शासकीय भूमि में अतिक्रमण की शिकायत के बाद 1 दिसंबर 2023 और 28 अक्टूबर 2024 को तत्कालीन तहसीलदार द्वारा जांच के निर्देश दिए गए थे।
ग्रामीणों का आरोप है कि इन आदेशों के बाद भी न तो स्थल जांच पूरी हुई और न ही कोई अंतिम प्रतिवेदन तैयार किया गया। इससे प्रशासनिक उदासीनता स्पष्ट नजर आती है।
‘आदतन शिकायतकर्ता’ भी घेरे में
गांव में यह भी चर्चा है कि कुछ लोग जो लगातार शिकायतें कर रहे हैं, वे स्वयं भी शासकीय भूमि पर अवैध कब्जा किए हुए हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि निजी स्वार्थ और आपसी रंजिश के चलते एक-दूसरे के खिलाफ शिकायतें की जा रही हैं, जिससे पूरे मामले की निष्पक्षता प्रभावित हो रही है।
बैंक के सामने भी मिला अतिक्रमण
वर्ष 2023 में तिगड्डा चौक स्थित ग्रामीण बैंक के सामने अवैध कब्जे की शिकायत पर तहसीलदार द्वारा मौके पर जांच की गई थी।
इस दौरान हल्का पटवारी ने संबंधित भूमि को शासकीय खसरा नंबर 122/1 बताया, जिस पर लगभग 960 वर्गफीट में निर्माण पाया गया। हालांकि संबंधित व्यक्ति ने किसी अन्य स्थान का आबादी पट्टा प्रस्तुत किया, जिससे मामला और उलझ गया।
70 प्रतिशत आबादी शासकीय भूमि पर?
पंचायती राज के प्रथम सरपंच एवं ग्राम पटेल सुरेश यादव के अनुसार, गांव में अधिकांश लोग शासकीय भूमि पर बसे हुए हैं।
उन्होंने बताया कि लगभग 70 प्रतिशत आबादी के पास वैध दस्तावेज नहीं हैं और बाद में आबादी पट्टा दिखाकर कब्जा वैध बताने की कोशिश की जाती है।
चयनात्मक कार्रवाई पर उठे सवाल
पूर्व सरपंच प्रतिनिधि राम सुधार जांगड़े ने भी आरोप लगाया कि प्रशासन द्वारा केवल चुनिंदा लोगों पर कार्रवाई की जा रही है, जबकि कई बड़े अतिक्रमणकारियों को नजरअंदाज किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि यदि कार्रवाई करनी है तो सभी के खिलाफ समान रूप से होनी चाहिए, अन्यथा यह पक्षपातपूर्ण मानी जाएगी।
ग्रामीणों की मांग—निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई
ग्रामवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष और व्यापक जांच कराई जाए तथा सभी अवैध कब्जाधारियों के खिलाफ एक समान कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
साथ ही, वर्षों से लंबित मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की भी मांग की गई है।











