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हथबंद शराब दुकान में खुलेआम ओवररेटिंग, शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं — ग्रामीणों में आक्रोश

क्राइम 06 March 2026 (306)

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प्रभात न्यूज़ 24: 

हथबंद शराब दुकान में खुलेआम ओवररेटिंग, शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं — ग्रामीणों में आक्रोश



बलौदाबाजार।

जिले के ग्राम हथबंद स्थित शासकीय शराब दुकान में निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत पर शराब बिक्री किए जाने का गंभीर मामला सामने आया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि दुकान में खुलेआम ओवररेटिंग की जा रही है और शिकायत के बावजूद अब तक प्रशासन द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। इस पूरे मामले को लेकर क्षेत्र में असंतोष का माहौल बनता जा रहा है तथा ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई करने की मांग की है।



एक माह पहले शुरू हुई दुकान, तभी से अनियमितताओं के आरोप

ग्रामीणों के अनुसार ग्राम हथबंद में स्थित यह शासकीय शराब दुकान लगभग एक माह पूर्व महात्मा गांधी की पुण्यतिथि के दिन प्रारंभ की गई थी। दुकान खुलने के कुछ ही दिनों बाद से यहां देसी और अंग्रेजी शराब को निर्धारित दर से अधिक कीमत पर बेचे जाने की शिकायतें सामने आने लगीं। स्थानीय लोगों का कहना है कि शराब की हर श्रेणी में ग्राहकों से अतिरिक्त राशि वसूली जा रही है।




पौवा, बोतल और बियर पर अलग-अलग ओवररेटिंग

ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि दुकान में शराब की हर यूनिट पर अतिरिक्त पैसा लिया जा रहा है।

बताया जा रहा है कि देसी शराब के पौवा पर लगभग ₹10, बोतल पर ₹50 और बियर पर करीब ₹20 तक अधिक राशि वसूली जा रही है। इससे शराब खरीदने वाले उपभोक्ताओं को सीधे आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। कई ग्राहकों का कहना है कि जब वे एमआरपी के अनुसार भुगतान करने की बात करते हैं तो दुकान के कर्मचारी बहाने बनाते हुए अतिरिक्त राशि देने के लिए दबाव डालते हैं।



विरोध करने पर धमकी और मारपीट की नौबत

ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि जब ग्राहक अधिक कीमत देने का विरोध करते हैं, तो शराब दुकान के कर्मचारी आक्रामक व्यवहार करने लगते हैं। कुछ लोगों का कहना है कि दुकान में मौजूद कर्मचारियों के साथ कुछ ऐसे लोग भी रहते हैं जिन्हें स्थानीय लोग “गुर्गे” बताते हैं।

आरोप है कि विरोध करने वालों को डराने-धमकाने के साथ मारपीट तक की स्थिति बना दी जाती है, जिससे अधिकांश लोग विवाद से बचने के लिए मजबूरी में अधिक कीमत देकर शराब खरीदने को विवश हो जाते हैं।



कोचियों को अवैध बिक्री का भी आरोप

मामले को लेकर ग्रामीणों ने एक और गंभीर आरोप लगाया है। उनका कहना है कि दुकान से खुलेआम कोचियों (अवैध शराब बेचने वालों) को बड़ी मात्रा में शराब बेची जा रही है। इसके बाद आसपास के गांवों में इन्हीं कोचियों द्वारा शराब का परिवहन और अवैध बिक्री की जा रही है।



ग्रामीणों का कहना है कि यदि इस पर समय रहते रोक नहीं लगाई गई तो क्षेत्र में अवैध शराब का जाल और अधिक फैल सकता है, जिससे सामाजिक और कानून-व्यवस्था से जुड़ी समस्याएं उत्पन्न होने की आशंका है।



पहले भी हो चुकी है लिखित शिकायत

इस पूरे मामले को लेकर ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष भानुप्रताप वर्मा द्वारा पूर्व में उच्च अधिकारियों को लिखित शिकायत दी गई थी। शिकायत में शराब दुकान में ओवररेटिंग और अवैध बिक्री की जानकारी देते हुए कार्रवाई की मांग की गई थी।



हालांकि शिकायत के बाद भी अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। लोगों का कहना है कि यदि समय पर जांच कर कार्रवाई की जाती तो यह स्थिति नहीं बनती।



राजनीतिक संरक्षण और विभागीय उदासीनता के आरोप

ग्रामीणों का आरोप है कि शराब दुकान में हो रही अनियमितताओं के पीछे किसी न किसी प्रकार का राजनीतिक संरक्षण हो सकता है। उनका कहना है कि आबकारी विभाग और स्थानीय पुलिस की अनदेखी के कारण यह अवैध वसूली लगातार जारी है।



ग्रामीणों का यह भी कहना है कि यदि संबंधित विभाग नियमित निगरानी और जांच करता तो इस तरह की शिकायतें सामने नहीं आतीं।



प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है। उनका कहना है कि सरकारी दुकान में यदि निर्धारित मूल्य से अधिक राशि वसूली की जाती है तो यह सीधे-सीधे उपभोक्ताओं के अधिकारों का उल्लंघन है और इससे शासन की छवि भी खराब होती है।



क्या कहते हैं आबकारी अधिकारी

इस संबंध में आबकारी विभाग के ए.डी.ओ. जलेश कुमार सिंह से संपर्क करने पर उन्होंने बताया कि इस संबंध में आवेदन प्राप्त हुआ है। उन्होंने कहा कि शिकायत की जांच कराई जाएगी और यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।



अब सबकी नजर प्रशासन की कार्रवाई पर

हथबंद शराब दुकान में ओवररेटिंग और अवैध बिक्री के आरोप सामने आने के बाद अब लोगों की नजर प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द ही प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई तो वे इस मामले को लेकर व्यापक आंदोलन करने पर भी विचार कर सकते हैं।

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