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भीषण गर्मी से जल संकट गहराया: सूखते खेत, घटता जलस्तर और किसानों की बढ़ती चिंता

देश / दुनिया 12 April 2026 (103)

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प्रभात न्यूज़ 24: 

भीषण गर्मी से जल संकट गहराया: सूखते खेत, घटता जलस्तर और किसानों की बढ़ती चिंता



बलौदाबाजार।

गर्मी के तेवर इस वर्ष कुछ ज्यादा ही तीखे नजर आ रहे हैं। अप्रैल माह की शुरुआत में ही पड़ रही भीषण गर्मी ने भाटापारा शहर सहित आसपास के ग्रामीण इलाकों में जल संकट को गंभीर बना दिया है। लगातार बढ़ते तापमान, तेज धूप और गर्म हवाओं के कारण जहां एक ओर भू-जल स्तर तेजी से नीचे जा रहा है, वहीं दूसरी ओर खेतों में खड़ी फसलें पानी के अभाव में सूखने लगी हैं। इस स्थिति ने किसानों की चिंता को कई गुना बढ़ा दिया है।



ग्रामीण क्षेत्रों से मिल रही जानकारी के अनुसार, इस समय फसलों को पर्याप्त पानी की आवश्यकता होती है, लेकिन बारिश की कमी और सिंचाई संसाधनों के अभाव में खेतों की मिट्टी की नमी तेजी से खत्म हो रही है। जिन किसानों के पास निजी सिंचाई साधन नहीं हैं, वे सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। कई खेतों में फसलें मुरझाने लगी हैं, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान की आशंका सता रही है।



जल स्तर में गिरावट से शहर भी प्रभावित

केवल ग्रामीण ही नहीं, बल्कि भाटापारा शहर भी जल संकट की चपेट में आ चुका है। हैंडपंप, कुएं और बोरवेल का जलस्तर तेजी से नीचे जा रहा है। कई मोहल्लों में पानी की आपूर्ति बाधित होने लगी है, जिससे लोगों को दैनिक जरूरतों के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है। गर्मी के शुरुआती दौर में ही यह स्थिति लोगों के लिए चिंता का विषय बन गई है।



विधायक इन्द्र साव ने उठाया मुद्दा

क्षेत्र की गंभीर स्थिति को देखते हुए विधायक इन्द्र साव ने पहल करते हुए जल संसाधन विभाग के अधिकारियों से मुलाकात की। उन्होंने भाटापारा शाखा नहर में तत्काल पानी छोड़े जाने की मांग की है, ताकि किसानों और आम लोगों को राहत मिल सके।

विधायक ने कहा कि यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए, तो किसानों की फसलें पूरी तरह नष्ट हो सकती हैं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति पर गहरा असर पड़ेगा। साथ ही शहर में भी पेयजल संकट विकराल रूप ले सकता है।

किसानों की बढ़ती चिंता और वैकल्पिक प्रयास

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कई किसान अब सीमित संसाधनों में फसलों को बचाने के लिए वैकल्पिक उपाय अपना रहे हैं। कुछ किसान कम पानी में सिंचाई तकनीक, जैविक तरीकों और फसल संरक्षण के अन्य उपायों का सहारा ले रहे हैं। हालांकि, ये उपाय भी लंबे समय तक राहत देने में सक्षम नहीं हैं।



नहर में पानी छोड़ने की मांग तेज

ग्रामीणों और किसानों का कहना है कि भाटापारा की शाखा नहर उनके लिए जीवनदायिनी है। यदि इसमें समय पर पानी छोड़ दिया जाए, तो बड़ी हद तक फसलों को बचाया जा सकता है और जल संकट पर नियंत्रण पाया जा सकता है। इस मांग को लेकर अब जनप्रतिनिधियों और किसानों की ओर से दबाव बढ़ने लगा है।


आने वाले समय को लेकर आशंका

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तापमान में इसी तरह वृद्धि होती रही और जल स्रोतों का स्तर गिरता रहा, तो आने वाले दो महीनों में स्थिति और भयावह हो सकती है। पानी की कमी से न केवल खेती-किसानी प्रभावित होगी, बल्कि आम जनजीवन भी अस्त-व्यस्त हो सकता है।



प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की अपेक्षा

ऐसी परिस्थितियों में स्थानीय लोगों और किसानों को प्रशासन से त्वरित और ठोस कदमों की उम्मीद है। नहरों में पानी छोड़ने, जल संरक्षण के उपायों को बढ़ावा देने और पेयजल आपूर्ति को सुचारु रखने जैसे कदमों से ही इस संकट से राहत मिल सकती है।



निष्कर्ष

भाटापारा क्षेत्र में बढ़ती गर्मी और घटते जलस्तर ने एक गंभीर चेतावनी दे दी है। यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो जल संकट और कृषि नुकसान की स्थिति और विकराल हो सकती है। फिलहाल सभी की निगाहें प्रशासन और जल संसाधन विभाग की कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

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