प्रभात न्यूज़ 24:
विशेष ग्रामसभा की कार्यवाही पर बड़ा विवाद: भारमुक्त सचिव पर शासन को गुमराह करने का आरोप, व्यक्तिगत हित में प्रस्ताव जोड़ने की शिकायत
सिमगा।
बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के सिमगा विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत हथबंद में विशेष ग्रामसभा की कार्यवाही को लेकर नया विवाद सामने आया है। पंचायत के पूर्व अतिरिक्त प्रभारी सचिव पर आरोप लगाया गया है कि अतिरिक्त प्रभार से भारमुक्त किए जाने के बाद भी उन्होंने अपने व्यक्तिगत हित से जुड़ा प्रस्ताव विशेष ग्रामसभा की कार्यवाही में जोड़कर उसे ग्रामसभा द्वारा पारित दर्शाने का प्रयास किया।
शिकायतकर्ताओं का दावा है कि इससे शासन एवं वरिष्ठ अधिकारियों को भ्रामक जानकारी भेजकर गुमराह करने का प्रयास किया गया है। मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की गई है।
पहले से विवादों में रहे हैं पूर्व अतिरिक्त प्रभारी सचिव
शिकायतकर्ताओं के अनुसार संबंधित पूर्व अतिरिक्त प्रभारी सचिव के विरुद्ध आर्थिक अनियमितता, पंचायत अभिलेखों में कथित हेराफेरी, महिला जनप्रतिनिधियों के साथ अपमानजनक व्यवहार तथा पंचायत कार्यवाही में मनमानी जैसे गंभीर आरोप पहले से लगाए जा चुके हैं। इन आरोपों की शिकायत कलेक्टर जनदर्शन में टोकन क्रमांक 2270126000656 के माध्यम से की गई थी। शिकायत के बाद संबंधित अधिकारी को ग्राम पंचायत के अतिरिक्त प्रभार से हटाते हुए 11 मई 2026 को भारमुक्त कर दिया गया था।
ग्रामीणों का कहना है कि भारमुक्त होने के बावजूद पंचायत के अभिलेखों और कार्यवाही से जुड़े मामलों में कथित हस्तक्षेप जारी रहा, जिससे विवाद और गहरा गया।
विशेष ग्रामसभा का उद्देश्य था केवल आवास योजना से संबंधित कार्यवाही
शिकायत के अनुसार 24 जून 2026 को प्रदेशभर की तरह ग्राम पंचायत हथबंद में भी विशेष ग्रामसभा आयोजित की गई थी। इस ग्रामसभा का निर्धारित उद्देश्य प्रधानमंत्री आवास योजना के पात्र एवं अपात्र हितग्राहियों का अनुमोदन, आवास प्लस सूची का वाचन तथा उससे संबंधित आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करना था।
बताया गया है कि ग्राम में विधिवत मुनादी कर ग्रामीणों को आमंत्रित किया गया। ग्राम रोजगार सहायक द्वारा आवास प्लस सूची का वाचन किया गया तथा उपस्थित ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों के समक्ष आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के बाद सभा समाप्त घोषित कर दी गई।
सभा समाप्त होने के बाद प्रस्ताव जोड़ने का आरोप
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि ग्रामसभा समाप्त होने के बाद कार्यवाही पुस्तिका में एक ऐसा प्रस्ताव दर्ज किया गया, जिसका संबंध संबंधित सचिव के व्यक्तिगत हित से था। आरोप है कि यह प्रस्ताव मुख्यालय परिवर्तन से जुड़ा था और इसे इस प्रकार दर्ज किया गया मानो ग्रामसभा ने सर्वसम्मति से पारित किया हो।
ग्रामीणों का कहना है कि ग्रामसभा के दौरान इस विषय पर कोई चर्चा नहीं हुई थी, न किसी सदस्य ने ऐसा प्रस्ताव रखा और न ही उपस्थित ग्रामीणों या पंचों से इसकी स्वीकृति ली गई।
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि बाद में कार्यवाही पुस्तिका में उक्त प्रस्ताव जोड़कर उसे आधिकारिक रूप देने का प्रयास किया गया, जिससे शासन के समक्ष गलत तथ्य प्रस्तुत हो सकें।
