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हथबंध में बैंक भवन निर्माण को लेकर बढ़ा विवाद स्कूल और रिहायशी क्षेत्र के पास शाखा खोलने का ग्रामीणों ने किया विरोध, सुरक्षित सोसायटी भूमि पर निर्माण की मांग

देश / दुनिया 22 May 2026 (183)

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प्रभात न्यूज़ 24: 

हथबंध में बैंक भवन निर्माण को लेकर बढ़ा विवाद

स्कूल और रिहायशी क्षेत्र के पास शाखा खोलने का ग्रामीणों ने किया विरोध, सुरक्षित सोसायटी भूमि पर निर्माण की मांग



बलौदाबाजार/हथबंध।

 ग्राम पंचायत हथबंध में जिला सहकारी केंद्रीय बैंक शाखा भवन निर्माण को लेकर अब ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों का विरोध तेज हो गया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि बैंक भवन के लिए जिस भूमि का चयन किया जा रहा है, वह न केवल स्कूल और रिहायशी क्षेत्र के बेहद करीब है, बल्कि भविष्य में यातायात और सार्वजनिक गतिविधियों के लिए भी गंभीर समस्या खड़ी कर सकता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि बैंक शाखा का निर्माण उस भूमि पर किया जाए, जिसे वर्षों पहले सोसायटी और बैंक संचालन के उद्देश्य से सुरक्षित रखा गया था।



जानकारी के अनुसार ग्राम हथबंध में पिछले लगभग आठ वर्षों से सहकारी समिति के माध्यम से धान खरीदी का कार्य संचालित किया जा रहा है। वर्तमान में समिति को ठाकर देव मंदिर के समीप स्थित प्रवर्तित स्थल पर स्थानांतरित किया गया है, जहां लगभग एक एकड़ क्षेत्र में संग्रहण केंद्र विकसित किया गया है और सोसायटी के समस्त कार्य यहीं से संचालित हो रहे हैं। इसके बावजूद अब बैंक भवन निर्माण के लिए अलग से नई भूमि की मांग किए जाने पर ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं।



ग्रामीणों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों का कहना है कि लगभग 30 वर्ष पूर्व तत्कालीन सरपंच एवं ग्राम पटेल सुरेश यादव के कार्यकाल में भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए बाजार चौक के समीप लगभग आधा एकड़ भूमि सोसायटी एवं बैंक संचालन के लिए सुरक्षित रखी गई थी। यह भूमि वर्तमान में भी खाली पड़ी हुई है और बैंक संचालन के लिए पूरी तरह उपयुक्त मानी जा रही है।



ग्रामीणों का तर्क है कि बाजार क्षेत्र के पास स्थित उक्त भूमि किसानों, उपभोक्ताओं, कर्मचारियों और आम नागरिकों के लिए अधिक सुविधाजनक साबित होगी। यहां पहुंच आसान होने के साथ-साथ व्यापारिक गतिविधियों का भी लाभ मिलेगा, जिससे बैंक के आर्थिक लेन-देन में वृद्धि होने की संभावना है। वहीं दूसरी ओर वर्तमान में जिस खसरा नंबर 122/1 की भूमि पर बैंक निर्माण प्रस्तावित बताया जा रहा है, उसे लेकर गांव में लगातार विरोध की स्थिति बनी हुई है।



ग्रामीणों के अनुसार प्रस्तावित स्थल के आसपास आत्मानंद स्कूल, ग्रेस स्कूल तथा घनी आबादी वाला रिहायशी क्षेत्र स्थित है। यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में स्कूली बच्चों और ग्रामीणों की आवाजाही रहती है। ऐसे में बैंक संचालन शुरू होने पर भीड़, वाहनों की आवाजाही और सुरक्षा संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं। 



स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस भूमि पर निर्माण की बात की जा रही है, वहां वर्षों से सामाजिक, धार्मिक एवं सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित होते रहे हैं। शादी समारोह, सामुदायिक आयोजन और अन्य गतिविधियों के लिए यह स्थान ग्रामीणों के उपयोग में आता रहा है।

मामले में एक और महत्वपूर्ण पहलू सामने आया है। ग्रामीणों ने बताया कि हथबंध रेलवे ओवरब्रिज को शासन से स्वीकृति मिल चुकी है और प्रस्तावित निर्माण के तहत पुल के पिलर भी इसी क्षेत्र के आसपास बनने हैं। ऐसे में भविष्य में यातायात दबाव बढ़ने की संभावना है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि इसी क्षेत्र में बैंक भवन का निर्माण किया गया तो आने वाले समय में आवागमन और पार्किंग की गंभीर समस्या उत्पन्न हो सकती है।



ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि पंचायत एवं सोसायटी द्वारा प्रस्तावित भूमि चयन की प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से नहीं की गई। उनका कहना है कि पूरे मामले में गोपनीय तरीके से प्रस्ताव पारित किया गया और इसकी व्यापक जानकारी ग्रामीणों तक नहीं पहुंचाई गई। आरोप है कि नियमानुसार सार्वजनिक सूचना या इश्तहार का उचित प्रकाशन भी नहीं किया गया।

बताया जा रहा है कि इस संबंध में 14 मई 2025 को वार्डवासियों एवं जनप्रतिनिधियों द्वारा तहसील कार्यालय में लिखित आपत्ति दर्ज कराई गई थी। इसके बाद ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर भी शिकायत प्रस्तुत की और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।



पूर्व सरपंच एवं ग्राम पटेल सुरेश यादव ने भी इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पूर्व में सुरक्षित रखी गई भूमि का उद्देश्य भविष्य में सोसायटी और बैंक का संयुक्त संचालन सुनिश्चित करना था। 



उन्होंने कहा कि वर्तमान में सोसायटी को पहले से लगभग आधा एकड़ भूमि उपलब्ध है तथा संग्रहण केंद्र के लिए करीब एक एकड़ अतिरिक्त भूमि भी दी जा चुकी है। ऐसे में बैंक के लिए अलग से नई भूमि की मांग करना उचित प्रतीत नहीं होता।



उन्होंने यह भी कहा कि यदि पहले से सुरक्षित और उपयुक्त भूमि उपलब्ध है तो प्रशासन को उसी पर प्राथमिकता के आधार पर विचार करना चाहिए, ताकि किसानों और ग्रामीणों को भविष्य में किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।



अब यह मामला गांव में चर्चा का प्रमुख विषय बन गया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि उनकी मांगों और आपत्तियों को नजरअंदाज किया गया तो आगे व्यापक जनआंदोलन भी किया जा सकता है। वहीं स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभाग की ओर से अभी तक इस विवाद पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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