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शाश्वत स्कूल में विधिक जागरूकता शिविर: बच्चों को बताया पॉक्सो एक्ट का महत्व, गुड टच-बैड टच और आपातकालीन हेल्पलाइन की दी जानकारी सुरक्षित बचपन हर बच्चे का अधिकार, बच्चों को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक और निडर बनाना हम सभी की जिम्मेदारी

देश / दुनिया 30 October 2026 (29)

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प्रभात न्यूज़ 24: 

शाश्वत स्कूल में विधिक जागरूकता शिविर: बच्चों को बताया पॉक्सो एक्ट का महत्व, गुड टच-बैड टच और आपातकालीन हेल्पलाइन की दी जानकारी


सुरक्षित बचपन हर बच्चे का अधिकार, बच्चों को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक और निडर बनाना हम सभी की जिम्मेदारी



बलौदाबाजार। 

बच्चों को उनके कानूनी अधिकारों, सुरक्षा और संरक्षण के प्रति जागरूक करने तथा उन्हें किसी भी विपरीत परिस्थिति में बिना भय के अपनी बात रखने के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण बलौदाबाजार-भाटापारा के मार्गदर्शन में स्थानीय शाश्वत स्कूल में विशेष विधिक साक्षरता एवं जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में विद्यार्थियों को बाल अधिकारों की सुरक्षा, लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम (पॉक्सो एक्ट), गुड टच-बैड टच, बाल संरक्षण कानून और आपातकालीन सहायता सेवाओं के संबंध में विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई।



कार्यक्रम में जिले के माननीय न्यायाधीश महोदय विशेष रूप से उपस्थित रहे। उनकी गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशेष महत्व प्रदान किया। उन्होंने विद्यार्थियों के साथ संवाद करते हुए उन्हें जीवन में जागरूक, सतर्क, आत्मविश्वासी और जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए प्रेरित किया। इस अवसर पर बच्चों को यह समझाया गया कि शिक्षा का उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान प्राप्त करना ही नहीं, बल्कि अपने अधिकारों, कर्तव्यों और सामाजिक जिम्मेदारियों को समझना भी है।



पॉक्सो एक्ट की जानकारी देकर बच्चों को समझाए उनके कानूनी अधिकार

शिविर के दौरान बच्चों को पॉक्सो एक्ट (Protection of Children from Sexual Offences Act) के बारे में सरल भाषा में जानकारी दी गई। उन्हें बताया गया कि बच्चों को यौन अपराधों से सुरक्षा प्रदान करने के लिए यह महत्वपूर्ण कानून बनाया गया है। कानून के अंतर्गत 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों को विशेष संरक्षण प्राप्त है।

बच्चों को बताया गया कि यदि कोई व्यक्ति उनके साथ गलत व्यवहार करता है, अनुचित स्पर्श करता है अथवा किसी भी प्रकार से उन्हें डराने, धमकाने या गलत गतिविधि में शामिल करने का प्रयास करता है, तो ऐसी स्थिति में चुप रहना आवश्यक नहीं है। उन्हें अपने माता-पिता, अभिभावकों, शिक्षकों अथवा पुलिस को तत्काल इसकी जानकारी देनी चाहिए।

उन्हें यह भी समझाया गया कि किसी भी गलत व्यवहार के लिए बच्चा जिम्मेदार नहीं होता। बच्चों की सुरक्षा और सम्मान सर्वोपरि है तथा कानून उनकी सहायता और संरक्षण के लिए मौजूद है।



गुड टच और बैड टच की जानकारी से बच्चों को किया जागरूक

कार्यक्रम का सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील विषय गुड टच एवं बैड टच रहा। बच्चों को उनकी उम्र और समझ के अनुरूप सहज तरीके से बताया गया कि कौन-सा स्पर्श उन्हें सुरक्षित और सहज महसूस कराता है तथा किस प्रकार का स्पर्श असहज, अनुचित या डर पैदा करने वाला हो सकता है।

बच्चों को बताया गया कि उनके शरीर पर उनका अधिकार है। यदि किसी व्यक्ति का व्यवहार या स्पर्श उन्हें अच्छा नहीं लगता अथवा वे किसी परिस्थिति में असुरक्षित महसूस करते हैं, तो उन्हें स्पष्ट रूप से मना करने, वहां से दूर जाने और किसी भरोसेमंद बड़े व्यक्ति को बताने का पूरा अधिकार है।

उन्हें यह भी समझाया गया कि गलत व्यवहार करने वाला व्यक्ति परिचित भी हो सकता है और अपरिचित भी। इसलिए केवल किसी व्यक्ति के परिचित होने के आधार पर उस पर आंख बंद करके भरोसा नहीं करना चाहिए।



बच्चों को यह संदेश दिया गया कि यदि उनके साथ कोई अनुचित घटना होती है, तो डरने, शर्मिंदा होने या खुद को दोषी मानने की जरूरत नहीं है। बिना किसी संकोच के अपनी बात अभिभावकों, शिक्षकों या संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाना चाहिए।



आपातकालीन परिस्थितियों में 1098 और 112 की दी जानकारी

विधिक जागरूकता शिविर में बच्चों को आपातकालीन परिस्थितियों में सहायता प्राप्त करने के लिए उपलब्ध महत्वपूर्ण हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी भी दी गई।

