प्रभात न्यूज़ 24:
राज्योत्सव में वन्यजीव छायाकार हेमंत वर्मा का सम्मान, प्रकृति संरक्षण के क्षेत्र में जिले का बढ़ाया गौरव
देवपुर वन परिक्षेत्र में दुर्लभ ‘मालाबार जायंट स्क्विरल’ की उपस्थिति को कैमरे में कैद कर वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित करने वाले हेमंत वर्मा को जिला प्रशासन ने किया सम्मानित; 200 से अधिक युवाओं को बना चुके हैं प्रकृति प्रहरी
बलौदाबाजार।
छत्तीसगढ़ राज्योत्सव के गौरवशाली अवसर पर जिले में पर्यावरण संरक्षण, वन्यजीवों के प्रति जागरूकता और पक्षी संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले प्रसिद्ध वन्यजीव छायाकार एवं पर्यावरण संरक्षक हेमंत वर्मा को जिला प्रशासन द्वारा सम्मानित किया गया। यह सम्मान उनके वर्षों के प्रकृति प्रेम, वन्यजीवों के संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों तथा छत्तीसगढ़ की जैव विविधता को पहचान दिलाने में निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिका का प्रतिफल माना जा रहा है।
हेमंत वर्मा की पहचान केवल एक वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर के रूप में ही नहीं, बल्कि ऐसे प्रकृति प्रेमी के रूप में भी है, जिन्होंने अपने कैमरे को वन्यजीवों की सुंदरता दिखाने के साथ-साथ उनके संरक्षण और प्राकृतिक विरासत के प्रति समाज को जागरूक करने का माध्यम बनाया है। विशेष रूप से देवपुर वन परिक्षेत्र में अत्यंत दुर्लभ मानी जाने वाली ‘मालाबार जायंट स्क्विरल’ (विशाल भारतीय गिलहरी) की उपस्थिति को कैमरे में कैद कर वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित करने के उनके प्रयास ने वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में उन्हें एक अलग पहचान दिलाई है।
दुर्लभ मालाबार जायंट स्क्विरल की खोज ने बढ़ाई देवपुर और बारनवापारा की पहचान
हेमंत वर्मा के उल्लेखनीय कार्यों में देवपुर वन परिक्षेत्र में मालाबार जायंट स्क्विरल की उपस्थिति का दस्तावेजीकरण विशेष महत्व रखता है। यह विशालकाय वृक्षवासी गिलहरी अपनी विशिष्ट बनावट, आकर्षक रंगों और प्राकृतिक आवास के कारण वन्यजीव प्रेमियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र है।
देवपुर समर कैंप के दौरान इस दुर्लभ वन्यजीव को कैमरे में कैद करना और उसके प्रमाणिक दस्तावेज तैयार करना क्षेत्र की जैव विविधता के लिहाज से महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में सामने आया। इस प्रयास से बारनवापारा और देवपुर के वन क्षेत्रों में मौजूद समृद्ध प्राकृतिक संपदा तथा वन्यजीवों की विविधता की ओर लोगों का ध्यान आकर्षित हुआ।
इस उपलब्धि का महत्व केवल एक दुर्लभ जीव की तस्वीर प्राप्त करने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इससे वन क्षेत्रों के संरक्षण, जैव विविधता के अध्ययन और प्रकृति आधारित पर्यटन की संभावनाओं को भी नई दिशा मिली। वन्यजीवों की मौजूदगी का प्रमाणिक दस्तावेजीकरण किसी भी क्षेत्र के पारिस्थितिकी तंत्र को समझने और उसके संरक्षण की योजनाएं तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
CG-PSC की समसामयिकी में भी मिली इस उपलब्धि को जगह
हेमंत वर्मा द्वारा कैमरे में कैद की गई मालाबार जायंट स्क्विरल की उपस्थिति और उससे जुड़ी जानकारी ने शैक्षणिक एवं प्रतियोगी परीक्षा के क्षेत्र में भी अपनी पहचान बनाई। प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस उपलब्धि से संबंधित विषय को छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) की समसामयिकी में स्थान मिला।
