प्रभात न्यूज़ 24:
आत्मानंद स्कूल का मुख्य द्वार टूटकर गिरा, 7 वर्षीय बालक की दर्दनाक मौत
आत्मानंद स्कूल का मुख्य द्वार टूटकर गिरा, 7 वर्षीय बालक की दर्दनाक मौत
हथबंद में दर्दनाक हादसे से मचा हड़कंप, एसडीएम ने किया घटनास्थल का निरीक्षण; जांच के बाद एफआईआर के निर्देश, कलेक्टर ने दी 50 हजार रुपये की सहायता
हथबंद।
ग्राम हथबंद स्थित स्वामी आत्मानंद शासकीय विद्यालय में एक दर्दनाक हादसे ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विद्यालय के प्रमुख द्वार में लगा भारी गेट अचानक टूटकर एक 7 वर्षीय बालक के ऊपर जा गिरा। हादसे में बालक की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई, वहीं ग्रामीणों और पालकों में विद्यालय परिसर में बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता और नाराजगी देखी जा रही है।
मृतक बालक की पहचान शिवम यादव, पिता नन्ही यादव, निवासी रतनपुर, जिला बिलासपुर के रूप में बताई गई है। जानकारी के अनुसार शिवम तीज पर्व के अवसर पर हथबंद में अपनी बड़ी मां के घर आया हुआ था। इसी दौरान वह विद्यालय के मुख्य द्वार के पास पहुंचा और अचानक गेट टूटकर उसके ऊपर गिर गया। अचानक हुए इस हादसे में मासूम गंभीर रूप से घायल हो गया और उसकी जान चली गई।
अचानक भरभराकर गिरा स्कूल का मुख्य गेट
प्रत्यक्ष रूप से सामने आई जानकारी के अनुसार विद्यालय के प्रमुख द्वार पर लगाया गया गेट अचानक अपने सहारे से अलग होकर नीचे गिर गया। बताया जा रहा है कि गेट जिस कॉलम अथवा आधार संरचना पर टिका हुआ था, उसकी स्थिति पहले से खराब थी।
ग्रामीणों का कहना है कि मुख्य द्वार के कॉलम में लंबे समय से खराबी दिखाई दे रही थी और करीब तीन महीने से इसकी स्थिति ठीक नहीं थी। ग्रामीणों के आरोप के अनुसार समय रहते इसकी मरम्मत अथवा आवश्यक सुधार कार्य नहीं कराया गया।
हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। हादसे के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए संबंधित अधिकारियों द्वारा स्थल निरीक्षण और आवश्यक जांच की जा रही है।
ग्रामीणों ने उठाए रखरखाव व्यवस्था पर सवाल
घटना के बाद ग्रामीणों ने विद्यालय भवन और परिसर में मौजूद अन्य संरचनाओं की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि मुख्य द्वार का गेट अपनी मजबूती खो चुका था और पर्याप्त तरीके से सुरक्षित नहीं था।
कुछ ग्रामीणों के अनुसार गेट का ऊपरी और निचला हिस्सा अपनी पकड़ खो चुका था तथा वह बेहद कमजोर स्थिति में खड़ा था। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि यदि समय रहते खराब हिस्से की मरम्मत करा दी जाती तो संभवतः इस तरह की दुर्घटना को टाला जा सकता था।
इन आरोपों की वास्तविकता और जिम्मेदारी किसकी थी, यह जांच का विषय है। लेकिन इस घटना ने स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा के लिए नियमित निरीक्षण और समय पर रखरखाव की आवश्यकता को जरूर सामने ला दिया है।
घटना की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचे एसडीएम
दुर्घटना की जानकारी मिलते ही एसडीएम सिमगा अतुल शेट्ठे तत्काल घटनास्थल पर पहुंचे। उन्होंने विद्यालय परिसर का निरीक्षण किया और घटना से संबंधित जानकारी अधिकारियों एवं मौजूद लोगों से ली।
एसडीएम ने मामले को गंभीरता से लेते हुए घटना की जांच के निर्देश दिए। जानकारी के अनुसार उन्होंने जांच के बाद आवश्यक कानूनी कार्रवाई करते हुए एफआईआर दर्ज करने के निर्देश भी दिए हैं।
प्रशासन की ओर से हादसे के कारणों और जिम्मेदारी से जुड़े प्रत्येक पहलू की जांच किए जाने की बात कही गई है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि हादसा किन परिस्थितियों में हुआ और इसके लिए किसी स्तर पर लापरवाही हुई थी या नहीं।
मासूम की मौत से परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
सात वर्षीय शिवम की मौत की खबर सामने आते ही परिवार में मातम पसर गया। जिस बच्चे के लिए तीज पर्व पर रिश्तेदारों के घर आने का अवसर खुशी का होना था, वही पल परिवार के लिए जीवनभर का दुख बन गया।
