प्रभात न्यूज़ 24:
झीरम घाटी की गूंज फिर तेज, 10 अगस्त की सुनवाई पर प्रदेश की निगाहें : भागवत थवाईत
शहादत के वर्षों बाद भी अनसुलझे सवाल कायम, कांग्रेस नेता ने कहा—झीरम की हर परत से उठना चाहिए पर्दा
बलौदाबाजार/कटगी।
छत्तीसगढ़ के राजनीतिक इतिहास में दर्ज झीरम घाटी का दर्द एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। बहुचर्चित झीरम घाटी नक्सली हमले से संबंधित मामले में 10 अगस्त को होने वाली सुनवाई को लेकर प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ गई है। इस महत्वपूर्ण सुनवाई को लेकर शहीद परिवारों, कांग्रेस कार्यकर्ताओं और आम लोगों की निगाहें टिकी हुई हैं।
पूर्व युवा कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष कसडोल-कटगी एवं कांग्रेस मंडल उपाध्यक्ष भागवत थवाईत ने झीरम घाटी कांड को लेकर कहा कि इस घटना को भले ही वर्षों बीत गए हों, लेकिन इससे जुड़े सवाल आज भी लोगों के जेहन में जिंदा हैं। उन्होंने कहा कि इतने बड़े राजनीतिक नरसंहार की पूरी तस्वीर सामने आना बेहद जरूरी है, ताकि शहीदों के परिवारों और प्रदेश की जनता को वास्तविक तथ्यों की जानकारी मिल सके।
भागवत थवाईत ने कहा कि 25 मई 2013 को कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के दौरान बस्तर के झीरम घाटी क्षेत्र में नक्सलियों ने कांग्रेस नेताओं के काफिले पर हमला किया था। इस भयावह घटना में कांग्रेस के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष नंद कुमार पटेल, वरिष्ठ नेता महेंद्र कर्मा, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल समेत अनेक कांग्रेस कार्यकर्ता और सुरक्षाकर्मी मारे गए थे।
उन्होंने कहा कि झीरम की घटना किसी सामान्य नक्सली वारदात की तरह नहीं थी। इस हमले में प्रदेश के राजनीतिक नेतृत्व का एक बड़ा हिस्सा समाप्त हो गया था और इसका असर लंबे समय तक छत्तीसगढ़ की राजनीति पर देखने को मिला।
क्यों महत्वपूर्ण मानी जा रही है 10 अगस्त की सुनवाई?
भागवत थवाईत ने कहा कि 10 अगस्त की सुनवाई को लेकर लोगों में इसलिए उत्सुकता है क्योंकि झीरम घाटी मामले में वर्षों से कई सवाल चर्चा में रहे हैं।
उन्होंने कहा कि जनता यह जानना चाहती है कि उस दिन सुरक्षा व्यवस्था कैसी थी, हमले से पहले सुरक्षा एजेंसियों को क्या जानकारी थी, काफिले की सुरक्षा में क्या इंतजाम किए गए थे और इतनी बड़ी घटना आखिर किन परिस्थितियों में घटित हुई।
उन्होंने कहा कि इन सभी सवालों का जवाब राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से नहीं, बल्कि निष्पक्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया से सामने आना चाहिए।
“शहीदों के बलिदान का सम्मान तभी, जब सच्चाई सामने आए”
कांग्रेस मंडल उपाध्यक्ष भागवत थवाईत ने कहा कि झीरम घाटी में शहीद हुए नेताओं और सुरक्षाकर्मियों के परिवारों ने वर्षों से अपने प्रियजनों की शहादत का दर्द सहा है।
उन्होंने कहा कि किसी भी घटना में समय बीत जाना उसके सवालों को खत्म नहीं करता। यदि कोई तथ्य जांच के दायरे में है तो उसकी निष्पक्ष पड़ताल होना चाहिए और जो भी वास्तविकता सामने आए, उसे जनता के सामने रखने की जरूरत है।
थवाईत ने कहा कि शहीद नंद कुमार पटेल, महेंद्र कर्मा, विद्याचरण शुक्ल और अन्य शहीदों का बलिदान छत्तीसगढ़ कभी नहीं भूल सकता।
झीरम को लेकर राजनीति नहीं, पारदर्शिता जरूरी
भागवत थवाईत ने कहा कि झीरम घाटी जैसे संवेदनशील मामले को केवल राजनीतिक बयानबाजी का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस मामले में किसी व्यक्ति या दल पर आरोप लगाने के बजाय सभी तथ्यों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि यदि जांच के दौरान किसी भी व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो कानून अपना काम करे। लेकिन अंतिम निष्कर्ष तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर ही होना चाहिए।
घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था
25 मई 2013 की घटना के बाद देशभर में शोक की लहर दौड़ गई थी। तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस की तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी सहित राष्ट्रीय स्तर के नेताओं ने छत्तीसगढ़ पहुंचकर घटना पर शोक व्यक्त किया था।
उस समय छत्तीसगढ़ में भाजपा की सरकार थी और डॉ. रमन सिंह मुख्यमंत्री थे। घटना के बाद राज्य की सुरक्षा व्यवस्था और नक्सल प्रभावित इलाकों में सुरक्षा रणनीति को लेकर कई सवाल उठे थे।
भागवत थवाईत ने कहा कि उस समय सत्ता में कौन था, यह राजनीतिक इतिहास का हिस्सा है, लेकिन आज सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि झीरम घाटी से जुड़े सभी सवालों का निष्पक्ष जवाब सामने आना चाहिए।
“हर सवाल का जवाब जरूरी”
भागवत थवाईत ने कहा कि झीरम घाटी में जिन लोगों ने अपनी जान गंवाई, उनके परिवारों के लिए यह सिर्फ एक पुरानी घटना नहीं है। उनके लिए वह दिन आज भी उतना ही दर्दनाक है।
उन्होंने कहा कि सरकार, जांच एजेंसियों और न्यायिक संस्थाओं की प्रक्रिया पर भरोसा रखते हुए प्रदेश की जनता को उम्मीद है कि मामले में आगे महत्वपूर्ण तथ्य सामने आएंगे।
उन्होंने कहा कि 10 अगस्त की सुनवाई सिर्फ एक तारीख नहीं है, बल्कि उन परिवारों की उम्मीद से जुड़ी प्रक्रिया है, जो वर्षों से झीरम की सच्चाई सामने आने की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
भागवत थवाईत ने रखी स्पष्ट मांग
कांग्रेस नेता भागवत थवाईत ने मांग की कि झीरम घाटी से जुड़े प्रत्येक पहलू की गंभीरता से जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि घटना के प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष सभी पहलुओं को जांच के दायरे में लाकर तथ्य सामने लाए जाएं।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की जनता को यह अधिकार है कि वह अपने इतिहास की इस बड़ी त्रासदी की पूरी वास्तविकता जाने।
थवाईत ने कहा कि झीरम घाटी के शहीदों की स्मृति को सिर्फ श्रद्धांजलि तक सीमित नहीं रखा जा सकता। उनके बलिदान से जुड़े सवालों का जवाब सामने आना भी जरूरी है।
अब 10 अगस्त को होने वाली सुनवाई पर सभी की निगाहें हैं। यह सुनवाई मामले की आगे की दिशा को लेकर कितनी महत्वपूर्ण साबित होती है, इस पर प्रदेश के राजनीतिक और सामाजिक हलकों की नजर बनी हुई है।
















