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नौ नाबालिग छात्राओं के साथ उत्पीड़न के मामले में शिक्षक को कड़ी सजा, विशेष पॉक्सो न्यायालय ने सुनाया फैसला विशेष लोक अभियोजक निशा शर्मा की प्रभावी पैरवी से आरोपी शिक्षक को मिली सजा, 28 गवाहों के बयान बने अभियोजन का आधार

क्राइम 31 October 2026 (49)

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प्रभात न्यूज़ 24: 

नौ नाबालिग छात्राओं के साथ उत्पीड़न के मामले में शिक्षक को कड़ी सजा, विशेष पॉक्सो न्यायालय ने सुनाया फैसला


विशेष लोक अभियोजक निशा शर्मा की प्रभावी पैरवी से आरोपी शिक्षक को मिली सजा, 28 गवाहों के बयान बने अभियोजन का आधार


बलौदाबाजार। 

शिक्षा के मंदिर कहे जाने वाले विद्यालय में नाबालिग छात्राओं के साथ दुर्व्यवहार और उत्पीड़न के गंभीर मामले में बलौदाबाजार की विशेष पॉक्सो अदालत ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए आरोपी शिक्षक को कठोर कारावास एवं अर्थदंड से दंडित किया है। यह मामला थाना पलारी क्षेत्र के शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला टीपावन का है, जहां पदस्थ प्रभारी प्राचार्य तिलक राम वर्मा पर विद्यालय की नौ नाबालिग छात्राओं के साथ अनुचित व्यवहार और उत्पीड़न करने का आरोप था। 



न्यायालय में विचारण के दौरान अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर आरोपी के विरुद्ध अपराध प्रमाणित पाया गया।



इस मामले में विशेष लोक अभियोजक निशा शर्मा ने प्रभावी ढंग से अभियोजन पक्ष की पैरवी की। मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों, पीड़ित छात्राओं के कथनों और अन्य गवाहों के बयानों का परीक्षण करने के बाद आरोपी को दोषसिद्ध ठहराते हुए सजा सुनाई।



पिता का हाल-चाल पूछने के बहाने छात्रा को स्टाफ रूम में बुलाया

प्रकरण के अनुसार, आरोपी तिलक राम वर्मा शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला टीपावन में प्रभारी प्राचार्य के पद पर पदस्थ था। 



आरोप के मुताबिक, आरोपी शिक्षक ने एक नाबालिग छात्रा को उसके पिता का हाल-चाल पूछने के बहाने अपने स्टाफ रूम में बुलाया। बातचीत के दौरान उसने छात्रा के साथ अनुचित व्यवहार करते हुए उसकी पीठ और कमर पर हाथ फेरा तथा उसके सीने को छूने की हरकत की।

अचानक हुई इस घटना से छात्रा घबरा गई और डर के कारण वहां से भाग निकली। उस समय भय और संकोच के चलते छात्रा ने तत्काल किसी को घटना की जानकारी नहीं दी।



गुड टच-बैड टच की जानकारी मिलने पर सामने आया पूरा मामला

इस पूरे प्रकरण में विद्यालय की एक शिक्षिका की महत्वपूर्ण भूमिका सामने आई। शिक्षिका द्वारा स्कूल में छात्राओं को गुड टच और बैड टच के बारे में जागरूक किया जा रहा था। इसी दौरान उन्होंने बच्चों से पूछा कि क्या कभी किसी ने उनके साथ इस तरह का अनुचित व्यवहार किया है।



शिक्षिका की इस पहल के बाद पीड़ित छात्रा ने हिम्मत जुटाकर अपने साथ हुई घटना की जानकारी दी। उसने अपनी शिक्षिका और मां को आरोपी शिक्षक की हरकतों के बारे में बताया।

इसके बाद जब अन्य छात्राओं से भी बातचीत की गई तो उन्होंने भी आरोपी शिक्षक द्वारा उनके साथ इसी तरह की अनुचित हरकत किए जाने की जानकारी दी। इस प्रकार विद्यालय की नौ नाबालिग छात्राओं से जुड़े गंभीर मामले का खुलासा हुआ।



घटना की जानकारी सामने आने के बाद पुलिस के समक्ष शिकायत दर्ज कराई गई और मामले की विधिसम्मत जांच शुरू की गई।



पॉक्सो सहित विभिन्न धाराओं में दर्ज हुआ अपराध

मामले की गंभीरता को देखते हुए थाना पलारी में आरोपी शिक्षक के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), पॉक्सो अधिनियम तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया।

प्रकरण में धारा 74, 75(1) बीएनएस, पॉक्सो अधिनियम की धारा 8 एवं 9(f) तथा एससी/एसटी अधिनियम की धारा 3(2)(v)(क) के तहत प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना की गई। 



विवेचना पूरी होने के बाद अभियोग पत्र माननीय न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया।

