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तिल्दा–सुनसुनिया में अवैध रेत खनन का खेल जारी, प्रशासन की कार्रवाई पर उठ रहे सवाल महानदी का दोहन जारी, राजस्व घाटा बढ़ा—जनता पूछ रही, कब थमेगा रेत माफिया का आतंक

क्राइम 19 February 2026 (253)

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प्रभात न्यूज़ 24: 

तिल्दा–सुनसुनिया में अवैध रेत खनन का खेल जारी, प्रशासन की कार्रवाई पर उठ रहे सवाल

महानदी का दोहन जारी, राजस्व घाटा बढ़ा—जनता पूछ रही, कब थमेगा रेत माफिया का आतंक



तिल्दा/सुनसुनिया। 

तिल्दा और सुनसुनिया क्षेत्र में अवैध रेत खनन और परिवहन का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। हाल ही में इस मुद्दे पर प्रमुखता से खबर प्रकाशित होने के बाद पुलिस थाना लवन और खनिज विभाग ने कार्रवाई जरूर की थी, लेकिन वह कार्रवाई इतनी प्रभावी साबित नहीं हुई कि रेत माफियाओं के मन में कानून का भय पैदा हो सके। परिणामस्वरूप, महज दो दिन के भीतर ही अवैध खनन से जुड़े तत्व फिर से सक्रिय हो गए और पहले की तरह खुलेआम रेत का उत्खनन व परिवहन शुरू हो गया।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कोई नई समस्या नहीं है। वर्षों से इस क्षेत्र में अवैध रेत खनन का कारोबार चलता आ रहा है, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर ठोस और स्थायी कार्रवाई का अभाव साफ दिखाई देता है। हर बार कार्रवाई की खबरें सामने आती हैं, लेकिन कुछ दिनों बाद ही हालात जस के तस हो जाते हैं।



प्रशासनिक निष्क्रियता पर उठ रहे सवाल

तहसील स्तर पर जिम्मेदारी संभाल रहे अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। क्षेत्र में खुलेआम अवैध रेत परिवहन के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से यह चर्चा आम हो गई है कि प्रशासनिक मशीनरी पूरी तरह सक्रिय नहीं है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि तहसीलदार स्तर से लेकर राजस्व विभाग तक की सुस्ती के कारण ही यह अवैध कारोबार फल-फूल रहा है, जिससे सरकार को भारी राजस्व हानि उठानी पड़ रही है।



महानदी का लगातार हो रहा दोहन

इस अवैध खनन का सबसे बड़ा असर पर्यावरण पर पड़ रहा है। महानदी से लगातार रेत निकाले जाने के कारण नदी का प्राकृतिक संतुलन बिगड़ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि अत्यधिक खनन से नदी की गहराई असंतुलित हो जाती है, जिससे तटों का कटाव, जल स्तर में परिवर्तन और भविष्य में गंभीर पर्यावरणीय संकट उत्पन्न हो सकता है। कुछ सर्वेक्षणों में यह भी संकेत मिले हैं कि नदी का डेल्टा धीरे-धीरे नीचे की ओर खिसक रहा है, जो आने वाले समय में बड़े खतरे का कारण बन सकता है।



थाना के सामने से गुजरते हैं रेत से भरे ट्रैक्टर

चौंकाने वाली बात यह है कि लवन क्षेत्र से रेत से भरे कई ट्रैक्टर प्रतिदिन थाना परिसर के सामने से ही गुजरते हैं। इसके बावजूद निरंतर कार्रवाई का अभाव लोगों को हैरान कर रहा है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि पुलिस और प्रशासन चाहें तो इस अवैध कारोबार को कुछ ही दिनों में बंद कराया जा सकता है, लेकिन अभी तक ऐसी कोई ठोस पहल नजर नहीं आई है।



राजस्व को करोड़ों का नुकसान

अवैध खनन के कारण शासन को हर महीने लाखों से लेकर करोड़ों रुपये तक का नुकसान हो रहा है। यह वह राजस्व है जो सरकारी योजनाओं, सड़कों, स्कूलों और स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च किया जा सकता था। लेकिन अवैध खनन के कारण यह पैसा माफियाओं की जेब में जा रहा है।



जनता में बढ़ रही नाराजगी

लगातार खबरें प्रकाशित होने और शिकायतें किए जाने के बावजूद यदि हालात में सुधार नहीं होता, तो यह प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। आम जनता के मन में यह सवाल उठ रहा है कि आखिर इस अवैध कारोबार पर रोक कब लगेगी और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई कब होगी।



स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जल्द ही कठोर और निरंतर कार्रवाई नहीं हुई, तो यह समस्या और विकराल रूप ले सकती है। जनता अब प्रशासन से ठोस और स्थायी समाधान की उम्मीद कर रही है।



(इस मामले में जैसे-जैसे नई जानकारी सामने आएगी, खबर के माध्यम से जनता तक पहुंचाई जाती रहेगी।)

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