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ग्राम पंचायत हथबंध में 'बार-बार सचिवों के तबादले' का दावा सवालों के घेरे में, अभिलेखों ने खोली पूरी हकीकत

देश / दुनिया 24 July 2026 (228)

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प्रभात न्यूज़ 24: 

ग्राम पंचायत हथबंध में 'बार-बार सचिवों के तबादले' का दावा सवालों के घेरे में, अभिलेखों ने खोली पूरी हकीकत



सिमगा/बलौदाबाजार। 

ग्राम पंचायत हथबंध में सचिवों के लगातार तबादले किए जाने संबंधी चर्चाओं के बीच अब उपलब्ध प्रशासनिक अभिलेखों और पदस्थापना के क्रम ने पूरे मामले की नई तस्वीर सामने रख दी है। रिकॉर्ड के अनुसार ग्राम पंचायत हथबंध में सचिव का नियमित तबादला केवल एक बार हुआ, जबकि इसके बाद की व्यवस्थाएं प्रशासनिक आवश्यकता के तहत अतिरिक्त प्रभार के रूप में की गईं। 

ऐसे में बार-बार तबादले किए जाने का दावा उपलब्ध तथ्यों से मेल नहीं खाता।



स्थानीय स्तर पर पिछले कुछ समय से यह चर्चा थी कि ग्राम पंचायत हथबंध में सचिवों को लगातार बदला जा रहा है, जिससे पंचायत का कामकाज प्रभावित हो रहा है। हालांकि, अब सामने आए दस्तावेजों और पदस्थापना के क्रम के आधार पर यह स्पष्ट हो रहा है कि वास्तविक स्थिति इससे अलग है। प्रशासनिक व्यवस्था के तहत जहां नियमित पदस्थापना की आवश्यकता रही, वहीं कई अवसरों पर अतिरिक्त प्रभार देकर पंचायत के कार्यों का संचालन कराया गया।



नवंबर 2022 में कमल किशोर साहू ने संभाला था कार्यभार

उपलब्ध जानकारी के अनुसार 4 नवंबर 2022 को सचिव कमल किशोर साहू ने ग्राम पंचायत हथबंध का प्रभार ग्रहण किया था। उन्होंने लगभग ढाई वर्षों तक पंचायत में नियमित रूप से अपनी सेवाएं दीं। इस दौरान पंचायत के नियमित प्रशासनिक कार्य, विकास योजनाओं का संचालन तथा विभिन्न शासकीय योजनाओं का क्रियान्वयन उनके कार्यकाल में होता रहा।



करीब ढाई वर्ष तक कार्य करने के बाद 29 मई 2025 को उन्होंने ग्राम पंचायत हथबंध का प्रभार वीरेंद्र ध्रुव को सौंपा। यह व्यवस्था नियमित तबादले के रूप में नहीं बल्कि अतिरिक्त प्रभार के तौर पर की गई थी।



अतिरिक्त प्रभार मिलने के बाद वीरेंद्र ध्रुव ने किया अनुरोध

जानकारी के अनुसार अतिरिक्त प्रभार मिलने के कुछ समय बाद जून 2025 में वीरेंद्र ध्रुव ने जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को पत्र लिखकर अपनी व्यावहारिक कठिनाइयों से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि उनका गृहग्राम हथबंध से काफी दूरी पर स्थित है तथा वे पहले से ही ग्राम पंचायत अमेरी में पदस्थ हैं।



दोहरी जिम्मेदारी और दूरी के कारण कार्यों के प्रभावी संचालन में कठिनाई होने का उल्लेख करते हुए उन्होंने हथबंध का अतिरिक्त प्रभार हटाने का अनुरोध किया। प्रशासन द्वारा परिस्थितियों का परीक्षण करने के बाद उनका अनुरोध स्वीकार कर लिया गया और अतिरिक्त प्रभार वापस ले लिया गया।

जुलाई 2025 में विनोद दास वैष्णव को सौंपा गया अतिरिक्त प्रभार

वीरेंद्र ध्रुव का अतिरिक्त प्रभार हटने के बाद प्रशासन ने पंचायत के कार्य प्रभावित न हों, इसके लिए जुलाई 2025 से ग्राम पंचायत हथबंध का अतिरिक्त प्रभार विनोद दास वैष्णव को सौंप दिया।

यह व्यवस्था भी नियमित स्थानांतरण नहीं बल्कि केवल अतिरिक्त प्रशासनिक दायित्व के रूप में की गई थी ताकि पंचायत का दैनिक कार्य, योजनाओं का संचालन और कार्यालयीन गतिविधियां सुचारु रूप से चलती रहें।

मार्च और मई 2026 में हुई आगे की प्रशासनिक कार्रवाई

उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार 10 मार्च 2026 को विनोद दास वैष्णव को अतिरिक्त प्रभार से हटा दिया गया। इसके बाद 11 मई 2026 को उन्हें ग्राम पंचायत हथबंध से विधिवत भारमुक्त कर दिया गया।

इस पूरी प्रक्रिया में प्रशासनिक आदेशों के अनुसार अतिरिक्त प्रभार का आवंटन और वापसी की कार्रवाई की गई, जिसे नियमित तबादले के रूप में नहीं देखा जा सकता।



रिकॉर्ड क्या बताते हैं?

