प्रभात न्यूज़ 24:
महिला आरक्षण बिल को लेकर सियासत तेज, भाजपा पर भ्रम फैलाने का आरोप – डॉ. फ़ारूक़ी
बलौदाबाज़ार।
देश में महिला आरक्षण को लेकर एक बार फिर राजनीतिक बयानबाज़ी तेज हो गई है। जिला कांग्रेस बलौदाबाज़ार के प्रवक्ता डॉ. अयाज अहमद फ़ारूक़ी ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर महिला आरक्षण बिल के नाम पर महिलाओं के बीच भ्रम फैलाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि भाजपा इस मुद्दे को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल कर रही है, जबकि वास्तविक स्थिति इससे अलग है।
डॉ. फ़ारूक़ी ने स्पष्ट करते हुए कहा कि महिला आरक्षण से संबंधित नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 पहले ही संसद में पारित हो चुका है। यह 106वां संविधान संशोधन है, जिसे लोकसभा और राज्यसभा दोनों में बहुमत से पारित किया गया था और राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद यह कानून बन चुका है। ऐसे में यह कहना कि विपक्ष ने महिला आरक्षण का समर्थन नहीं किया, पूरी तरह भ्रामक और तथ्यहीन है।
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा 16 अप्रैल 2026 को प्रस्तुत किए गए एक अन्य विधेयक को महिला आरक्षण से जोड़कर प्रस्तुत कर रही है, जबकि उसका सीधा संबंध परिसीमन (Delimitation) से था।
उनके अनुसार, यह प्रस्तावित संशोधन लोकसभा और राज्यों में सीटों के पुनर्निर्धारण से जुड़ा था, जिसमें लोकसभा की कुल सीटों को बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव शामिल था। इसमें राज्यों के लिए 815 और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 35 सीटों का प्रावधान बताया गया था।
डॉ. फ़ारूक़ी ने कहा कि इस विधेयक में परिसीमन के लिए वर्ष 2011 की जनगणना को आधार बनाने की बात कही गई थी, साथ ही पुदुचेरी, दिल्ली और जम्मू-कश्मीर जैसे केंद्र शासित प्रदेशों के कानूनों में संशोधन का प्रस्ताव भी शामिल था, ताकि भविष्य में महिला आरक्षण और परिसीमन को लागू किया जा सके।
कांग्रेस प्रवक्ता के मुताबिक, यह विधेयक संसद में इसलिए पारित नहीं हो सका क्योंकि देश के कई राज्यों ने परिसीमन के प्रस्ताव पर आपत्ति जताई थी। उनका कहना है कि भाजपा ने महिला आरक्षण को “मुखौटा” बनाकर परिसीमन से जुड़ा बिल पास कराने की कोशिश की, जिसे विपक्ष ने मिलकर रोक दिया।
उन्होंने आगे कहा कि यदि केंद्र सरकार की मंशा वास्तव में महिला सशक्तिकरण की होती, तो वह मौजूदा लोकसभा की 543 सीटों पर ही 33 प्रतिशत आरक्षण तुरंत लागू कर सकती थी। लेकिन ऐसा न करके भाजपा केवल राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रही है।
इस पूरे मुद्दे पर भाजपा और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। जहां भाजपा महिला आरक्षण को अपनी बड़ी उपलब्धि बता रही है, वहीं कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल इसे लागू करने में हो रही देरी और कथित राजनीतिक रणनीति पर सवाल उठा रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में महिला आरक्षण और परिसीमन का मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति का एक प्रमुख केंद्र बन सकता है, जिसका प्रभाव आगामी चुनावों पर भी पड़ सकता है।