यह अपने आप में इस बात का उदाहरण है कि स्थानीय स्तर पर प्रकृति और पर्यावरण के क्षेत्र में किए गए प्रयास किस तरह राज्य स्तर पर सामान्य ज्ञान, पर्यावरण अध्ययन और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण विषय बन सकते हैं।
इसके अतिरिक्त छत्तीसगढ़ व्यावसायिक परीक्षा मंडल (CG Vyapam) द्वारा आयोजित हाईकोर्ट डाटा एंट्री ऑपरेटर (DEO) भर्ती परीक्षा में भी मालाबार जायंट स्क्विरल से संबंधित प्रश्न पूछे जाने की जानकारी सामने आई है।
इस तरह देवपुर के जंगलों में कैमरे के माध्यम से दर्ज की गई एक दुर्लभ वन्यजीव की उपस्थिति ने जिले की प्राकृतिक पहचान को व्यापक स्तर पर चर्चा का विषय बनाया।
पेशे से साइबर सिक्योरिटी रिस्क ऑडिटर, जुनून प्रकृति और वन्यजीव संरक्षण
हेमंत वर्मा पेशे से साइबर सिक्योरिटी रिस्क ऑडिटर हैं, लेकिन प्रकृति, पक्षियों और वन्यजीवों के प्रति उनका लगाव उन्हें एक अलग पहचान देता है। व्यस्त पेशेवर जीवन के बावजूद वे समय निकालकर जंगलों, प्राकृतिक क्षेत्रों और पक्षियों के आवासों तक पहुंचते हैं तथा अपने कैमरे के माध्यम से प्रकृति की अनदेखी दुनिया को सामने लाने का प्रयास करते हैं।
उनका मानना है कि वन्यजीव संरक्षण केवल वन विभाग या पर्यावरण से जुड़े विशेषज्ञों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें समाज के प्रत्येक नागरिक की भागीदारी आवश्यक है। जब तक आम नागरिक प्रकृति और उसके महत्व को नहीं समझेंगे, तब तक संरक्षण के प्रयासों को व्यापक जनसमर्थन मिलना कठिन है।
इसी सोच के साथ उन्होंने बर्डिंग ट्रेल्स, प्रकृति भ्रमण और ग्रामीण संवाद जैसे माध्यमों से युवाओं को पर्यावरण के प्रति जागरूक करने का कार्य किया है।
200 से अधिक युवाओं को बनाया ‘प्रकृति प्रहरी’
हेमंत वर्मा के प्रयासों की एक बड़ी विशेषता यह है कि उन्होंने अपने ज्ञान और अनुभव को केवल व्यक्तिगत फोटोग्राफी तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने बर्डिंग और प्रकृति जागरूकता गतिविधियों के माध्यम से 200 से अधिक युवाओं को प्रकृति संरक्षण के प्रति प्रेरित कर ‘प्रकृति प्रहरी’ के रूप में तैयार करने का प्रयास किया है।
इन गतिविधियों के दौरान युवाओं को पक्षियों की पहचान, उनके प्राकृतिक आवास, उनके व्यवहार और पर्यावरणीय संतुलन में उनकी भूमिका के बारे में जानकारी दी जाती है।
ग्रामीण क्षेत्रों में संवाद के माध्यम से लोगों को यह समझाने का प्रयास भी किया जाता है कि पेड़-पौधे, जलस्रोत, जंगल और वन्यजीव एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। इनमें से किसी एक घटक को नुकसान पहुंचने पर पूरे पारिस्थितिकी तंत्र पर प्रभाव पड़ता है।
आज के समय में जब जंगलों के आसपास मानवीय गतिविधियां बढ़ रही हैं और कई प्रजातियों के प्राकृतिक आवास प्रभावित हो रहे हैं, ऐसे में युवाओं को प्रकृति संरक्षण से जोड़ना भविष्य के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
बर्डिंग और वाइल्डलाइफ फोटोग्राफी को बनाया जनजागरूकता का माध्यम
पक्षियों की दुनिया अपने आप में प्रकृति के संतुलन की एक महत्वपूर्ण कड़ी है। पक्षी बीजों के प्रसार, कीट नियंत्रण और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। इसके बावजूद आमतौर पर पक्षियों की कई प्रजातियां और उनके प्राकृतिक आवास लोगों की नजरों से दूर रह जाते हैं।