एक मासूम की अचानक हुई मौत ने स्थानीय लोगों को भी झकझोर कर रख दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल जैसे स्थान पर जहां बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए, वहां किसी भी ऐसी संरचना को कमजोर हालत में नहीं छोड़ा जाना चाहिए जिससे बच्चों की जान को खतरा हो।
शाला प्रबंधन की ओर से 20 हजार रुपये की सहायता
हादसे के बाद शाला प्रबंधन की ओर से मृतक परिवार को प्रारंभिक सहायता के तौर पर 20 हजार रुपये दिए जाने की जानकारी सामने आई है।
वहीं घटना की गंभीरता को देखते हुए भाजपा जिला अध्यक्ष आनंद यादव ने जिला कलेक्टर से चर्चा कर मृतक परिवार को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने का आग्रह किया। इसके बाद बलौदाबाजार-भाटापारा जिला कलेक्टर द्वारा तत्काल 50 हजार रुपये की सहायता राशि स्वीकृत की गई।
बताया गया कि एसडीएम सिमगा अतुल शेट्ठे ने स्वास्थ्य केंद्र पहुंचकर मृतक बालक के परिजनों को सहायता राशि प्रदान की।
आर्थिक सहायता परिवार के दुख को समाप्त नहीं कर सकती, लेकिन प्रशासन की ओर से संकट की घड़ी में परिवार को तत्काल मदद उपलब्ध कराने की पहल की गई है।
शाला विकास समिति से जुड़े खर्च को लेकर भी सवाल
हादसे के बाद ग्रामीणों ने विद्यालय में रखरखाव और शाला विकास से संबंधित व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि शाला विकास समिति द्वारा प्रत्येक विद्यार्थी से सालाना 600 रुपये लिए जाते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि विद्यालय के रखरखाव एवं आवश्यक कार्यों के लिए राशि उपलब्ध है, तो विद्यालय के प्रमुख द्वार जैसी महत्वपूर्ण संरचना की समय रहते मरम्मत क्यों नहीं कराई गई?
हालांकि इस संबंध में विद्यालय प्रबंधन अथवा संबंधित विभाग का विस्तृत आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है। राशि किस मद में प्राप्त होती है, उसका उपयोग किस प्रकार किया जाता है और मुख्य द्वार की मरम्मत के लिए पूर्व में कोई प्रस्ताव अथवा शिकायत की गई थी या नहीं—इन सभी बिंदुओं की जांच आवश्यक होगी।
बच्चों की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर भी उठे सवाल
घटना के बाद पालकों और ग्रामीणों ने विद्यालय में बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी चिंता व्यक्त की है। स्कूल परिसर में प्रवेश द्वार, दीवार, गेट, भवन, विद्युत व्यवस्था तथा अन्य संरचनाओं का समय-समय पर निरीक्षण किया जाता है या नहीं, इस पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
पालकों का कहना है कि विद्यालय में पढ़ने वाले छोटे बच्चों की सुरक्षा केवल शिक्षण व्यवस्था तक सीमित नहीं है। स्कूल भवन और परिसर की प्रत्येक संरचना सुरक्षित होना भी उतना ही आवश्यक है।
विशेषकर भारी लोहे के गेट, पुराने कॉलम, दीवार, छज्जे अथवा अन्य निर्माण कार्यों की समय-समय पर तकनीकी जांच जरूरी है, ताकि किसी संभावित दुर्घटना से पहले ही खतरे को पहचाना जा सके।
जनपद सदस्य प्रतिनिधि ने की कड़ी कार्रवाई की मांग
घटना को लेकर जनपद सदस्य प्रतिनिधि ऋषिकांत पटेल ने भी शाला प्रबंधन की जवाबदेही तय करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि हादसे की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यदि जांच में किसी व्यक्ति अथवा संस्था की लापरवाही सामने आती है तो उसके विरुद्ध नियमानुसार एफआईआर दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।
उनका कहना है कि किसी भी विद्यालय में बच्चों की सुरक्षा के साथ समझौता नहीं किया जा सकता। भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो, इसके लिए विद्यालय परिसर की सभी जर्जर एवं कमजोर संरचनाओं का निरीक्षण कराया जाना चाहिए।
निष्पक्ष जांच से सामने आएगा हादसे का वास्तविक कारण
इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू अब जांच का है। क्या मुख्य द्वार का कॉलम पहले से क्षतिग्रस्त था? क्या इसकी जानकारी विद्यालय प्रबंधन अथवा संबंधित विभाग को थी? क्या पूर्व में इसकी मरम्मत के लिए कोई शिकायत या प्रस्ताव दिया गया था? क्या गेट की तकनीकी स्थिति का कभी निरीक्षण किया गया था? और यदि संरचना कमजोर थी तो उसे सुरक्षित करने के लिए समय पर कदम क्यों नहीं उठाया गया?
