प्रभात न्यूज़ 24:
गुरु पूर्णिमा पर शाश्वत स्कूल में गूंजा गुरु वंदन का स्वर, विद्यार्थियों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से जीता सभी का दिल
बलौदाबाजार।
भारतीय संस्कृति में गुरु को सर्वोच्च स्थान दिया गया है। गुरु केवल शिक्षा देने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि जीवन की दिशा दिखाने वाला मार्गदर्शक होता है। इसी महान गुरु-शिष्य परंपरा को सजीव रूप देने के उद्देश्य से बलौदाबाजार स्थित शाश्वत स्कूल में गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व अत्यंत श्रद्धा, उत्साह और गरिमामय वातावरण में मनाया गया। पूरे विद्यालय परिसर में आध्यात्मिक और सांस्कृतिक माहौल देखने को मिला। विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशेष बना दिया।
कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन एवं माँ सरस्वती की वंदना के साथ हुई। इसके बाद विद्यालय के विद्यार्थियों ने गुरु के प्रति सम्मान और भारतीय संस्कृति के आदर्शों पर आधारित अनेक रंगारंग प्रस्तुतियाँ दीं। छोटे बच्चों से लेकर वरिष्ठ कक्षाओं के विद्यार्थियों तक सभी ने अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन करते हुए उपस्थित लोगों की खूब सराहना बटोरी।
विद्यालय के नन्हे-मुन्ने विद्यार्थियों ने "गुरु गोविंद दोऊ खड़े" जैसे प्रसिद्ध भजन पर मनमोहक नृत्य प्रस्तुत कर सभी का मन मोह लिया। उनकी मासूम और भावपूर्ण प्रस्तुति ने कार्यक्रम में मौजूद अभिभावकों और अतिथियों को भावुक कर दिया। वहीं अन्य विद्यार्थियों ने गुरु के महत्व पर आधारित प्रेरक भाषण, कविता पाठ, समूह नृत्य, लघु नाटिका एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से यह संदेश दिया कि गुरु का स्थान जीवन में सदैव सर्वोच्च रहता है।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने अपने शिक्षकों के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए उन्हें तिलक लगाया, पुष्प अर्पित किए और चरण स्पर्श कर आशीर्वाद प्राप्त किया। कई विद्यार्थियों ने अपने हाथों से बनाए हुए आकर्षक शुभकामना कार्ड और धन्यवाद पत्र भी अपने प्रिय शिक्षकों को भेंट किए। इस भावपूर्ण पल ने गुरु और शिष्य के पवित्र संबंध को और अधिक मजबूत एवं भावनात्मक बना दिया।
विद्यालय के प्राचार्य एवं संचालक ने अपने प्रेरणादायी संबोधन में कहा कि गुरु केवल पाठ्य पुस्तकों का ज्ञान ही नहीं देते, बल्कि जीवन के हर कठिन मोड़ पर सही मार्ग चुनने की प्रेरणा भी देते हैं। उन्होंने कहा कि गुरु पूर्णिमा का पर्व हमें अपने शिक्षकों, माता-पिता और उन सभी व्यक्तियों के प्रति सम्मान व्यक्त करने की सीख देता है, जिन्होंने हमारे जीवन को बेहतर बनाने में योगदान दिया है। उन्होंने विद्यार्थियों से अनुशासन, संस्कार और निरंतर सीखने की भावना को अपने जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया।
विद्यालय के शिक्षकों ने भी विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करना नहीं, बल्कि एक जिम्मेदार, संवेदनशील और संस्कारित नागरिक बनना है। उन्होंने बच्चों से अपने जीवन में सदैव सत्य, ईमानदारी, परिश्रम और अनुशासन को अपनाने की अपील की।
पूरे कार्यक्रम के दौरान विद्यालय परिसर तालियों की गड़गड़ाहट और उत्साह से गूंजता रहा। अभिभावकों ने बच्चों की प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए विद्यालय द्वारा भारतीय संस्कृति और नैतिक मूल्यों के संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ-साथ उन्हें अपनी संस्कृति और परंपराओं से भी जोड़ते हैं।
कार्यक्रम के समापन पर सभी विद्यार्थियों एवं उपस्थित लोगों को प्रसाद वितरित किया गया।
विद्यालय परिवार ने इस अवसर को केवल एक उत्सव के रूप में नहीं, बल्कि गुरु के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के प्रेरणादायी अवसर के रूप में मनाया। आयोजन को सफल बनाने में विद्यालय के सभी शिक्षक-शिक्षिकाओं, कर्मचारियों तथा विद्यार्थियों का उल्लेखनीय योगदान रहा।
गुरु पूर्णिमा का यह आयोजन शिक्षा, संस्कार और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के सुंदर संगम के रूप में यादगार बन गया। विद्यालय प्रबंधन ने विश्वास व्यक्त किया कि भविष्य में भी ऐसे सांस्कृतिक एवं नैतिक मूल्यों से जुड़े कार्यक्रम आयोजित कर विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास की दिशा में निरंतर कार्य किया जाता रहेगा।