पंचों और ग्रामीणों को नहीं थी जानकारी
शिकायत में कहा गया है कि ग्रामसभा में उपस्थित अधिकांश पंचों एवं ग्रामीणों को इस कथित प्रस्ताव की कोई जानकारी नहीं थी। उनका कहना है कि यदि कोई प्रस्ताव वास्तव में ग्रामसभा में रखा जाता, तो उस पर चर्चा होती, आपत्तियां दर्ज होतीं और सर्वसम्मति अथवा बहुमत से निर्णय लिया जाता।
ग्रामीणों का आरोप है कि ऐसा कुछ भी नहीं हुआ और बाद में कार्यवाही में प्रस्ताव जोड़ दिया गया।
पहले भी लगे हैं कार्यवाही रजिस्टर में हेराफेरी के आरोप
शिकायतकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया है कि संबंधित पूर्व अतिरिक्त प्रभारी सचिव के विरुद्ध पहले से कई गंभीर शिकायतें लंबित हैं। इनमें पंचायत अभिलेख उपलब्ध नहीं कराना, कार्यवाही रजिस्टर में मनमाने ढंग से प्रस्ताव दर्ज करना, रजिस्टर में रिक्त स्थान छोड़कर बाद में प्रस्ताव जोड़ना तथा अभिलेखों में कथित रूप से परिवर्तन करना शामिल है।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि महिला पंचों पर बिना कार्यवाही पढ़े हस्ताक्षर करने का दबाव बनाया जाता था और मना करने पर उन्हें पद से हटवाने अथवा अन्य प्रकार की कार्रवाई की धमकी दी जाती थी। इन आरोपों की भी निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।
निष्पक्ष जांच की मांग
ग्रामीणों एवं शिकायतकर्ताओं ने जिला प्रशासन से मांग की है कि 24 जून 2026 की विशेष ग्रामसभा की मूल कार्यवाही पुस्तिका, प्रस्ताव पंजी, उपस्थिति पंजी तथा अन्य संबंधित अभिलेखों की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए। उनका कहना है कि यदि जांच में कार्यवाही में किसी प्रकार की हेराफेरी या गलत जानकारी दर्ज करने की पुष्टि होती है, तो संबंधित जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध पंचायत कानून एवं सेवा नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाए।
कानूनी पक्ष
पंचायती राज व्यवस्था के सामान्य सिद्धांतों के अनुसार ग्रामसभा का कोई भी प्रस्ताव तभी वैध माना जाता है, जब वह निर्धारित प्रक्रिया के तहत ग्रामसभा में प्रस्तुत किया गया हो, उस पर चर्चा हुई हो और सक्षम प्रक्रिया के अनुसार उसे स्वीकृति मिली हो। यदि किसी प्रस्ताव को ग्रामसभा की वास्तविक कार्यवाही के बिना बाद में जोड़ा गया हो या किसी व्यक्ति के निजी हित में उसे ग्रामसभा द्वारा पारित दर्शाया गया हो, तो उसकी वैधता पर प्रश्न उठ सकते हैं। ऐसे मामलों में अंतिम निर्णय सक्षम जांच और संबंधित प्राधिकरण द्वारा लागू कानूनों एवं उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर लिया जाता है।
प्रशासन की कार्रवाई पर रहेगी नजर
ग्राम पंचायत हथबंद से जुड़ा यह मामला अब प्रशासनिक जांच की मांग के साथ चर्चा का विषय बन गया है। यदि शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि होती है तो यह न केवल ग्रामसभा की पारदर्शिता बल्कि पंचायत प्रशासन की कार्यप्रणाली से जुड़े गंभीर प्रश्न भी खड़े करेगा। वहीं, जांच पूरी होने तक संबंधित पक्षों पर लगे आरोपों को आरोप मात्र माना जाएगा और अंतिम निष्कर्ष सक्षम प्राधिकारी की जांच एवं निर्णय के बाद ही सामने आएगा।













