प्रभात न्यूज़ 24:
नेता के भेष में आरोपी! जुए के फड़ से लेकर जिलाबदर तक विवादों में रहा विमल अजय, कसडोल गिरफ्तारी ने फिर खोली पुरानी फाइल
कांग्रेस शासनकाल में भी हो चुकी है जिलाबदर की कार्रवाई, जुआ कांड में मौके से निकलने के बाद 5 नवंबर को गिरफ्तारी; पुलिस कार्रवाई और पुराने रिकॉर्ड को लेकर क्षेत्र में तेज हुई चर्चा
कसडोल।
राजनीति का चोला पहन लेने से कानून की जवाबदेही खत्म नहीं हो जाती। कसडोल के जुआ कांड में कांग्रेस नेता विमल अजय की गिरफ्तारी ने एक बार फिर उनके पुराने विवादों और कथित आपराधिक गतिविधियों को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। कांग्रेस शासनकाल में भी विमल अजय के खिलाफ जिलाबदर की कार्रवाई किए जाने की खबर सामने आ चुकी है। अब जुआ खेलने के मामले में उनका नाम सामने आने और गिरफ्तारी के बाद सवाल उठ रहे हैं कि आखिर राजनीतिक पहचान की आड़ में कानून से बचने की कोशिश कितनी देर तक चल सकती है?
मामला बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के कसडोल थाना क्षेत्र के ग्राम हथौद स्थित ग्वालिन नाला के पास का है। जानकारी के अनुसार, 4 नवंबर 2026 को दोपहर करीब 2:20 बजे पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि कुछ लोग रुपये-पैसों का दांव लगाकर कटपत्ती जुआ खेल रहे हैं। सूचना पर पुलिस टीम ने मौके पर दबिश देकर घेराबंदी की। पुलिस को देखकर कुछ लोग भाग निकले, जबकि कुछ व्यक्तियों को मौके से पकड़ा गया। इस कार्रवाई के दौरान विमल अजय के मौके से निकल जाने की जानकारी सामने आई। हालांकि, बाद में 5 नवंबर को उनकी गिरफ्तारी की गई और उनके विरुद्ध प्रतिबंधात्मक कार्रवाई किए जाने की बात सामने आई है।
जुए के फड़ से गिरफ्तारी तक, 21 हजार से अधिक की रकम जब्त
पुलिस कार्रवाई के प्रकाशित विवरण के अनुसार, इस मामले में अपराध क्रमांक 423/2026 दर्ज किया गया। कार्रवाई में गगन यादव (27), मुकेश यादव (22), दोनों निवासी बाजार चौक कसडोल तथा नवीन साहू निवासी सिंघारी सहित अन्य लोगों के नाम सामने आए। मौके से 21,020 रुपये नकद और ताश के पत्ते जब्त किए जाने का उल्लेख है। प्रकरण में छत्तीसगढ़ जुआ प्रतिषेध अधिनियम, 2022 की धारा 3(2) के तहत कार्रवाई की गई।
कांग्रेस शासनकाल में भी हो चुकी है जिलाबदर की कार्रवाई
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे महत्वपूर्ण पहलू विमल अजय का पुराना रिकॉर्ड है। अप्रैल 2024 में कांग्रेस शासनकाल के दौरान भी उनके खिलाफ जिलाबदर की कार्रवाई किए जाने की खबर प्रकाशित हुई थी। ऐसे में मौजूदा जुआ प्रकरण में उनका नाम सामने आना और गिरफ्तारी होना कई पुराने सवालों को फिर से सामने ला रहा है। आखिर पहले जिलाबदर की कार्रवाई तक पहुंचने वाली परिस्थितियां क्या थीं और उसके बाद भी विवादों में नाम आने की वजह क्या है? यह जांच और प्रशासनिक रिकॉर्ड से स्पष्ट होने वाला विषय है।
70 सदस्यीय टीम की चर्चा, बड़े जुआ फड़ पर कार्रवाई को लेकर सवाल
कसडोल क्षेत्र में बड़े पैमाने पर जुआ फड़ संचालित होने और स्थानीय स्तर पर पहले प्रभावी कार्रवाई नहीं होने के आरोप भी सामने आए हैं। चर्चा है कि पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर विशेष रणनीति बनाकर कार्रवाई की गई और करीब 70 सदस्यीय पुलिस टीम गठित की गई थी। हालांकि, टीम की वास्तविक संख्या, गठन और इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि होना अभी शेष है।
आखिर कब तक राजनीतिक पहचान बनेगी ढाल?
इस पूरे मामले ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या किसी राजनीतिक दल से जुड़ाव रखने वाले व्यक्ति को कानून के दायरे में सामान्य नागरिक की तरह जवाबदेह नहीं होना चाहिए? यदि किसी व्यक्ति के खिलाफ पहले जिलाबदर जैसी कार्रवाई हो चुकी है और अब उसका नाम जुआ प्रकरण में सामने आया है, तो उसके पुराने और वर्तमान मामलों की निष्पक्ष जांच जरूरी है।
फिलहाल कसडोल में इस गिरफ्तारी को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। पुलिस की कार्रवाई के बाद अब लोगों की नजर इस बात पर है कि मामले की जांच कहां तक पहुंचती है और क्या कथित बड़े जुआ नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आएगी।
प्रभात न्यूज़ 24 का सवाल: कानून सबके लिए बराबर है, फिर चाहे व्यक्ति आम नागरिक हो या किसी राजनीतिक दल का नेता। कसडोल में जुए के कारोबार से जुड़े आरोपों और पुराने जिलाबदर प्रकरण की पूरी सच्चाई सामने आनी चाहिए। प्रशासन को तथ्यों के आधार पर निष्पक्ष जांच करानी चाहिए, ताकि कानून का राज कायम रहे।
नोट: इस समाचार में उल्लिखित आरोपों एवं पूर्व कार्रवाई संबंधी विवरणों को उपलब्ध जानकारी और प्रकाशित समाचारों के आधार पर प्रस्तुत किया गया है। किसी भी व्यक्ति को दोषी ठहराने का आशय नहीं है। संबंधित पक्ष का स्पष्टीकरण प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

