विशेष पॉक्सो न्यायालय में हुआ मामले का विचारण

इस गंभीर मामले का विचारण बलौदाबाजार के विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो) श्री गिर्जेश प्रताप सिंह के न्यायालय में किया गया।

न्यायालय में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने मामले से संबंधित साक्ष्य प्रस्तुत किए। 



अभियोजन की ओर से कुल 28 साक्षियों के कथन कराए गए। गवाहों के बयानों, पीड़ित छात्राओं से संबंधित साक्ष्यों और प्रकरण में प्रस्तुत अन्य तथ्यों के आधार पर न्यायालय ने मामले की सुनवाई की।

अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक निशा शर्मा ने प्रभावी पैरवी करते हुए न्यायालय के समक्ष अपना पक्ष रखा। सुनवाई और साक्ष्यों के परीक्षण के बाद न्यायालय ने आरोपी शिक्षक के विरुद्ध आरोप प्रमाणित पाए।



न्यायालय ने सुनाई सश्रम कारावास की सजा

न्यायालय ने आरोपी तिलक राम वर्मा को दोषसिद्ध ठहराते हुए भारतीय न्याय संहिता की धारा 74 एवं 75(1) के तहत दो वर्ष के सश्रम कारावास तथा पॉक्सो अधिनियम की धारा 9(f) के तहत छह वर्ष के सश्रम कारावास एवं जुर्माने से दंडित किया।



इस फैसले को नाबालिग बच्चियों की सुरक्षा और विद्यालयों में सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।



शिक्षा के मंदिर में बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि

विद्यालय को शिक्षा का मंदिर कहा जाता है। यहां बच्चे अपने भविष्य को संवारने, ज्ञान प्राप्त करने और बेहतर नागरिक बनने के उद्देश्य से आते हैं। शिक्षक को बच्चों के लिए मार्गदर्शक, संरक्षक और प्रेरणास्रोत माना जाता है। ऐसे में यदि विद्यालय जैसे सुरक्षित माने जाने वाले स्थान पर ही बच्चों के साथ अनुचित व्यवहार की घटनाएं सामने आती हैं, तो यह समाज और शिक्षा व्यवस्था दोनों के लिए गंभीर चिंता का विषय है।



इस मामले में छात्राओं द्वारा हिम्मत जुटाकर अपनी बात सामने रखना और शिक्षिका द्वारा गुड टच-बैड टच के प्रति जागरूकता फैलाना विशेष रूप से महत्वपूर्ण रहा। इससे यह संदेश मिलता है कि बच्चों को छोटी उम्र से ही अच्छे और बुरे स्पर्श के बारे में जानकारी देना तथा उन्हें बिना किसी डर के अपनी परेशानी बताने के लिए प्रोत्साहित करना कितना आवश्यक है।



अभिभावकों और शिक्षकों के लिए भी महत्वपूर्ण संदेश

इस घटना से अभिभावकों, शिक्षकों और विद्यालय प्रबंधन के लिए भी कई महत्वपूर्ण संदेश सामने आते हैं। बच्चों के व्यवहार में अचानक बदलाव, किसी व्यक्ति से असामान्य डर, स्कूल जाने में हिचकिचाहट या किसी घटना को लेकर असहजता जैसे संकेतों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।



बच्चों को यह विश्वास दिलाना जरूरी है कि यदि कोई उनके साथ अनुचित व्यवहार करता है तो वे बिना डर और संकोच के अपने माता-पिता, शिक्षकों या भरोसेमंद व्यक्ति को इसकी जानकारी दे सकते हैं।



विद्यालयों में नियमित रूप से बाल सुरक्षा, गुड टच-बैड टच और पॉक्सो कानून के संबंध में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाने चाहिए, ताकि बच्चे अपने अधिकारों और सुरक्षा के प्रति जागरूक हो सकें।



न्यायालय का फैसला समाज के लिए महत्वपूर्ण संदेश

नाबालिग छात्राओं से जुड़े इस गंभीर प्रकरण में न्यायालय द्वारा सुनाया गया फैसला यह संदेश देता है कि बच्चों की सुरक्षा के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं है। विद्यालयों में बच्चों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना केवल विद्यालय प्रबंधन की ही नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।



विशेष लोक अभियोजक निशा शर्मा की प्रभावी पैरवी और अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत 28 गवाहों के कथनों के आधार पर मामले में दोषसिद्धि होना न्यायिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण पक्ष रहा।



यह मामला समाज को यह सोचने के लिए मजबूर करता है कि बच्चों की सुरक्षा केवल कानून बनाने से सुनिश्चित नहीं होगी, बल्कि उन्हें जागरूक करने, उनकी बात सुनने और किसी भी अनुचित व्यवहार के विरुद्ध समय पर आवाज उठाने से ही सुरक्षित भविष्य का निर्माण संभव है।



संदेश स्पष्ट है—बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि है और शिक्षा के मंदिर में उनकी गरिमा एवं सम्मान की रक्षा करना हम सभी का दायित्व है।



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