प्रभात न्यूज़ 24:
हथबंध में उद्योगों की मनमानी से जनता त्रस्त
धूल-धक्कड़, भारी वाहनों और प्रदूषण ने बिगाड़ा जनजीवन, ग्रामीणों में बढ़ता आक्रोश
बलौदाबाजार/हथबंध।
औद्योगिक विकास के नाम पर स्थापित बड़े-बड़े संयंत्र अब क्षेत्रवासियों के लिए परेशानी और बीमारी का कारण बनते जा रहे हैं। ग्राम हथबंध एवं आसपास लगभग तीन किलोमीटर के दायरे में संचालित आधा दर्जन से अधिक औद्योगिक संयंत्रों की गतिविधियों से आम जनता का जीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। भारी वाहनों की लगातार आवाजाही, कोयला और क्लिंकर की उड़ती धूल, सड़कों की बदहाल स्थिति तथा चिमनियों से निकलते धुएं ने पूरे क्षेत्र का वातावरण दूषित कर दिया है।
ग्रामीणों और व्यापारियों का आरोप है कि उद्योग प्रबंधन केवल अपने उत्पादन और मुनाफे पर ध्यान दे रहे हैं, जबकि स्थानीय नागरिकों के स्वास्थ्य, सुरक्षा और सुविधा की पूरी तरह अनदेखी की जा रही है।
क्षेत्र का प्रमुख व्यावसायिक केंद्र माने जाने वाला हथबंध तिगड्डा चौक इन दिनों सबसे अधिक प्रभावित नजर आ रहा है। यहां दिन-रात भारी ट्रेलर और हाइवा वाहन गुजरते रहते हैं। रिंगनी साइडिंग से लगातार कोयला, क्लिंकर और अन्य औद्योगिक सामग्री लेकर निकलने वाली बड़ी गाड़ियों के कारण सड़क पर धूल की मोटी परत जम गई है। तेज रफ्तार वाहनों के गुजरने से यह धूल हवा में उड़कर दुकानों, घरों और खाने-पीने की वस्तुओं तक पहुंच रही है।
स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि चौक क्षेत्र में होटल, भोजनालय, चाय दुकान, फल-सब्जी दुकान और डेली नीड्स की अनेक दुकानें संचालित होती हैं, लेकिन अब ग्राहकों का बैठना तक मुश्किल हो गया है। दुकानदारों के अनुसार सुबह दुकान साफ करने के कुछ ही देर बाद सामानों पर फिर से काली धूल जम जाती है। खाने-पीने की वस्तुएं प्रदूषित हो रही हैं, जिससे ग्राहकों की संख्या कम होने लगी है। कई व्यापारियों ने बताया कि धूल और धुएं के कारण आंखों में जलन, सांस लेने में तकलीफ और एलर्जी जैसी समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि उद्योग प्रबंधन द्वारा प्रदूषण नियंत्रण के नाम पर केवल औपचारिकताएं निभाई जा रही हैं। सड़क पर नियमित पानी का छिड़काव नहीं कराया जाता, जबकि भारी वाहनों की वजह से सबसे अधिक धूल गांव और बाजार क्षेत्र में फैलती है। सड़क किनारे जमा कोयला और क्लिंकर की बारीक परत हवा के साथ उड़कर पूरे वातावरण को प्रदूषित कर रही है। लोगों का कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ।
स्कूली बच्चों और राहगीरों की स्थिति भी चिंताजनक बनी हुई है। सुबह और दोपहर स्कूल आने-जाने के समय भारी वाहनों की तेज रफ्तार से दुर्घटना का खतरा लगातार बना रहता है। अभिभावकों का कहना है कि बच्चों को सड़क पार कराने में डर लगता है, क्योंकि चौक क्षेत्र में ट्रकों और हाइवा वाहनों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। कई बार छोटे वाहन चालक और पैदल चलने वाले लोग धूल और धुएं के कारण सड़क पर स्पष्ट रूप से देख भी नहीं पाते।
स्थानीय नागरिकों ने यह भी आरोप लगाया कि उद्योगों के कारण क्षेत्र की सड़कें तेजी से खराब हो रही हैं। भारी वाहनों के अत्यधिक दबाव से सड़क जगह-जगह उखड़ चुकी है, जिससे आम लोगों को आवागमन में परेशानी हो रही है। बरसात के मौसम में यही सड़कें कीचड़ और गड्ढों में बदल जाती हैं, जबकि गर्मी में धूल का गुबार पूरे इलाके को ढंक देता है।
ग्रामीणों और व्यापारियों का कहना है कि उद्योगों से क्षेत्र को अपेक्षित लाभ नहीं मिल रहा। रोजगार के बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन स्थानीय लोगों को सीमित अवसर मिलते हैं, जबकि प्रदूषण और अव्यवस्था का खामियाजा पूरे गांव को भुगतना पड़ रहा है। लोगों का आरोप है कि उद्योगों की वजह से खेती-किसानी भी प्रभावित हो रही है। खेतों और पेड़-पौधों पर धूल की परत जमने से फसलों की गुणवत्ता पर असर पड़ रहा है।
क्षेत्रवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि भारी वाहनों के संचालन के लिए समय निर्धारित किया जाए, बाजार और आबादी क्षेत्र में नियमित पानी छिड़काव सुनिश्चित कराया जाए तथा प्रदूषण फैलाने वाले संयंत्रों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले दिनों में आंदोलन की स्थिति बन सकती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि उद्योगों को संचालन की अनुमति जनता की सुविधा और विकास के लिए दी गई थी, लेकिन वर्तमान स्थिति में लोगों को केवल धूल, धुआं और परेशानी ही मिल रही है। अब क्षेत्रवासी प्रशासन से ठोस कार्रवाई और स्थायी समाधान की उम्मीद लगाए बैठे हैं।