यदि पूरे घटनाक्रम को क्रमवार देखा जाए तो स्थिति इस प्रकार सामने आती है—

4 नवंबर 2022 – कमल किशोर साहू ने ग्राम पंचायत हथबंध का प्रभार ग्रहण किया।

29 मई 2025 – कमल किशोर साहू ने वीरेंद्र ध्रुव को अतिरिक्त प्रभार सौंपा।

जून 2025 – वीरेंद्र ध्रुव ने दूरी और कार्यभार का हवाला देते हुए अतिरिक्त प्रभार हटाने का अनुरोध किया।



जुलाई 2025 – ग्राम पंचायत हथबंध का अतिरिक्त प्रभार विनोद दास वैष्णव को दिया गया।

10 मार्च 2026 – विनोद दास वैष्णव से अतिरिक्त प्रभार वापस लिया गया।

11 मई 2026 – उन्हें विधिवत भारमुक्त किया गया।

इस क्रम से यह स्पष्ट होता है कि पूरे समय में नियमित स्थानांतरण की बजाय अधिकांश व्यवस्थाएं अतिरिक्त प्रभार के माध्यम से संचालित होती रहीं।



'बार-बार तबादले' के दावे पर उठे सवाल

प्रशासनिक अभिलेखों के सामने आने के बाद बार-बार सचिवों के तबादले किए जाने के दावे पर सवाल खड़े हो गए हैं। उपलब्ध दस्तावेज यह संकेत देते हैं कि नियमित स्थानांतरण की संख्या सीमित रही, जबकि पंचायत के कामकाज को प्रभावित होने से बचाने के लिए अतिरिक्त प्रभार की व्यवस्था अपनाई गई।



स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि अतिरिक्त प्रभार और नियमित तबादले को एक ही रूप में प्रस्तुत किए जाने से भ्रम की स्थिति बनी। प्रशासनिक प्रक्रिया में दोनों व्यवस्थाओं का स्वरूप अलग-अलग होता है।


प्रशासनिक व्यवस्था का उद्देश्य

पंचायतों में यदि किसी कारणवश नियमित सचिव उपलब्ध नहीं होता है या पदस्थापना में अंतराल आता है, तो कार्यों की निरंतरता बनाए रखने के लिए निकटवर्ती पंचायत के सचिव को अतिरिक्त प्रभार दिया जाना सामान्य प्रशासनिक व्यवस्था मानी जाती है। इसका उद्देश्य विकास कार्य, वित्तीय प्रक्रिया, शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन और नागरिक सेवाओं को बाधित होने से बचाना होता है।

स्थानीय स्तर पर उठ रही प्रतिक्रियाएं

मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर विभिन्न प्रकार की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोगों का कहना है कि पंचायत से जुड़े तथ्यों को अधूरी जानकारी के आधार पर प्रस्तुत करने से भ्रम फैलता है, जबकि कई लोगों का मानना है कि प्रशासनिक अभिलेखों के आधार पर ही किसी भी मामले का मूल्यांकन किया जाना चाहिए।

स्थानीय नागरिकों का यह भी कहना है कि पंचायतों से जुड़े मामलों में पारदर्शिता बनाए रखने तथा वास्तविक तथ्यों को सार्वजनिक किए जाने से अनावश्यक विवादों से बचा जा सकता है।



निष्कर्ष

उपलब्ध अभिलेखों और पदस्थापना के क्रम के आधार पर यह संकेत मिलता है कि ग्राम पंचायत हथबंध में सचिवों का बार-बार नियमित तबादला नहीं हुआ, बल्कि प्रशासनिक आवश्यकता के अनुरूप अतिरिक्त प्रभार की व्यवस्था लागू की गई। ऐसे में बार-बार तबादलों का दावा उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुरूप प्रतीत नहीं होता। यदि भविष्य में इस संबंध में प्रशासन की ओर से कोई नया आधिकारिक स्पष्टीकरण या आदेश जारी किया जाता है, तो उसके आधार पर स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।

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