प्रभात न्यूज़ 24:
आखिर किसके संरक्षण में चल रहा “प्राइवेट कार्रवाई” का खेल?
शिकायतों के बाद भी सक्रिय संदिग्ध टीम, विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल
बलौदाबाजार/लवन/कसडोल।
जिले में अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाई के नाम पर एक कथित “प्राइवेट नेटवर्क” के सक्रिय होने की चर्चाएं लगातार तेज होती जा रही हैं। क्षेत्र में दबी जुबान से लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर एक ऐसा व्यक्ति, जो विभाग का अधिकृत कर्मचारी तक नहीं बताया जाता, वह वर्षों से विभागीय गतिविधियों में किसके संरक्षण में सक्रिय बना हुआ है?
सूत्रों से मिल रही जानकारी के अनुसार, इस व्यक्ति के खिलाफ पूर्व में भी कई शिकायतें सामने आ चुकी हैं। इतना ही नहीं, एक समय ऐसा भी आया जब इस व्यक्ति ने कथित रूप से विभागीय अधिकारी की टोपी पहनकर स्वयं को अधिकारी जैसा प्रस्तुत करते हुए फोटो वायरल कर दी थी। उस दौरान तत्कालीन जिला प्रशासन ने उसे विभागीय गतिविधियों से हटाने के निर्देश दिए थे और कुछ समय तक वह दूर भी रहा, लेकिन बाद में फिर उसकी सक्रियता बढ़ती चली गई।
अब एक बार फिर क्षेत्र में उसकी गतिविधियों को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। बताया जा रहा है कि हाल ही में शिकायतों के बाद वर्तमान जिला प्रशासन स्तर से भी उसे हटाने की मौखिक बात सामने आई थी, जिसकी जानकारी मीडिया जगत तक पहुंची, लेकिन कुछ दिनों की खामोशी के बाद कथित गतिविधियां फिर उसी तरह शुरू होने की चर्चा क्षेत्र में फैलने लगी।
“टीम” बनाकर घूमने और समझौते कराने के आरोप
स्थानीय सूत्रों का दावा है कि यह व्यक्ति अकेले काम नहीं करता, बल्कि उसके साथ कुछ अन्य लोग भी सक्रिय रहते हैं। इनमें कुछ लोगों के बारे में अपराधिक प्रवृत्ति से जुड़े होने की चर्चाएं भी क्षेत्र में सुनाई देती हैं। आरोप यह भी लगाए जा रहे हैं कि यह कथित टीम गांव-गांव घूमकर अवैध शराब बेचने वालों की जानकारी जुटाती है, फिर मौके पर जाकर शराब खरीदने जैसी गतिविधियां करती है और बाद में कथित “साठगांठ” एवं दबाव की स्थिति बनती है।
बलौदाबाजार, लवन और कसडोल क्षेत्र में ऐसी गतिविधियों की चर्चाओं ने आम लोगों के बीच भय और असमंजस का माहौल पैदा कर दिया है। लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि यदि कोई व्यक्ति अधिकृत कर्मचारी नहीं है, तो आखिर वह किस अधिकार से कार्रवाई जैसी गतिविधियों में शामिल हो रहा है?
नियमों के विपरीत “प्राइवेट दखल” ?
जानकारों के अनुसार किसी भी विभागीय कार्रवाई में निजी व्यक्तियों की सीधी संलिप्तता नियमों के विरुद्ध मानी जाती है। ऐसे में यदि कथित रूप से कोई निजी टीम विभागीय कार्रवाई की शैली में क्षेत्र में सक्रिय है, तो यह गंभीर प्रशासनिक विषय बन सकता है।
मीडिया जगत से जुड़े लोगों द्वारा भी संबंधित अधिकारियों तक मौखिक रूप से यह मामला पहुंचाए जाने की चर्चा है, लेकिन अब तक किसी ठोस सार्वजनिक कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई है। यही वजह है कि विभागीय कार्यप्रणाली और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर सवाल खड़े होने लगे हैं।
आखिर किसका संरक्षण?
क्षेत्र में सबसे बड़ा सवाल यही गूंज रहा है कि आखिर किस अधिकारी या प्रभावशाली संरक्षण के दम पर यह कथित नेटवर्क वर्षों से सक्रिय बना हुआ है?
यदि शिकायतें हुईं, जांच की बातें हुईं, हटाने के आदेश भी चर्चा में आए, तो फिर दोबारा वही गतिविधियां कैसे शुरू हो गईं?
लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो इससे प्रशासन की साख पर भी सवाल उठ सकते हैं।
जिला प्रशासन से बड़ी कार्रवाई की मांग
क्षेत्रीय नागरिकों और सामाजिक लोगों ने जिला कलेक्टर एवं वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों से मांग की है कि—
पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए
विभागीय गतिविधियों में शामिल सभी निजी लोगों की भूमिका स्पष्ट की जाए
यदि कोई अवैध संरक्षण मिल रहा है तो जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कार्रवाई हो
आम जनता को भयमुक्त वातावरण उपलब्ध कराया जाए
जनता से अपील
यदि किसी भी क्षेत्र में संदिग्ध तरीके से कार्रवाई करने वाले निजी लोग दिखाई दें, या कोई व्यक्ति स्वयं को अधिकारी बताकर दबाव बनाता नजर आए, तो नागरिक सतर्क रहें। किसी भी प्रकार की स्थिति में सीधे पुलिस एवं प्रशासन को सूचना दें तथा सुरक्षित दूरी बनाकर तथ्यात्मक फोटो या वीडियो संबंधित एजेंसियों तक पहुंचाएं।
यह मामला केवल अवैध गतिविधियों का नहीं, बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता और कानून व्यवस्था पर उठते गंभीर सवालों का भी है। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस पूरे प्रकरण को कितनी गंभीरता से लेकर आगे क्या कदम उठाता है।
