हेमंत वर्मा बर्डिंग के माध्यम से लोगों को पक्षियों की विविधता से परिचित कराने के साथ-साथ उनके संरक्षण की आवश्यकता पर भी जोर देते रहे हैं।
उनकी वन्यजीव फोटोग्राफी का उद्देश्य केवल सुंदर तस्वीरें लेना नहीं, बल्कि प्रकृति के उन पहलुओं को समाज के सामने लाना है, जिन पर सामान्यतः कम चर्चा होती है। कैमरे में कैद किए गए दुर्लभ पक्षियों और वन्यजीवों के चित्र लोगों में जिज्ञासा पैदा करते हैं और उन्हें प्राकृतिक विरासत के प्रति संवेदनशील बनाते हैं।
इको-टूरिज्म की संभावनाओं को भी मिल सकती है नई दिशा
बारनवापारा वन क्षेत्र और देवपुर का प्राकृतिक परिवेश छत्तीसगढ़ की महत्वपूर्ण वन संपदा का हिस्सा है। यहां की जैव विविधता, वन्यजीवों की मौजूदगी और प्राकृतिक सुंदरता प्रकृति प्रेमियों तथा वन्यजीव फोटोग्राफरों के लिए विशेष आकर्षण रखती है।
मालाबार जायंट स्क्विरल जैसे दुर्लभ वन्यजीव का प्रमाणिक दस्तावेजीकरण इस क्षेत्र की प्राकृतिक विशेषताओं को सामने लाने में सहायक साबित हो सकता है।
यदि वन्यजीव संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए जिम्मेदार इको-टूरिज्म को प्रोत्साहित किया जाए, तो इससे स्थानीय ग्रामीणों के लिए रोजगार और आजीविका के नए अवसर भी विकसित हो सकते हैं। हालांकि इसके लिए वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास की सुरक्षा, पर्यटकों के लिए उचित दिशा-निर्देश और पर्यावरण के अनुकूल पर्यटन व्यवस्था सुनिश्चित करना आवश्यक होगा।
जिले के नागरिकों और पर्यावरण प्रेमियों ने जताई खुशी
जिला प्रशासन द्वारा राज्योत्सव के अवसर पर हेमंत वर्मा को सम्मानित किए जाने पर जिले के पर्यावरण प्रेमियों, प्रकृति से जुड़े लोगों और नागरिकों ने प्रसन्नता व्यक्त की है। लोगों का कहना है कि ऐसे सम्मान उन व्यक्तियों का उत्साह बढ़ाते हैं, जो बिना किसी बड़े प्रचार के अपने स्तर पर समाज, पर्यावरण और प्राकृतिक विरासत के लिए निरंतर काम कर रहे हैं।
हेमंत वर्मा का सम्मान केवल एक व्यक्ति की उपलब्धि नहीं, बल्कि उन सभी युवाओं और प्रकृति प्रेमियों के प्रयासों की भी सराहना है, जो पक्षियों, वन्यजीवों और जंगलों के संरक्षण के लिए आगे आ रहे हैं।
सम्मान से बढ़ी जिम्मेदारी, प्रकृति संरक्षण का संदेश
छत्तीसगढ़ राज्योत्सव के अवसर पर मिला यह सम्मान हेमंत वर्मा के लिए निश्चित रूप से गौरव का विषय है। साथ ही यह संदेश भी देता है कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने वाले कार्यों को पहचान और प्रोत्साहन मिलना आवश्यक है।
देवपुर के जंगलों में दुर्लभ मालाबार जायंट स्क्विरल की उपस्थिति को कैमरे में दर्ज करने से लेकर 200 से अधिक युवाओं को प्रकृति संरक्षण के प्रति प्रेरित करने तक उनका सफर यह दर्शाता है कि व्यक्तिगत रुचि और समर्पण से भी पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया जा सकता है।
आज आवश्यकता इस बात की है कि आने वाली पीढ़ियों को केवल विकास की अवधारणा से ही नहीं, बल्कि प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर आगे बढ़ने की सीख भी दी जाए। जंगल, वन्यजीव और पक्षी हमारी प्राकृतिक विरासत हैं। इनका संरक्षण करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
राज्योत्सव में हेमंत वर्मा को मिला सम्मान इसी जिम्मेदारी और प्रकृति के प्रति समर्पण को मिली एक सार्थक पहचान के रूप में देखा जा रहा है।





















