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हत्या के प्रयास मामले में सभी आरोपी बरी, साक्ष्यों के अभाव में न्यायालय का फैसला

देश / दुनिया 19 April 2026 (86)

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प्रभात न्यूज़ 24: 

हत्या के प्रयास मामले में सभी आरोपी बरी, साक्ष्यों के अभाव में न्यायालय का फैसला



बलौदाबाजार।

 जिले के गिधौरी थाना क्षेत्र से जुड़े बहुचर्चित हत्या के प्रयास मामले में न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाते हुए सभी आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया है। प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश, बलौदाबाजार की अदालत ने सुनवाई के दौरान पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे प्रमाणित करने में असफल रहा, जिसके चलते सभी छह आरोपियों को बरी कर दिया गया।



प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह मामला ग्राम खपरीडीह का है, जहां रेत ढुलाई को लेकर खनिज विभाग में की गई शिकायत के बाद विवाद उत्पन्न हुआ था। इसी विवाद के चलते ग्राम खपरीडीह निवासी गयाराम पटेल, केवल केवट, दिलहरण कश्यप, यशवंत पटेल, दिग्विजय वैष्णो एवं आनंद राम पटेल पर आरोप लगाया गया था कि उन्होंने ग्राम कुम्हारी निवासी प्रार्थी पालेश्वर साहू को बीच चौक में रोककर जानलेवा हमला किया। शिकायत में आरोप था कि आरोपियों ने लाठी, लोहे की रॉड और बेल्ट से मारपीट कर गंभीर चोटें पहुंचाईं।



घटना के बाद गिधौरी पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं — 127(2), 286, 115(2), 351(3), 191(1), 192(2), 192(3) एवं 109 के तहत अपराध दर्ज किया था और जांच के पश्चात प्रकरण क्रमांक 104/2025 के तहत न्यायालय में चालान पेश किया गया।



मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत गवाहों और साक्ष्यों का परीक्षण किया गया। वहीं, बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सतीश चंद्र श्रीवास्तव ने आरोपियों का पक्ष रखते हुए दलील दी कि प्रस्तुत साक्ष्य और गवाही घटना को स्पष्ट रूप से सिद्ध नहीं करते हैं और मामले में कई विरोधाभास मौजूद हैं। बचाव पक्ष ने यह भी तर्क रखा कि आरोपियों को झूठा फंसाया गया है और घटना के तथ्यों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया है।



दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने और साक्ष्यों के गहन परीक्षण के बाद न्यायालय इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे सिद्ध करने में असफल रहा है। इसके परिणामस्वरूप न्यायालय ने सभी आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया।

इस फैसले के बाद आरोपियों और उनके परिजनों ने राहत की सांस ली। वहीं, यह निर्णय न्यायिक प्रक्रिया में साक्ष्यों के महत्व और निष्पक्ष सुनवाई के सिद्धांत को एक बार फिर रेखांकित करता है।



कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के मामलों में ठोस साक्ष्य और सुसंगत गवाही अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। यदि जांच या प्रस्तुतीकरण में कहीं भी कमी रह जाती है, तो उसका सीधा प्रभाव न्यायालय के अंतिम निर्णय पर पड़ता है।



यह फैसला न केवल संबंधित पक्षों के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि आम नागरिकों के लिए भी एक संदेश है कि न्यायालय केवल ठोस और प्रमाणित साक्ष्यों के आधार पर ही निर्णय देता है, जिससे न्याय व्यवस्था की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनी रहती है।

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