विद्यार्थियों को विशेष रूप से निम्नलिखित सेवाओं के बारे में बताया गया:

1098 – चाइल्ड हेल्पलाइन: संकटग्रस्त एवं जरूरतमंद बच्चों की सहायता और संरक्षण के लिए।

112 – आपातकालीन सहायता: पुलिस एवं अन्य आपातकालीन सेवाओं के लिए एकीकृत आपातकालीन नंबर।

बच्चों को समझाया गया कि किसी भी संकटपूर्ण परिस्थिति में घबराने के बजाय सही समय पर सहायता मांगना बेहद जरूरी है। आपातकालीन नंबरों की जानकारी रखना और जरूरत पड़ने पर उनका सही उपयोग करना कई बार बड़ी परेशानी से बचा सकता है।



न्यायाधीश महोदय ने बच्चों से किया संवाद, निडर होकर आवाज उठाने की दी प्रेरणा

कार्यक्रम के दौरान माननीय न्यायाधीश महोदय ने विद्यार्थियों से संवाद स्थापित कर उनकी जिज्ञासाओं और सवालों को समझा। उन्होंने बच्चों को जीवन में आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने तथा किसी भी गलत परिस्थिति का सामना होने पर बिना भय के अपनी बात रखने के लिए प्रेरित किया।

उन्होंने अपने संदेश में कहा कि सुरक्षित बचपन प्रत्येक बच्चे का मौलिक अधिकार है। बच्चों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना केवल परिवार की ही नहीं, बल्कि समाज और प्रशासन की भी सामूहिक जिम्मेदारी है। इसके लिए बच्चों के साथ-साथ अभिभावकों, शिक्षकों और समाज के प्रत्येक जिम्मेदार व्यक्ति को जागरूक रहने की आवश्यकता है।

उन्होंने बच्चों को यह भी प्रेरित किया कि वे अपने आसपास होने वाली घटनाओं के प्रति सजग रहें और किसी भी बच्चे को परेशानी में देखकर उसकी सहायता के लिए उचित व्यक्ति तक बात पहुंचाएं।



बच्चों की सुरक्षा के लिए अभिभावकों और शिक्षकों की भूमिका भी महत्वपूर्ण

शिविर के माध्यम से यह संदेश भी सामने आया कि बच्चों की सुरक्षा केवल कानून और प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें परिवार, विद्यालय और समाज की भूमिका भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

बच्चों के व्यवहार में होने वाले असामान्य बदलावों को समझना, उनकी बातों को गंभीरता से सुनना और उनके साथ विश्वासपूर्ण संवाद बनाए रखना जरूरी है। अभिभावकों को चाहिए कि वे बच्चों के मन में ऐसा विश्वास विकसित करें कि वे अपनी हर परेशानी बिना डर और संकोच के उनके साथ साझा कर सकें।

इसी प्रकार शिक्षकों की जिम्मेदारी भी है कि विद्यालय में बच्चों के लिए सुरक्षित, सहयोगात्मक और संवेदनशील वातावरण बनाया जाए, जहां प्रत्येक विद्यार्थी स्वयं को सम्मानित और सुरक्षित महसूस करे।



शाश्वत स्कूल प्रबंधन ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के प्रयासों को सराहा

शाश्वत स्कूल में आयोजित इस विधिक जागरूकता शिविर को विद्यार्थियों के लिए उपयोगी और ज्ञानवर्धक पहल के रूप में देखा गया। विद्यालय प्रबंधन, शिक्षकों और विद्यार्थियों ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण बलौदाबाजार-भाटापारा के इस प्रयास की सराहना की।

इस प्रकार के कार्यक्रम बच्चों को कम उम्र से ही अपने कानूनी अधिकारों और व्यक्तिगत सुरक्षा के प्रति जागरूक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। साथ ही उनमें आत्मविश्वास, सामाजिक समझ और जिम्मेदार नागरिक बनने की भावना भी विकसित करते हैं।

जागरूकता ही सुरक्षित बचपन की सबसे मजबूत नींव

आज के समय में बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ कानूनी जानकारी और व्यक्तिगत सुरक्षा के प्रति जागरूक बनाना बेहद आवश्यक है। पॉक्सो एक्ट जैसे कानूनों की जानकारी, गुड टच-बैड टच की समझ और आपातकालीन सहायता सेवाओं के बारे में जानकारी बच्चों को कठिन परिस्थितियों में सही निर्णय लेने का साहस प्रदान करती है।

शाश्वत स्कूल में आयोजित यह विधिक जागरूकता शिविर इसी दिशा में एक सराहनीय पहल रहा। ऐसे आयोजन निरंतर होते रहने चाहिए, ताकि प्रत्येक बच्चा अपने अधिकारों को समझ सके, गलत के खिलाफ आवाज उठा सके और भयमुक्त वातावरण में अपने भविष्य का निर्माण कर सके।



संदेश स्पष्ट है—बच्चों की सुरक्षा केवल एक कानून का विषय नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। सुरक्षित बचपन ही सुरक्षित और सशक्त समाज की आधारशिला है।



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