प्रभात न्यूज़ 24:
बलौदाबाजार की जमीनी हकीकत बनाम नशामुक्ति का संकल्प
"मंच से नशामुक्ति की शपथ... लेकिन बलौदाबाजार की गलियों में आखिर कब रुकेगी शराब की बिक्री?"
संवाददाता- विजय शंकर तिवारी
बलौदाबाजार।
प्रधानमंत्री द्वारा "नशामुक्त युवा, विकसित भारत संकल्प अभियान" की शुरुआत के साथ पूरे देश में युवाओं को नशे से दूर रहने का संदेश दिया जा रहा है। लेकिन सवाल यह है कि क्या बलौदाबाजार जिले की जमीनी हकीकत भी इसी संदेश से मेल खाती है?
जिले के कई ग्रामीण क्षेत्रों से समय-समय पर अवैध शराब बिक्री की शिकायतें सामने आती रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई गांवों में शराब की उपलब्धता आसान होने के कारण युवा नशे की गिरफ्त में जा रहे हैं। यदि ऐसा है, तो नशामुक्ति अभियान के वास्तविक परिणाम कैसे दिखाई देंगे?
सबसे बड़ा सवाल... आखिर जिम्मेदार कौन?
जब मंचों से नशा छोड़ने की शपथ दिलाई जा रही है, तब क्या प्रशासन यह बता सकता है कि—
आखिर बलौदाबाजार जिले के कितने गांव पूरी तरह नशामुक्त घोषित किए गए हैं?
कितने गांवों में आज भी अवैध शराब की शिकायतें आती हैं?
कितने बड़े शराब कारोबारियों पर कठोर कार्रवाई हुई और कितनों को सजा मिली?
क्या केवल छोटे विक्रेताओं पर कार्रवाई कर बड़ी मछलियों को छोड़ दिया जाता है?
यदि लगातार कार्रवाई हो रही है, तो फिर बार-बार शराब बिक्री की शिकायतें क्यों सामने आती हैं?
क्या युवाओं का भविष्य खतरे में है?
स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले युवा रोजगार और खेल की ओर बढ़ते थे, लेकिन अब कुछ क्षेत्रों में नशे की समस्या चिंता का विषय बनती जा रही है। यदि युवाओं तक शराब की पहुंच आसान है, तो रोजगार, शिक्षा और कौशल विकास की योजनाओं का अपेक्षित लाभ कैसे मिलेगा?
सरकारी दुकानों पर भी उठ चुके हैं सवाल
बीते वर्षों में सोशल मीडिया पर सरकारी शराब दुकानों से जुड़े कथित अनियमितताओं के वीडियो और आरोप भी चर्चा का विषय बने। हर मामले की पुष्टि जांच का विषय होती है, लेकिन ऐसे मामलों ने व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल जरूर खड़े किए हैं।
आबकारी और पुलिस से जनता के तीखे सवाल
जनता जानना चाहती है—
क्या आबकारी विभाग के पास जिले के हर गांव की वास्तविक निगरानी व्यवस्था है?
अवैध शराब की सूचना मिलने के बाद कार्रवाई में कितना समय लगता है?
कितनी शिकायतें कार्रवाई तक पहुंचती हैं और कितनी फाइलों में दब जाती हैं?
क्या शिकायत करने वालों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाती है?
बार-बार एक ही क्षेत्रों से शिकायतें क्यों आती हैं?
क्या केवल अभियान काफी है?
नशामुक्ति अभियान निश्चित रूप से एक सकारात्मक पहल है। लेकिन यदि जमीनी स्तर पर अवैध शराब का कारोबार जारी रहता है, तो केवल शपथ और भाषणों से समस्या का समाधान संभव नहीं होगा। प्रभावी निगरानी, निष्पक्ष जांच, कानून का सख्त पालन और समुदाय की भागीदारी भी उतनी ही आवश्यक है।
जनता पूछ रही है...
यदि "नशामुक्त युवा" सरकार की प्राथमिकता है, तो बलौदाबाजार में शराब की उपलब्धता पर ठोस बदलाव कब दिखेगा?
क्या हर गांव में नियमित संयुक्त अभियान चलाया जाएगा?
क्या अवैध कारोबार के पीछे शामिल बड़े नेटवर्क तक कार्रवाई पहुंचेगी?
क्या युवाओं को नशे से बाहर निकालने के लिए पुनर्वास, खेल और रोजगार पर भी समान जोर दिया जाएगा?
निष्कर्ष
नशामुक्त भारत का सपना तभी साकार होगा जब अभियान के साथ-साथ जमीनी स्तर पर कानून का प्रभावी क्रियान्वयन भी दिखाई दे। जहां भी अवैध शराब बिक्री की शिकायतें हों, वहां निष्पक्ष जांच, पारदर्शी कार्रवाई और सार्वजनिक जवाबदेही जरूरी है। तभी बलौदाबाजार के युवा नशे से दूर रहकर वास्तव में विकसित भारत के निर्माण में अपनी भूमिका निभा सकेंगे।
संपादकीय टिप्पणी: यह लेख सार्वजनिक हित के मुद्दों पर प्रश्न उठाने और जवाबदेही की मांग करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसमें किसी व्यक्ति या संस्था के विरुद्ध अप्रमाणित आरोपों को तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया गया है। जहां भी शिकायतों या आरोपों का उल्लेख है, वे जांच और आधिकारिक पुष्टि के अधीन हैं।