इन सभी सवालों के जवाब जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगे।
प्रशासन द्वारा एफआईआर के निर्देश दिए जाने के बाद अब पुलिस और संबंधित विभाग की जांच पर लोगों की नजर रहेगी। ग्रामीणों की मांग है कि जांच केवल कागजी प्रक्रिया तक सीमित न रहे, बल्कि जिम्मेदारी तय होने तक पूरे मामले की निष्पक्षता से पड़ताल की जाए।
घटना ने स्कूलों की सुरक्षा ऑडिट की जरूरत बताई
हथबंद की यह घटना केवल एक विद्यालय तक सीमित सवाल नहीं खड़ा करती, बल्कि जिले के सभी सरकारी और निजी विद्यालयों में सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की जरूरत को भी सामने लाती है।
स्कूलों में प्रतिदिन बड़ी संख्या में बच्चे पहुंचते हैं। ऐसे में मुख्य द्वार, भवन, बाउंड्रीवाल, छज्जे, सीढ़ियां, विद्युत वायरिंग, पेयजल व्यवस्था और खेल मैदान सहित प्रत्येक हिस्से की सुरक्षा जांच समय-समय पर होना जरूरी है।
विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी कमजोर संरचना को केवल इसलिए नहीं छोड़ा जाना चाहिए कि वह अभी तक दुर्घटना का कारण नहीं बनी है। संभावित खतरे की पहचान कर समय रहते सुधार करना ही वास्तविक सुरक्षा व्यवस्था है।
अब सबसे बड़ा सवाल—क्या समय रहते खतरे को पहचाना गया था?
हथबंद के इस हादसे ने एक मासूम की जान ले ली। अब लोगों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि मुख्य द्वार की संरचना वास्तव में लंबे समय से कमजोर थी, तो उसे सुरक्षित करने के लिए समय रहते कदम क्यों नहीं उठाए गए?
यह सवाल जांच के माध्यम से स्पष्ट होना चाहिए। यदि किसी स्तर पर लापरवाही प्रमाणित होती है तो जिम्मेदारी तय होना आवश्यक है, ताकि भविष्य में किसी अन्य परिवार को ऐसी त्रासदी का सामना न करना पड़े।
फिलहाल प्रशासनिक स्तर पर जांच और कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। हादसे में जान गंवाने वाले मासूम शिवम के परिवार के प्रति क्षेत्रवासियों ने गहरी संवेदना व्यक्त की है और साथ ही विद्यालयों में बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की मांग उठाई है।
अस्वीकरण: इस समाचार में ग्रामीणों एवं संबंधित लोगों द्वारा लगाए गए आरोपों को आरोप के रूप में प्रस्तुत किया गया है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना शेष है। किसी व्यक्ति या संस्था को दोषी ठहराने का उद्देश्य नहीं है। घटना के वास्तविक कारण और जिम्मेदारी जांच के निष्कर्षों के बाद ही स्पष्ट होगी। समाचार का उद्देश्य जनहित, बाल सुरक्षा और विद्यालयों में सुरक्षित वातावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।














